प्रल्हाद जोशी: आईआईटी मद्रास के छात्रों से मिले शिक्षा मंत्री, देश के भविष्य और नवाचार पर हुई चर्चा
आईआईटी मद्रास में शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सुबह की सैर के दौरान छात्रों से बातचीत की। चर्चा में भारत का भविष्य, तकनीकी नवाचार और युवाओं के विचार प्रमुख रहे। इससे एक दिन पहले उन्होंने संस्थान के नवाचार केंद्र में छात्र परियोजनाएं भी देखीं।
विस्तार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 8 अक्तूबर को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) परिसर में सुबह की सैर के दौरान छात्रों से बातचीत की। इस दौरान छात्रों ने अपने अनुभव, आकांक्षाएं और भारत के भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए। मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने छात्रों से उनके अनुभवों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। साथ ही, भारत के भविष्य को लेकर उनके विचार भी जाने।
जोशी के मुताबिक, छात्रों का उत्साह, उनके विचार और ऊर्जा इस बातचीत को सार्थक बनाने वाले रहे। उन्होंने इसे भारत की युवा आबादी की क्षमता का प्रतिबिंब बताया। यह बातचीत किसी औपचारिक बैठक के बजाय परिसर में सुबह की सैर के दौरान हुई। इससे छात्रों को शिक्षा मंत्री से सीधे संवाद करने और अपने विचार साझा करने का अवसर मिला।
नवाचार केंद्र में छात्रों ने दिखाए प्रोजेक्ट और तकनीकी नमूने
छात्रों से बातचीत से एक दिन पहले, 7 अक्तूबर को प्रल्हाद जोशी ने आईआईटी मद्रास के नवाचार केंद्र (सीएफआई) का दौरा किया था। यहां छात्र टीमों ने अपने प्रोजेक्ट, तकनीकी नमूने और तकनीक आधारित समाधान प्रस्तुत किए।
नवाचार केंद्र छात्रों को कक्षा में पढ़ाई गई अवधारणाओं से आगे बढ़कर व्यावहारिक परियोजनाओं पर काम करने का अवसर देता है। यहां छात्र अपने अकादमिक ज्ञान का इस्तेमाल वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करने में कर सकते हैं।
जोशी ने छात्रों की रचनात्मकता, व्यावहारिक सोच और उद्यमशीलता की भावना की सराहना की। यह दौरा उच्च शिक्षा में शोध, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर बढ़ते जोर के बीच हुआ।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर भी चर्चा
आईआईटी मद्रास में शिक्षा मंत्री की गतिविधियों में भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) से जुड़े विषय भी शामिल रहे। चर्चा का उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक परंपराओं को आधुनिक शिक्षा, शोध और नवाचार से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार करना था।
आईआईटी मद्रास में भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित शैक्षणिक पहल भी हैं। इनमें भारत में गणित और खगोल विज्ञान, भारतीय सौंदर्यशास्त्र, भारतीय शास्त्रीय साहित्य और संस्कृत आधारित वैज्ञानिक परंपराओं जैसे विषय शामिल हैं।
संस्थान की इन पहलों का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को अकादमिक और शोध के नजरिये से समझना तथा उसे समकालीन अध्ययन क्षेत्रों से जोड़ना है।
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