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Udta Teer Review: क्या जासूसी और कॉमेडी के खेल में निशाने पर लगेगा आयुष्मान का तीर? या रास्ते में भटक जाएगा

Fri, 23 Oct 2026 10:49 AM IST
Kiran Vinod Kumar Jain किरण जैन
Updated Fri, 23 Oct 2026 10:49 AM IST
सार

  • Udta Teer Movie Review: आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की अदाकारी वाली फिल्म 'उड़ता तीर' रिलीज हो चुकी है।
  • दर्शकों को फिल्म का काफी इंतजार था। आज उनका इंतजार पूरा हो चुका है।
  • यहां जानिए इस फिल्म की कहानी कैसी है?

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Udta Teer film review in hindi Ayushmann Khurrana and Sara Ali Khan starrer spy comedy is reverse dhurandhar
उड़ता तीर फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
उड़ता तीर
कलाकार
आयुष्मान खुराना , सारा अली खान , राहुल बोस , राम कपूर , मुकुल देव , गुलशन ग्रोवर , सुहैल नैयर , संदीप आनंद , सुप्रिया पिलगांवकर , बृजेंद्र काला और रघुबीर यादव
लेखक
आकाश कौशिक
निर्देशक
आकाश कौशिक
निर्माता
करण जौहर , अदार पूनावाला , अपूर्व मेहता , गुनीत मोंगा कपूर और अचिन जैन
रिलीज डेट
23 अक्तूबर 2026
रेटिंग
2/5

विस्तार

‘देशभक्ति तो याद है, पर देश नहीं।’ आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘उड़ता तीर’ की यह लाइन सुनकर हंसी भी आती है और सवाल भी उठता है। आखिर कोई पाकिस्तानी जासूस अपनी याददाश्त खोकर अचानक पक्का हिंदुस्तानी कैसे बन जाता है।
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डायरेक्टर आकाश कौशिक इसी दिलचस्प आइडिया के साथ जासूसी, कॉमेडी और देशभक्ति का तड़का लगाने की कोशिश करते हैं। आइए देखते हैं कि यह फिल्म पर्दे पर कितना असर छोड़ती है...
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कहानी
बिलाल अहमद (आयुष्मान खुराना) पाकिस्तान का एजेंट है जो भारत में कुछ गड़बड़ करने आता है। लेकिन एक एक्सीडेंट में उसकी याददाश्त चली जाती है और वह खुद को भारत का वफादार अफसर विक्रांत समझने लगता है। उसकी पत्नी यामिनी (सारा अली खान) उसे बताती है कि उसके मां-बाप को पाकिस्तानी आतंकियों ने मारा था। यह सुनते ही बिलाल के अंदर देशभक्ति जाग जाती है और वह अपने ही लोगों के खिलाफ हो जाता है।
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दूसरी तरफ, पाकिस्तान में बैठे उसके बॉस नियाजी (राम कपूर) और अजहर मकसूद (मुकुल देव) सिर पकड़कर बैठ जाते हैं कि उनका सबसे तेज आदमी अब उन्हीं पर भारी पड़ रहा है। तारीख (संदीप आनंद) और अशफाक (सुहैल नैय्यर) भी इस जासूसी खेल का हिस्सा हैं।

उधर, इंडियन ऑफिसर बुरमान (राहुल बोस) बिलाल के काम से बहुत खुश है, पर उसे यह नहीं पता कि बिलाल असल में कौन है। इसी कन्फ्यूजन और उठापटक के इर्द-गिर्द पूरी कहानी घूमती है।

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उड़ता तीर - फोटो : यूट्यूब
दिलचस्प आइडिया, कुछ मजेदार पल
‘उड़ता तीर’ का आइडिया दिलचस्प है। एक पाकिस्तानी जासूस का याददाश्त खोने के बाद खुद को हिंदुस्तानी समझना और अपने ही मिशन के खिलाफ खड़े हो जाना, कॉमेडी के लिए अच्छा आधार है। कुछ संवाद और मुकुल देव की कॉमिक टाइमिंग हंसाती है। फिल्म में व्यंग्य और मनोरंजन की गुंजाइश भी नजर आती है। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और बिखरे हुए ट्रीटमेंट के चलते यह आइडिया अपना पूरा असर नहीं छोड़ पाता।

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उड़ता तीर - फोटो : यूट्यूब
फिल्म कहां चूक गई?
जॉनर का कन्फ्यूजन और डायरेक्शन: न थ्रिलर बची, न सही कॉमेडी
फिल्म का असल जॉनर 'स्पाई-कॉमेडी' या व्यंग्य होना चाहिए था, लेकिन मेकर्स इसके साथ न्याय नहीं कर पाए। कहानी में 15 अगस्त, राम मंदिर, ऑपरेशन सिंदूर और क्रॉस-फायरिंग जैसे बड़े और संवेदनशील संदर्भों का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन इनका उपयोग नैरेटिव को मजबूत करने के बजाय केवल इमोशनल अपील या जबरन का तनाव पैदा करने के लिए किया गया प्रतीत होता है। 

जब फिल्म 'गंभीर थ्रिलर' और 'हल्की कॉमेडी' दोनों नावों में एक साथ पैर रखती है, तो उसका टोन बिगड़ जाता है। दर्शक थिएटर में यह तय ही नहीं कर पाता कि वह देश पर मंडरा रहे खतरे पर गंभीर हो या अजीबोगरीब हरकतों पर हंसे।

