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बेसमेंट में होती थी धर्मांतरण की 'सभा': पांच वर्षों से जुट रहे थे लोग, व्हाट्सएप ग्रुप पर होता था प्रचार

माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 09 Feb 2026 06:28 PM IST
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सार

पुलिस ने स्थानीय निवासियों की मदद से लालच देकर ईसाई धर्म में धर्मांतरण के लिए उकसाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर एक मकान के बेसमेंट से धर्म से संबंधित पुस्तकें और सामग्री बरामद की है। 

Police sealed house from where Christian conversion gang was operating
इसी मकान के बेसमेंट में होती थीं सभाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने आरडब्ल्यूए और स्थानीय निवासियों की मदद से रविवार को गरीबों और बीमार लोगों को रुपये, मुफ्त इलाज और बच्चों की पढ़ाई का लालच देकर ईसाई धर्म में धर्मांतरण के लिए उकसाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर सेक्टर-36 स्थित एक मकान के बेसमेंट से बड़ी मात्रा में ईसाई धर्म से संबंधित पुस्तकें, क्रॉस, मोमबत्तियां और अन्य सामग्री बरामद की है। आरोप है कि करीब पांच वर्षों से यहां नियमित रूप से प्रार्थना-सभाएं आयोजित की जा रही थीं। जिनमें आसपास की सोसाइटियों से लोगों को बुलाया जाता था। मकान को सील कर दिया गया है। 

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जानकारी के मुताबिक, रविवार दोपहर सेक्टर-36 बी-ब्लॉक स्थित बी-224 नंबर मकान में चल रही प्रार्थना-सभा का उस समय विरोध हो गया। जब स्थानीय निवासी मोहन सिंह को इसकी जानकारी मिली। वह दोपहर करीब 12 बजे मकान के बेसमेंट में पहुंचे। जहां करीब 60 से 70 महिला-पुरुष मौजूद थे। आरोप है कि सभा में शामिल लोगों को रुपयों, बच्चों की पढ़ाई और बीमारों के ठीक होने का झांसा देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। विरोध करने पर अंदर मौजूद लोगों ने विवाद शुरू कर दिया। मोहन सिंह ने बाहर निकलकर बेसमेंट का गेट बंद कर दिया और आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों और पुलिस को सूचना दी।

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आरोपियों की पुलिस से भी हुई नोकझोंक
सूचना पर आरडब्ल्यूए अध्यक्ष अजय भाटी, डायल-112 टीम और प्रभारी निरीक्षक मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बिना अनुमति भारी संख्या में लोगों को एकत्र कर प्रार्थना-सभा आयोजित करने पर आपत्ति जताई। आरोप है कि इस दौरान आरोपियों ने पुलिस से भी नोकझोंक करने का प्रयास किया। स्थिति को नियंत्रित करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी टैक्सी चालक सुरेश कुमार, उसकी पत्नी आशा, साली गीता और ऐच्छर निवासी चंद्र किरण को हिरासत में लेकर कोतवाली पहुंचाया।

आरोपियों ने धर्मांतरण की बात को नकारा
पूछताछ के बाद पुलिस ने बांसवाड़ा राजस्थान निवासी गिरोह के सरगना सुरेश कुमार और ऐच्छर निवासी चंद्र किरण को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी सुरेश वर्तमान में सिग्मा-2 में रहता है। पुलिस ने मकान के बेसमेंट में बने प्रार्थना-सभा स्थल को सील कर वहां से बरामद ईसाई धर्म से संबंधित सामग्री को कब्जे में ले लिया है। पूछताछ में आरोपियों ने किसी का जबरन धर्मांतरण कराने से इनकार किया है। उनका कहना है कि वह गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ाते थे और जरूरतमंदों को उपहार देते थे। हालांकि पुलिस ने प्रार्थना-सभा और अन्य माध्यमों से धर्मांतरण के लिए उकसाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

व्हाट्सएप ग्रुप से हो रहा था प्रचार
जांच के दौरान पुलिस ने सुरेश कुमार का मोबाइल फोन कब्जे में लिया है। मोबाइल में ‘पास्टर’ नाम का एक व्हाट्सएप ग्रुप मिला है। जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं। इस ग्रुप पर ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार से जुड़ी सामग्री नियमित रूप से साझा की जा रही थी। पुलिस को आशंका है कि सुरेश की पत्नी, साली और चंद्रकिरण ने भी अलग-अलग ग्रुप बनाकर लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने वाली सामग्री भेजी है। पुलिस सभी आरोपियों के बैंक खातों की भी जांच कर रही है। जिससे यह पता लगाया जा सके कि आर्थिक लेन-देन के जरिए लोगों को प्रलोभन तो नहीं दिया गया।

पिता की बीमारी से शुरू हुआ ईसाई धर्म की ओर झुकाव
पुलिस जांच में सामने आया है कि करीब नौ वर्ष पहले सुरेश कुमार के पिता शंकर गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। लंबे इलाज के बाद भी राहत नहीं मिलने पर सुरेश का संपर्क ईसाई धर्म से जुड़े कुछ लोगों से हुआ। दावा है कि प्रार्थना के बाद पिता के ठीक होने से सुरेश इस धर्म से प्रभावित हो गया। इसके बाद से वह लोगों को प्रार्थना-सभाओं से जोड़ने लगा। बीते करीब पांच वर्षों से वह ग्रेटर नोएडा के सिग्मा क्षेत्र में रहकर टैक्सी चला रहा था और साथ-साथ प्रार्थना-सभाओं का आयोजन कर रहा था।

बच्चों और महिलाओं को बनाया जा रहा था निशाना
प्रार्थना-सभा में शामिल एक महिला ने पुलिस को बताया कि उसके बीमार दामाद के ठीक होने के बाद वह इन सभाओं में जाने लगी थी। आरोप है कि यहां बच्चों को निशुल्क पढ़ाने, उनकी शादी कराने और रुपये देने का लालच देकर धर्मांतरण के लिए उकसाया जाता था। बच्चों को किताबें, टॉफी, कपड़े और अन्य उपहार भी दिए जाते थे, जिससे वे और उनके परिजन सभाओं से जुड़े रहें। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। बरामद सामग्री, मोबाइल फोन और बैंक खातों से मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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