UGC NET Topper: यूजीसी नेट में दीक्षा मक्कड़ ने हासिल की एआईआर-1; इतने प्रयासों के बाद मिली सफलता
यूजीसी नेट दिसंबर 2025 सत्र की परीक्षा में हरियाणा के अंबाला की रहने वाली दीक्षा मक्कड़ ने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है। यह उपलब्धि उन्हें अपने पांचवें प्रयास में हासिल की है। आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी...
विस्तार
हरियाणा के अंबाला की रहने वाली दीक्षा मक्कड़ पिछले तीन वर्षों से लगातार यूजीसी-नेट परीक्षा की तैयारी कर रही थीं और आखिरकार अपने पांचवें प्रयास में उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर कीर्तिमान रच दिया। उनके मुताबिक, निरंतर प्रयास और सही दिशा मिलने से ही वह इस बार ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर सकीं।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
एक इंटरव्यू में दीक्षा ने बताया कि बार-बार असफल होने के कारण कई बार उनका मन टूटने लगा था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी नजरों से ओझल नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि वह पिछले तीन साल से यूजीसी-नेट की तैयारी कर रही थीं और पहले चार प्रयासों में कुछ अंकों से परीक्षा पास करने से चूक जाती थीं। इस बार उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग भी ली और शिक्षकों व सुपरवाइजर्स के मार्गदर्शन ने उन्हें सफलता तक पहुंचाया।
असफलताओं ने सिखाया धैर्य
दीक्षा ने अपने पिछले प्रयासों का अनुभव साझा करते हुए कहा कि-
- पहले प्रयास ने उन्हें परीक्षा के पैटर्न को समझने में मदद की।
- दूसरे प्रयास में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
- तीसरी बार असफल होने के बाद उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगा था।
- चौथे प्रयास के बाद तो उन्होंने परीक्षा छोड़ने तक का मन बना लिया था, मगर परिवार और सुपरवाइजर के समर्थन ने उन्हें फिर से तैयार होने की ताकत दी।
- उसी हौसले के साथ पांचवें प्रयास में उन्होंने शीर्ष स्थान हासिल किया।
सफलता का श्रेय किसे?
दीक्षा का मानना है कि उनकी उपलब्धि के पीछे माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आसान नहीं होती, लेकिन परिवार का भरोसा और सही मार्गदर्शन मुश्किल रास्तों को भी आसान बना देता है। उनके अनुसार, किसी भी परीक्षा में सफलता पाने के लिए धैर्य, अनुशासन और लगातार अभ्यास बेहद जरूरी होते हैं। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि लक्ष्य स्पष्ट रखें और कठिन समय में भी प्रयास करना बंद न करें।
दीक्षा की कहानी यह दिखाती है कि लगातार प्रयास, सही रणनीति और मजबूत मानसिकता के साथ बड़ी से बड़ी परीक्षा में भी शीर्ष स्थान हासिल किया जा सकता है।
असिस्टेंट प्रोफेसर बनना चाहती हैं दीक्षा
अपने भविष्य के बारे में बात करते हुए दीक्षा ने बताया कि वह असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं। साथ ही उनका रुझान सिविल सर्विसेज की ओर भी है और वह उसकी तैयारी भी जारी रखेंगी। उनका मुख्य फोकस फिलहाल अकादमिक क्षेत्र और शिक्षण कार्य पर रहेगा।