ग्रेटर नोएडा पीएनबी घोटाला: करोड़ों की हेराफेरी, सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर, ग्राहकों में इस बात की बेचैनी
पंजाब नेशनल बैंक की ग्रेटर नोएडा शाखा में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सीबीआई की गाजियाबाद यूनिट ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली है। अब सीबीआई की टीम इस पूरे मामले की जांच करेगी।
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पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की सेक्टर पाई स्थित शाखा में ग्राहकों की जमा पूंजी में सेंध लगाने के मामले सीबीआई ने केस दर्ज किया है। बैंक की प्रारंभिक जांच में करीब 10.24 करोड़ रुपये की हेराफेरी का खुलासा हुआ है। आरोप है कि शाखा में तैनात एक महिला कर्मचारी ने दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर करीब तीन साल तक ग्राहकों के खातों से अवैध रूप से रकम निकाली। इस रकम को अपने परिचितों और अन्य लोगों के खातों में स्थानांतरित किया गया। इतना ही नहीं, ग्राहकों की सावधि जमा (एफडी) को भी समय से पहले बंद कराकर रकम निकालने का आरोप है। बैंक की शिकायत पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की गाजियाबाद स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने गुरुवार को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बैंक की ओर से 23 अक्तूबर को सीबीआई को दी गई शिकायत में कार्यालय सहायक/सब स्टाफ के पद पर तैनात दीपांशी को मुख्य आरोपी बताया गया है। बैंक की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उसने बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) में दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी का इस्तेमाल कर ग्राहकों के खातों में अनधिकृत लेनदेन किए। इस दौरान बैंकिंग प्रक्रिया का दुरुपयोग कर बचत खातों के साथ एफडी में भी गड़बड़ी की गई। फिलहाल बैंक ने 10.24 करोड़ रुपये की हेराफेरी की पहचान की है। अन्य खातों का मिलान अभी जारी है।
पासबुक अपडेट कराने पहुंची ग्राहक से खुला मामला
बैंक में गड़बड़ी का खुलासा ग्राहक संगीता की शिकायत के बाद हुआ। वह अपने पति और बेटी के साथ पासबुक अपडेट कराने शाखा पहुंची थीं। पासबुक में 16 सितंबर 2026 को हुए तीन ऐसे लेनदेन दर्ज मिले, जिनकी जानकारी उन्हें नहीं थी। उन्होंने इसकी शिकायत शाखा प्रबंधक से की। उस समय शाखा प्रबंधक मौजूद नहीं थे। आरोप है कि दीपांशी ने ग्राहक से बातचीत कर लेनदेन को सही बताया।
बाद में शाखा प्रबंधक ने इस संबंध में दीपांशी से पूछताछ की। बैंक की शिकायत के मुताबिक, उसने बताया कि संगीता ने संपत्ति में निवेश के लिए रकम अशोक कुमार पाठक के खाते में भेजी थी। हालांकि, जांच के दौरान संबंधित लेनदेन के वाउचर बैंक के रिकॉर्ड में नहीं मिले। पूछताछ में दीपांशी ने कथित तौर पर अपनी भूमिका स्वीकार करते हुए बताया कि उसने अधिकारियों की जानकारी के बिना उनकी यूजर आईडी का इस्तेमाल किया था। आरोप है कि उसने अनधिकृत लेनदेन से जुड़े वाउचर भी नष्ट कर दिए थे।
बैंक की शिकायत के अनुसार, ग्राहकों के खातों से निकाली गई रकम सात लोगों के खातों में स्थानांतरित की गई। इनमें अशोक कुमार पाठक, प्रदीप कुमार, मेबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी के नाम शामिल हैं। कुछ रकम सीधे अशोक कुमार पाठक के खाते में पहुंचाई गई, जबकि कुछ अन्य खातों के माध्यम से वहां तक पहुंचाई गई। बैंक को आशंका है कि लेनदेन की जानकारी ग्राहकों तक न पहुंचे, इसके लिए कुछ खातों में मोबाइल पर संदेश मिलने की सुविधा भी बंद या परिवर्तित की गई थी।
49 एफडी बंद कराकर निकाली गई रकम
इस पूरे मामले में एफडी के जरिये की गई हेराफेरी भी सामने आई है। बैंक की शिकायत के साथ संलग्न सूची में 49 एफडी को समय से पहले बंद किए जाने का ब्योरा दिया गया है। आरोप है कि कुछ एफडी में अशोक कुमार पाठक और अन्य लोगों को संयुक्त खाताधारक बनाया गया। इसके बाद भुगतान खाते का विवरण बदलकर एफडी को समय से पहले बंद कराया गया। इन एफडी से मिली रकम को संदिग्ध लाभार्थियों के खातों में स्थानांतरित कर दिया गया। बैंक के रिकॉर्ड के अनुसार, 49 एफडी बंद होने से 10.23 करोड़ रुपये से अधिक की रकम निकाली गई। बैंक की कुल शिकायत में हेराफेरी की रकम 10.24 करोड़ रुपये बताई गई है।
तीन साल तक होती रही हेराफेरी, बढ़ सकती है प्रभावितों की संख्या
बैंक की प्रारंभिक जांच में करीब तीन साल तक अनधिकृत लेनदेन किए जाने के संकेत मिले हैं। फिलहाल सामने आए मामलों में 10.24 करोड़ रुपये की रकम की पहचान हुई है। बैंक की ओर से ग्राहकों के खातों और पुराने लेनदेन का मिलान किया जा रहा है। ऐसे में प्रभावित खाताधारकों और संदिग्ध लेनदेन की संख्या बढ़ने की आशंका है। बैंक ने अपनी शिकायत में कहा है कि दीपांशी इस तरह के लेनदेन करने के लिए अधिकृत नहीं थी। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।
सीबीआई ने इन धाराओं में दर्ज किया केस
सीबीआई ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316, 318 और 344, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। मामले की जांच सीबीआई के डीएसपी डॉ. जाहिर अख्तर को सौंपी गई है। प्राथमिकी में बैंककर्मी दीपांशी, अशोक कुमार पाठक और अन्य निजी व्यक्तियों के साथ अज्ञात लोकसेवकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सीबीआई अब बैंक के दस्तावेज, लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड, संबंधित खातों और यूजर आईडी के इस्तेमाल से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल करेगी।