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सीट का समीकरण: पिछले छह चुनाव से सपा के महमूद का राज, 33 साल पहले यहां जीती थी भाजपा, ऐसा संभल का इतिहास
Wed, 02 Sep 2026 08:46 PM IST
अमन तिवारी
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 02 Sep 2026 08:46 PM IST
सार
संभल विधानसभा सीट साल 1957 में अस्तित्व में आई। इस सीट पर निर्दलीय, कांग्रेस, जनता दल, भाजपा और सपा जैसे दल जीत दर्ज कर चुके हैं। बसपा को यहां अब तक जीत नहीं मिली। पिछले सात चुनावों में लगातार छह बार सपा तो एक बार भाजपा को इस सीट पर जीत मिली है। आइये इस सीट का सियासी इतिहास जानते हैं...
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संभल सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो चुका है। यहां तक की एआई को भी हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की चुनावी हलचल के बीच हम आपको प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में हमारी खास सीरीज 'सीट का समीकरण में' विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात संभल जिले की संभल विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास क्या रहा है।
पहले जानते हैं संभल विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन 75 जिलों में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं जिलों में से एक जिला संभल है। जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं। इनमें- असमौली, चंदौसी, गुन्नौर और संभल शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की आज की कड़ी में हम संभल विधानसभा सीट की बात करेंगे। संभल विधानसभा क्षेत्र साल 1957 में अस्तित्व में आया था और यहां पहला चुनाव साल 1957 में हुआ था। इससे पहले यह क्षेत्र दो भागों (संभल ईस्ट और हसनपुर साउथ-कम-संभल वेस्ट) में बंटा हुआ था। परिसीमन के बाद बनी इस एकल सीट के पहले विधायक महमूद हुसैन खान बने थे। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
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पहले जानते हैं संभल विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन 75 जिलों में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं जिलों में से एक जिला संभल है। जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं। इनमें- असमौली, चंदौसी, गुन्नौर और संभल शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की आज की कड़ी में हम संभल विधानसभा सीट की बात करेंगे। संभल विधानसभा क्षेत्र साल 1957 में अस्तित्व में आया था और यहां पहला चुनाव साल 1957 में हुआ था। इससे पहले यह क्षेत्र दो भागों (संभल ईस्ट और हसनपुर साउथ-कम-संभल वेस्ट) में बंटा हुआ था। परिसीमन के बाद बनी इस एकल सीट के पहले विधायक महमूद हुसैन खान बने थे। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
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इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
संभल जिले की संभल विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
संभल विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में सबसे बड़ी हिस्सेदारी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 68% हैं। इसके बाद अनुसूचित जाति समुदाय की हिस्सेदारी करीब 13% है। वहीं, जाट मतदाताओं की संख्या लगभग 3% और यादव समाज के मतदाता करीब 2% हैं। बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों और समुदायों से आते हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता सबसे निर्णायक और प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं।
संभल विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
पहले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी ने मारी बाजी
1957 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, संभल विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार महमूद हुसैन खान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के जरीफ हुसैन को 7,781 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में महमूद हुसैन खान को 22,351 वोट मिले, जबकि जरीफ हुसैन को 14,570 वोट मिले।
1962: रिपब्लिकन पार्टी जीती
इस विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर रिपब्लिकन पार्टी (REP) के महमूद हसन खान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ (JS) के महेश चंद्र को 4,734 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में महमूद हसन खान को 21,568 वोट मिले, जबकि महेश चंद्र को 16,834 वोट मिले।
संभल विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में सबसे बड़ी हिस्सेदारी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 68% हैं। इसके बाद अनुसूचित जाति समुदाय की हिस्सेदारी करीब 13% है। वहीं, जाट मतदाताओं की संख्या लगभग 3% और यादव समाज के मतदाता करीब 2% हैं। बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों और समुदायों से आते हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता सबसे निर्णायक और प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं।
संभल विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
पहले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी ने मारी बाजी
1957 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, संभल विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार महमूद हुसैन खान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के जरीफ हुसैन को 7,781 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में महमूद हुसैन खान को 22,351 वोट मिले, जबकि जरीफ हुसैन को 14,570 वोट मिले।
