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बिरसा मुंडा: क्या है जनजातीय गौरव दिवस? सीबीएसई ने स्कूलों से क्यों की 15 नवंबर तक खास कार्यक्रम कराने की अपील
Sat, 31 Oct 2026 06:51 PM IST
शिवम तिवारी
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवम तिवारी
Updated Sat, 31 Oct 2026 06:51 PM IST
सार
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सभी संबद्ध स्कूलों को 1 से 15 नवंबर 2026 तक जनजातीय गौरव दिवस मनाने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों, भगवान बिरसा मुंडा और जनजातीय संस्कृति को सम्मान दिया जाएगा। स्कूलों में निबंध, भाषण, चित्रकला और सांस्कृतिक कार्यक्रम हो सकते हैं। जानें इस दिवस का महत्व, स्कूलों की जिम्मेदारी और गतिविधियों की जानकारी कहां जमा करनी होगी।
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Janjatiya Gaurav Divas 2026
- फोटो : AI Generated
विस्तार
जनजातीय गौरव दिवस देश के आदिवासी समुदायों के इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद करने का खास अवसर है। हर साल 15 नवंबर को यह दिवस मनाया जाता है। यह तारीख भगवान बिरसा मुंडा की जयंती भी है, जिन्हें आदिवासी समाज में बड़े सम्मान से याद किया जाता है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था। वर्ष 2026 में इसका छठा आयोजन होगा। इस बार 1 से 15 नवंबर तक देशभर में जनजातीय गौरव पखवाड़ा मनाया जाएगा।
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सीबीएसई ने स्कूलों से क्या कहा?
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 30 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में परिपत्र जारी किया है। इसमें बोर्ड से जुड़े सभी स्कूलों के प्रमुखों से 1 से 15 नवंबर तक जनजातीय गौरव दिवस मनाने की अपील की गई है। बोर्ड चाहता है कि विद्यार्थी आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और जनजातीय समुदायों की संस्कृति के बारे में जानें। स्कूलों से कहा गया है कि वे अपनी सुविधा और विद्यार्थियों की उम्र के अनुसार कार्यक्रम आयोजित करें। इन आयोजनों का मकसद केवल एक दिन उत्सव मनाना नहीं, बल्कि बच्चों को देश के इतिहास और विविध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना भी है।
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स्कूलों में कौन-कौन से कार्यक्रम होंगे?
स्कूलों में जनजातीय कला, संगीत, नृत्य, हस्तकला और परंपराओं से जुड़ी गतिविधियां कराई जा सकती हैं। विद्यार्थियों के लिए निबंध, भाषण, चित्रकला, कविता और प्रश्नोत्तरी जैसी प्रतियोगिताएं भी रखी जा सकती हैं। इनका विषय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान, जनजातीय इतिहास और उनकी सांस्कृतिक विरासत हो सकता है। स्कूल विशेष प्रार्थना सभा आयोजित कर सकते हैं और अपने क्षेत्र के जनजातीय समाज से जुड़े उपलब्धि हासिल करने वाले लोगों को सम्मानित कर सकते हैं।
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