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Noida News: गुरु मंत्र भाषा से संस्कार और सशक्तिकरण तक
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इंदिरा साहू, शिक्षिका
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नई शिक्षा नीति में विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा प्रदान करने को प्रोत्साहित किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी परिचित भाषा में सीखने का अवसर देकर उनकी समझ और अभिव्यक्ति को बेहतर बनाना है। हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी विद्यार्थियों के लिए सीखने की प्रक्रिया को सहज, स्वाभाविक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सीबीएसई की शिक्षा व्यवस्था में हिंदी केवल एक विषय नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य, संस्कृति और मूल्यों से जुड़ने का माध्यम भी है। हिंदी के अध्ययन से विद्यार्थी कबीर, तुलसीदास, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा जैसे महान साहित्यकारों की रचनाओं के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को समझते हैं।
आज तकनीकी युग में हिंदी का स्वरूप भी व्यापक हो रहा है। डिजिटल सामग्री, ई-पुस्तकें, शैक्षिक ऐप, ऑनलाइन कक्षाएं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संसाधनों ने हिंदी में ज्ञान की पहुंच को और सरल बनाया है। विद्यालयों में हिंदी शिक्षण को केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित न रखकर कहानी, नाटक, कविता, वाद विवाद, परियोजना कार्य और डिजिटल गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए।
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इंदिरा साहू, शिक्षिका, मॉडर्न स्कूल, नोएडा
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सीबीएसई की शिक्षा व्यवस्था में हिंदी केवल एक विषय नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य, संस्कृति और मूल्यों से जुड़ने का माध्यम भी है। हिंदी के अध्ययन से विद्यार्थी कबीर, तुलसीदास, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा जैसे महान साहित्यकारों की रचनाओं के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को समझते हैं।
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आज तकनीकी युग में हिंदी का स्वरूप भी व्यापक हो रहा है। डिजिटल सामग्री, ई-पुस्तकें, शैक्षिक ऐप, ऑनलाइन कक्षाएं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संसाधनों ने हिंदी में ज्ञान की पहुंच को और सरल बनाया है। विद्यालयों में हिंदी शिक्षण को केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित न रखकर कहानी, नाटक, कविता, वाद विवाद, परियोजना कार्य और डिजिटल गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए।
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इंदिरा साहू, शिक्षिका, मॉडर्न स्कूल, नोएडा