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मधुर भंडारकर: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर बनेगी फिल्म, कहानी को लेकर मेकर्स ने दी जानकारी; कब होगी शूटिंग?
Fri, 23 Oct 2026 03:28 PM IST
सिराजुद्दीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Fri, 23 Oct 2026 03:28 PM IST
सार
- मधुर भंडारकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन पर एक फिल्म बनाने वाले हैं।
- यह फिल्म ऐतिहासिक ड्रामा और पॉलिटिकल थ्रिलर होगी।
- बताया जाता है कि इस फिल्म पर साल 2027 से काम शुरू हो जाएगा।
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, मधुर भंडारकर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर अपने अगले प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा में हैं। वह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और उनकी विरासत को बड़े परदे पर लाने जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट का संभावित शीर्षक 'श्यामा- द मिसिंग चैप्टर' रखा गया है। इस फिल्म की शूटिंग अगले साल शुरू हो सकती है। प्रोजेक्ट से जुड़ी अन्य जानकारियां अभी गुप्त रखी गई हैं।
फिल्म पर कब शुरू होगा काम?
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फिल्म पर कब शुरू होगा काम?
- इस फिल्म को निर्माता आदित्य कुमार हलवासिया का समर्थन मिला है।
- इसे भंडारकर एंटरटेनमेंट और एकेएच वेंचर्स की तरफ से प्रोड्यूस किया जा रहा है।
- भंडारकर अपनी अपकमिंग फिल्म 'द वाइव्स ऑफ बॉलीवुड' का काम पूरा करने के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करेंगे।
- ऐतिहासिक ड्रामा और पॉलिटिकल थ्रिलर यह फिल्म, 'श्यामा- द मिसिंग चैप्टर', डॉ. मुखर्जी के जीवन पर आधारित होगी।
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या होगी फिल्म की कहानी?
डॉ. मुखर्जी एक विद्वान और राजनेता थे। इस फिल्म की कहानी में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति के रूप में उनके शुरुआती करियर, जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत के पहले मंत्रिमंडल में उनके कार्यकाल और उन वैचारिक मतभेदों को शामिल किया जाएगा, जिनके कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। यह फिल्म 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना, 1953 में जम्मू-कश्मीर में 'परमिट सिस्टम' के खिलाफ उनके अभियान और हिरासत के दौरान उनकी मौत से जुड़ी बातों को भी दिखाएगी।
डॉ. मुखर्जी एक विद्वान और राजनेता थे। इस फिल्म की कहानी में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति के रूप में उनके शुरुआती करियर, जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत के पहले मंत्रिमंडल में उनके कार्यकाल और उन वैचारिक मतभेदों को शामिल किया जाएगा, जिनके कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। यह फिल्म 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना, 1953 में जम्मू-कश्मीर में 'परमिट सिस्टम' के खिलाफ उनके अभियान और हिरासत के दौरान उनकी मौत से जुड़ी बातों को भी दिखाएगी।
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निर्माता का क्या मकसद?
फिल्म के बारे में बात करते हुए, निर्माता आदित्य कुमार हलवासिया ने कहा, 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि सच्चा नेतृत्व साहस, दृढ़ विश्वास और राष्ट्र सेवा में निहित है। 'श्यामा' के माध्यम से हमारा उद्देश्य उनके असाधारण सफर को पर्दे पर लाना, नई पीढ़ी को हमारे इतिहास को जानने, हमारी विरासत को अपनाने और उन मूल्यों को समझने के लिए प्रेरित करना है, जो हमारे देश के भविष्य को आकार देने में मदद करते हैं।'
फिल्म के बारे में बात करते हुए, निर्माता आदित्य कुमार हलवासिया ने कहा, 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि सच्चा नेतृत्व साहस, दृढ़ विश्वास और राष्ट्र सेवा में निहित है। 'श्यामा' के माध्यम से हमारा उद्देश्य उनके असाधारण सफर को पर्दे पर लाना, नई पीढ़ी को हमारे इतिहास को जानने, हमारी विरासत को अपनाने और उन मूल्यों को समझने के लिए प्रेरित करना है, जो हमारे देश के भविष्य को आकार देने में मदद करते हैं।'
मधुर भंडारकर
- फोटो : इंस्टाग्राम @imbhandarkar
मधुर भंडारकर ने साझा किए विचार
इस ऐतिहासिक विषय को चुनने के बारे में भंडारकर ने कहा, 'एक फिल्म निर्माता के रूप में पहली बार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन को पर्दे पर उतारना एक बड़ी चुनौती है। 'श्यामा' के जरिए, मैं भारत के इतिहास के एक अहम अध्याय को ईमानदारी, संवेदनशीलता और एक नए दृष्टिकोण के साथ दर्शकों के सामने लाना चाहता हूं।'
फिल्म की कास्ट और अन्य प्रोडक्शन संबंधी जानकारियों की घोषणा अभी नहीं की गई है।
इस ऐतिहासिक विषय को चुनने के बारे में भंडारकर ने कहा, 'एक फिल्म निर्माता के रूप में पहली बार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन को पर्दे पर उतारना एक बड़ी चुनौती है। 'श्यामा' के जरिए, मैं भारत के इतिहास के एक अहम अध्याय को ईमानदारी, संवेदनशीलता और एक नए दृष्टिकोण के साथ दर्शकों के सामने लाना चाहता हूं।'
फिल्म की कास्ट और अन्य प्रोडक्शन संबंधी जानकारियों की घोषणा अभी नहीं की गई है।