1962: रिपब्लिकन पार्टी जीती
इस विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर रिपब्लिकन पार्टी (REP) के महमूद हसन खान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ (JS) के महेश चंद्र को 4,734 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में महमूद हसन खान को 21,568 वोट मिले, जबकि महेश चंद्र को 16,834 वोट मिले।
1967: पहली बार जीती भारतीय जनसंघ
1962 के बाद राज्य में 1967 के विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनसंघ (BJS) के महेंद्र कुमार विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार महमूद हसन खान को 4,852 वोटों के अंतर से हराया।
1969: भारतीय क्रांति दल ने मारी बाजी
इसके बाद 1969 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट से भारतीय क्रांति दल (BKD) के महमूद हसन खान विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के अजहर हुसैन को हराकर यह चुनाव जीता था।
1974: भारतीय क्रांति दल ने दोहराई जीत, बर्क के दबदबे की शुरुआत
1974 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर भारतीय क्रांति दल (BKD) के शफीकुर रहमान बर्क विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के महमूद हसन खान को 1,005 वोटों के अंतर से हराया।
1962 के बाद राज्य में 1967 के विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनसंघ (BJS) के महेंद्र कुमार विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार महमूद हसन खान को 4,852 वोटों के अंतर से हराया।
1969: भारतीय क्रांति दल ने मारी बाजी
इसके बाद 1969 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट से भारतीय क्रांति दल (BKD) के महमूद हसन खान विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के अजहर हुसैन को हराकर यह चुनाव जीता था।
1974: भारतीय क्रांति दल ने दोहराई जीत, बर्क के दबदबे की शुरुआत
1974 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर भारतीय क्रांति दल (BKD) के शफीकुर रहमान बर्क विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के महमूद हसन खान को 1,005 वोटों के अंतर से हराया।
आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
1977: लगातार दूसरी बार जीते शफीकुर्रहमान बर्क
1977 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर जनता पार्टी के उम्मीदवार शफीकुर्रहमान बर्क विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के शरियतुल्लाह को 1,424 वोटों के अंतर से हराया।
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
1977: लगातार दूसरी बार जीते शफीकुर्रहमान बर्क
1977 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर जनता पार्टी के उम्मीदवार शफीकुर्रहमान बर्क विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के शरियतुल्लाह को 1,424 वोटों के अंतर से हराया।
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1980: संभल सीट पर कांग्रेस की हुई वापसी
1980 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर कांग्रेस (आई) के शरियतुल्लाह विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के विजय प्रकाश को 4,014 वोटों के अंतर से हराया।
1985: पांच साल बाद फिर जीते बर्क
1985 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट से लोकदल (LKD) के शफीकुर्रहमान बर्क विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार महमूद हसन खान को 4,175 वोटों से हराकर यह चुनाव जीता था। बर्क की संभल सीट पर ये तीसरी जीत थी।
1989: बर्क की जीत का चौका
1989 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर जनता दल के शफीकुर्रहमान बर्क विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के विजय प्रकाश को 4,079 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शफीकुर्रहमान बर्क को 36,352 वोट मिले, जबकि विजय प्रकाश को 32,273 वोट मिले।
1980 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर कांग्रेस (आई) के शरियतुल्लाह विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के विजय प्रकाश को 4,014 वोटों के अंतर से हराया।
1985: पांच साल बाद फिर जीते बर्क
1985 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट से लोकदल (LKD) के शफीकुर्रहमान बर्क विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार महमूद हसन खान को 4,175 वोटों से हराकर यह चुनाव जीता था। बर्क की संभल सीट पर ये तीसरी जीत थी।
1989: बर्क की जीत का चौका
1989 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर जनता दल के शफीकुर्रहमान बर्क विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के विजय प्रकाश को 4,079 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शफीकुर्रहमान बर्क को 36,352 वोट मिले, जबकि विजय प्रकाश को 32,273 वोट मिले।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में संभल विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
1991: जनता दल ने लगाई जीत की हैट्रिक
1991 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर जनता दल (JD) शफीकुर्रहमान काी जगह इकबाल महमूद को टिकट दिया। पार्टी उम्मीदवार महमूद विजयी हुए। इसके साथ ही जनता दल ने यहां जीत की हैट्रिक लगाई। इकबाल महमूद ने भाजपा के विजय प्रकाश को 3,281 वोटों के अंतर से हराया।
1993: संभल में पहली बार जीती भाजपा
1991 के बाद 1993 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में संभल से भाजपा के सत्य प्रकाश विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के शफीकुर्रहमान बर्क को 4,802 वोटों के अंतर से हराया।
1996: संभल सीट पर सपा की हुई एंट्री
