सुप्रीम कोर्ट: नीट सुधार पर नीलेकणि कमेटी की पहली रिपोर्ट महीने के अंत तक, एससी ने कहा- स्थायी सिस्टम की जरूरत
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली कमेटी नीट में सुधार को लेकर अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट इस महीने के अंत तक सौंप सकती है। कमेटी ने इस संबंध में कई स्तरों पर चर्चा की है।
विस्तार
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि NEET में सुधार के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में बनाई गई हाई-पावर्ड कमेटी ने इस मामले पर विस्तार से चर्चा की है। सरकार को उम्मीद है कि कमेटी महीने के अंत तक अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट सौंप देगी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच को बताया कि NEET में सुधार से जुड़े सभी सुझाव कमेटी के सामने रखे गए हैं। कमेटी ने ISRO के पूर्व चेयरमैन के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पिछली कमेटी के सदस्यों से भी चर्चा की है।
कोर्ट ने NEET के लिए स्थायी सिस्टम बनाने पर दिया जोर
बेंच ने डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के जॉइंट सेक्रेटरी, जो नीलेकणि कमेटी की मदद कर रहे हैं, से अब तक उठाए गए कदमों के बारे में कोर्ट में हलफनामा दाखिल करने को कहा।
अदालत ने मेहता से कहा कि इस मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि सरकार को नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) कराने की पूरी प्रक्रिया को संस्थागत बनाने (यानी एक स्थायी सिस्टम बनाने) पर ध्यान देना चाहिए।
बेंच ने मेहता से कहा, "आपको पता होना चाहिए कि पूरे सिस्टम का स्थायी होना बहुत जरूरी है। इसके लिए एक स्थायी सेटअप, स्थायी स्टाफ और स्थायी विभाग होने चाहिए। डेपुटेशन (दूसरे विभागों से स्टाफ बुलाने) का इस्तेमाल कम से कम होना चाहिए। तभी एक स्थायी ढांचा तैयार हो पाएगा।"
एनटीए की नई सुविधा का जायजा लेंगे SC जज
जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि वह और जस्टिस अराधे सिस्टम की जांच करने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की नई और अपग्रेड की गई सुविधा का दौरा करना चाहेंगे। शिक्षा विभाग ने कहा है कि एक नया और अपग्रेड किया गया सिस्टम बनाया गया है।
मेहता ने कहा, "ढांचे को स्थायी बना दिया गया है। हालांकि, अभी मानव संसाधन (स्टाफ) की व्यवस्था पूरी तरह से स्थायी नहीं हो पाई है।"
19 अगस्त को, NTA में सुधारों को संस्थागत बनाने की जरूरत को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह राधाकृष्णन पैनल और नीलेकणी समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दे। सुप्रीम कोर्ट कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें 'फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन' (FAIMA) की ओर से वकील तन्वी दुबे द्वारा दायर याचिका भी शामिल थी।
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