कभी फिल्म जासूसी की तरफ जाती है, कभी देशभक्ति का रंग चढ़ाती है और कभी राजनीतिक व्यंग्य करने लगती है। ये तीनों चीजें एक फिल्म में साथ चल सकती हैं, बशर्ते उनके बीच तालमेल हो। यहां वही तालमेल गायब है।

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उड़ता तीर - फोटो : यूट्यूब
स्क्रीनप्ले और लॉजिक: खुफिया एजेंसियों का मजाक और बेतुके मोड़
सीटीएस (CTS) और आईएसआई (ISI) जैसी गंभीर एजेंसियों की कार्यशैली को बेहद हलके और बचकाने ढंग से दिखाया गया है। हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में विलेन्स का आना-जाना, 30 साल से मौलवी बने एजेंट के लैपटॉप में सारे जासूसों की लिस्ट होना और पेन ड्राइव से इतनी आसानी से  डेटा चोरी होना लॉजिक से परे है।

लॉजिक की कमी पर अकेले फिल्म को खारिज नहीं किया जा सकता। कॉमेडी में कई बार असंभव बातें भी मजेदार लगती हैं। दिक्कत तब होती है जब वही बातें न हंसाएं, न कहानी में रोमांच पैदा करें। इस फिल्म में कई सीन्स इसी समस्या से जूझते हैं।

पाकिस्तान अपने जासूसों को भारत भेजने के लिए उन्हें बाकायदा हिंदू बनने, पूजा-पाठ करने और मूर्तियां रखने की ट्रेनिंग देता है,...यह एंगल बहुत ज्यादा फिल्मी और अविश्वसनीय लगता है। हीरो का अपनी पहचान भूल जाना और फिर किसी झटके से सब याद आ जाना...यह बॉलीवुड का बहुत पुराना और घिसा-पिटा फॉर्मूला बन चुका है।

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उड़ता तीर - फोटो : यूट्यूब
राइटिंग और डायलॉग्स: अति-नाटकीयता और नारों की ओवर-डोज
फिल्म की कहानी में कई ऐसे मोड़ हैं, जो कागज पर मजेदार लग सकते हैं, लेकिन पर्दे पर उनका असर नहीं बनता। जासूसी जैसी गंभीर दुनिया में एजेंटों की पहचान और खुफिया जानकारी इतनी आसानी से सामने आना कहानी को कमजोर करता है। वहीं, ‘मुल्क से बढ़कर कुछ नहीं’ जैसे नारों और पाकिस्तानी किरदारों के बनावटी संवादों से व्यंग्य की धार भी नहीं बन पाती। लेखक के पास कॉमेडी और सटायर का मौका था, लेकिन दोनों के बीच संतुलन बनाने में सफल नहीं हो पाते।

Udta Teer film review in hindi Ayushmann Khurrana and Sara Ali Khan starrer spy comedy is reverse dhurandhar
उड़ता तीर - फोटो : यूट्यूब
एक्टिंग
आयुष्मान खुराना से ऐसी भूमिका में ज्यादा उम्मीद रहती है। वह पहले भी अलग-अलग तरह के किरदार निभा चुके हैं, इसलिए यहां उनसे कुछ नया देखने की इच्छा होती है। मगर बिलाल और विक्रांत के बीच का फर्क उतना मजेदार नहीं बनता, जितना बन सकता था। कई जगह उनका अभिनय जाना-पहचाना लगता है। सारा अली खान के हिस्से भी ऐसा कुछ खास नहीं आता, जिससे उनका किरदार याद रह जाए। 

मुकुल देव अजहर मकसूद के किरदार में अपनी छाप छोड़ते हैं। उनके अभिनय में खतरनाक अंदाज और कॉमेडी का अच्छा मेल है। आयुष्मान के साथ उनके सीन मनोरंजक हैं और उनकी कॉमिक टाइमिंग कई जगह हंसाती है। वह अपने संवादों और अंदाज से ध्यान खींचते हैं। मुकुल देव अब हमारे बीच नहीं हैं, ऐसे में पर्दे पर उनका अभिनय देखना खास लगता है। 

राम कपूर और गुलशन ग्रोवर जैसे बड़े एक्टर्स को भी वही पुराने, लाउड पाकिस्तानी अफसरों वाले रोल दिए गए हैं। आपस में एक-दूसरे को फंसाने और बचकानी प्लानिंग करने के तरीके इस थ्रिलर को किसी पैरोडी जैसा बना देते हैं। कई जगह पाकिस्तानी खलनायकों की छवि पुराने ढर्रे पर चलती नजर आती है। सुप्रिया पिलगांवकर, बृजेंद्र काला और रघुबीर यादव भी फिल्म में ठीक लगते हैं। सुहैल नय्यर को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला है। संदीप आनंद और सुहैल अपने-अपने किरदारों में प्रभावित करते हैं। 

Udta Teer film review in hindi Ayushmann Khurrana and Sara Ali Khan starrer spy comedy is reverse dhurandhar
उड़ता तीर - फोटो : यूट्यूब
देखें या नहीं
'उड़ता तीर’ की सबसे बड़ी ताकत उसका आइडिया है और सबसे बड़ी कमजोरी उसे कहानी में बदलने का तरीका। पहले हिस्से में कुछ सीन्स हंसाते हैं, लेकिन आगे बढ़ते-बढ़ते फिल्म थकाने लगती है। जासूसी के नाम पर रोमांच कम है और कॉमेडी भी हर बार काम नहीं करती। हल्की-फुल्की फिल्म देखने के मूड में हैं, तो एक बार कोशिश कर सकते हैं। मगर दमदार स्पाई थ्रिलर और धारदार राजनीतिक व्यंग्य की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो हाथ निराशा ही लगेगी।
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