1996 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर सपा के इकबाल महमूद विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के सत्य प्रकाश को 17,509 वोटों के अंतर से हराया।
1991: जनता दल ने लगाई जीत की हैट्रिक
1991 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर जनता दल (JD) शफीकुर्रहमान काी जगह इकबाल महमूद को टिकट दिया। पार्टी उम्मीदवार महमूद विजयी हुए। इसके साथ ही जनता दल ने यहां जीत की हैट्रिक लगाई। इकबाल महमूद ने भाजपा के विजय प्रकाश को 3,281 वोटों के अंतर से हराया।
1993: संभल में पहली बार जीती भाजपा
1991 के बाद 1993 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में संभल से भाजपा के सत्य प्रकाश विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के शफीकुर्रहमान बर्क को 4,802 वोटों के अंतर से हराया।
1996: संभल सीट पर सपा की हुई एंट्री
1996 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर सपा के इकबाल महमूद विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के सत्य प्रकाश को 17,509 वोटों के अंतर से हराया।
2002: संभल विधानसभा सीट पर सपा ने दोहराई जीत
1996 के बाद राज्य में 2002 में चुनाव हुए। 2002 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की संभल विधानसभा सीट पर सपा के इकबाल महमूद लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने राष्ट्रीय परिवर्तन दल के शफीकुर रहमान बर्क को 21,306 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इकबाल महमूद को 52,562 वोट मिले, जबकि शफीकुर रहमान को 31,256 वोट मिले।
2007: सपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
2007 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की संभल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (SP) के इकबाल महमूद लगातार तीसरी बार विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के राजेश सिंघल को 11,660 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इकबाल महमूद को 46,096 वोट मिले, जबकि राजेश सिंघल को 34,436 वोटों से संतोष करना पड़ा।
संभल सीट पर सपा की लगातार चौथी जीत
2012 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो संभल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के इकबाल महमूद लगातार चौथी बार विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के राजेश सिंघल को 30,047 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सपा के इकबाल महमूद को 79,820 वोट मिले, जबकि राजेश सिंघल को 49,773 वोट मिले।
1996 के बाद राज्य में 2002 में चुनाव हुए। 2002 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की संभल विधानसभा सीट पर सपा के इकबाल महमूद लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने राष्ट्रीय परिवर्तन दल के शफीकुर रहमान बर्क को 21,306 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इकबाल महमूद को 52,562 वोट मिले, जबकि शफीकुर रहमान को 31,256 वोट मिले।
2007: सपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
2007 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की संभल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (SP) के इकबाल महमूद लगातार तीसरी बार विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के राजेश सिंघल को 11,660 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इकबाल महमूद को 46,096 वोट मिले, जबकि राजेश सिंघल को 34,436 वोटों से संतोष करना पड़ा।
संभल सीट पर सपा की लगातार चौथी जीत
2012 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो संभल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के इकबाल महमूद लगातार चौथी बार विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के राजेश सिंघल को 30,047 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सपा के इकबाल महमूद को 79,820 वोट मिले, जबकि राजेश सिंघल को 49,773 वोट मिले।
संभल सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
संभल में सपा की लगातार पांचवी जीत
2012 के बाद राज्य में 2017 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के इकबाल महमूद लगातार पांचवी बार विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के डी.आर. अरविंद को 19,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सपा के महमूद को 79,248 वोट मिले, जबकि भाजपा के अरविंद को 59,976 वोट मिले।
2022: लगातार छठवी बार सपा ने मारी बाजी
2022 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के इकबाल महमूद विजयी हुए। यह लगातार छठवी बार था जब उन्होंने सपा के टिकट पर चुनाव में जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजेश सिंघल को 41,697 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इकबाल महमूद को 1,07,073 वोट मिले, जबकि राजेश सिंघल को 65,376 वोट मिले।
2012 के बाद राज्य में 2017 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के इकबाल महमूद लगातार पांचवी बार विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के डी.आर. अरविंद को 19,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सपा के महमूद को 79,248 वोट मिले, जबकि भाजपा के अरविंद को 59,976 वोट मिले।
2022: लगातार छठवी बार सपा ने मारी बाजी
2022 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के इकबाल महमूद विजयी हुए। यह लगातार छठवी बार था जब उन्होंने सपा के टिकट पर चुनाव में जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजेश सिंघल को 41,697 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इकबाल महमूद को 1,07,073 वोट मिले, जबकि राजेश सिंघल को 65,376 वोट मिले।