Maa Ka Sum Review: मोना सिंह के नए अंदाज ने चौंकाया, मां और बेटे के रिश्ते की अनोखी कहानी में कहां रह गई कमी?
Maa Ka Sum Series Hindi Review: मोना सिंह छोटे पर्दे से लेकर सिनेमा के स्क्रीन तक बड़े और छोटे किरदारों में नजर आ चुकी हैं। इस अदाकारा की एक सीरीज ‘मां का सम’ रिलीज हो गई है। इस सीरीज में वह अलग तरह की मां का रूप दर्शकों को दिखा रही हैं। जानिए, कैसी है सीरीज ‘मां का सम'।
विस्तार
मां को शब्दों में अभिव्यक्त करना मुमकिन नहीं है। फिर भी सिनेमा ने मां की छवि को बयां करने की हर कोशिश की है। लेकिन अब तक मां का त्याग ही बड़े और छोटे पर्दे पर दिखाया गया। मां के भी अपने सपने हो सकते हैं, अहसास हो सकते हैं, इस पहलू को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया।
इसी पहलू को सीरीज ‘मां का सम’ दिखाने की कोशिश करती है। इसमें जो मां है वह परफेक्ट नहीं है, लेकिन वह रियल लगती है। मां और बेटे के रिश्ते को भी सीरीज में अलग ढंग से दिखाया गया है।
अलग तरह के एंगल से इसी सीरीज की कहानी शुरू होती है लेकिन क्या अंत भी उतना बेहतर है। यह सीरीज प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है। पढ़िए, सीरीज ‘मां का सम’ का रिव्यू।
कहानी
सीरीज की कहानी अगस्त्य (मिहिर आहुजा) और उसकी मां विनीता (मोना सिंह) की है। अगस्त्य मैथ्स के जरिए हर दिक्कत को दूर करने की कोशिश करता है। वह एक स्मार्ट, इंटेलीजेंट काॅलेज स्टूडेंट है, जो आगे की पढ़ाई के लिए कुछ महीनों बाद घर से दूर चला जाएगा। इससे पहले वह अपनी सिंगल मदर विनीता की जिंदगी को सेटल करना चाहता है।
विनीता की जिंदगी मुश्किलों से भरी रही है, पति अचानक छोड़कर गायब हो गया, इसके बाद बेटे अगस्त्य की परवरिश अकेले ही उसने की थी। रियल एस्टेंट एजेंट के तौर पर अब वह काम करती है। बेटा अगस्त्य चाहता है कि वह अपनी मां के लिए एक परफेक्ट पार्टनर तलाशे, इसके लिए वह अपनी मैथ्स स्किल्स का सहारा लेता है।
डेटिंग एप में मैथ्स की इवेक्शन लगाकर मां के लिए सही डेट की तलाश अगस्त्य करता है। लेकिन हर बार मनमुताबिक रिजल्ट उसे नहीं मिलते हैं। इसी कहानी के साथ अगस्त्य की लव लाइफ भी दिखाई जाती है। पहले वह एनी (सेलेस्टी बैरागी) के साथ रिलेशन में होता है लेकिन आगे चलकर इनकी राहें एक-दूसरे से अलग हो जाती हैं, मगर यह अच्छे दोस्त बने रहते हैं। फिर सीरीज में एंट्री होती है, अंगिरा धर और रणवीर बरार के किरदारों की। इनके आने से विनीता और अगस्त्य की जिंदगी नए मोड़ पर आकर खड़ी हो जाती है। क्या अगस्त्य अपनी मां के लिए सच में परफेक्ट पार्टनर तलाश पाता है? क्या विनीता अपनी जिंदगी की एक नई शुरुआत कर पाती है। इसी स्टोरी लाइन पर पूरी सीरीज बनी है।
अभिनय
मोना सिंह ने विनीता के रूप में एक नए जमाने की मां का किरदार किया है। उसका पहनावा, सोच सबकुछ माॅर्डन है। अपने बेटे अगस्त्य के साथ उसका रिश्ता भी दोस्ती वाला है। वह बेटे के साथ अपनी जिंदगी की हर मुश्किल साझा करती है। साथ ही अगस्त्य की सोच को भी अहमियत देती है। इस किरदार के साथ मोना सिंह ने पूरा न्याय किया है।
अगस्त्य के रोल में मिहिर आहुजा ने भी अच्छा काम किया है। मां के लिए चिंता करने वाले बेटे के रोल में वह सहज अभिनय करते हैं। बचपन में पिता के अचानक छोड़कर चले जाने के कारण हुए ट्रॉमा को वह बखूबी अपनी एक्टिंग से दिखाते हैं। सीरीज में अंगीरा और रणवीर बरार अपने किरदारों में जंचते हैं। शेफ से एक्टर बने रणवीर बरार कुछ सीन में दिल जीत लेते हैं। बाकी कलाकार अपने किरदारों में रमे हुए नजर आए हैं।
निर्देशन
इस सीरीज को निकोलस खरकोंगोर ने निर्देशित किया है। वह 21वीं सदी की एक शहरी मां की छवि सामने लाने की भरपूर कोशिश करते हैं। एक मां जो संघर्ष करती है लेकिन फिर भी सपने देखती है, अपने लिए खुशी तलाशती है। 19 साल का बेटा होने के बावजूद वह अपनी लव लाइफ को दूसरा मौका देने से भी पीछे नहीं हटती है। कुछ दर्शकों को यह बात अजीब लग सकती है लेकिन यह किसी भी महिला की जिंदगी का एक स्वाभाविक पहलू हो सकता है। इन्हीं सब बातों को पूरी सीरीज में निकोलस ने समेटने का प्रयास किया है।
कहां चूक गई सीरीज?
मां का बदलता रूप, प्यार को लेकर नया नजरिया और मैथ्स की इक्वेशन जैसे कई मुद्दों को कहानी में समेटने के चक्कर में सीरीज एक वक्त के बाद बिखरी हुई लगती है। मोना सिंह और रणवीर बरार का लव एंगल अच्छा है लेकिन अगस्त्य और अंगीरा की लव स्टोरी दिखाने की शायद जरूरत नहीं थी। एक वक्त के बाद ऐसा लगता है कि निर्देशक की पकड़ कहानी पर ढीली पड़ने लगी है।
चार एपिसोड के बाद ‘मां का सम’ सीरीज जबरदस्ती खींची हुई लगती है। अंत भी ऐसा है, जिसका अंदाजा दर्शकों को पहले ही हो जाता है। यह किसी भी तरह से चौंकने का मौका नहीं देती है। कलाकारों का अच्छा अभिनय भी कमजोर होती सीरीज को संभाल नहीं पाता है। म्यूजिक की बात करें तो यह सीरीज में कोई एक्स फैक्टर नहीं जोड़ पाता है।
देखें या ना देखें
आपको अगर एक्शन, सस्पेंस थ्रिलर से हटकर एक सहज और सरल सी कहानी देखनी है। मोना सिंह को आप पसंद करते हैं, उनके अभिनय को सराहते हैं तो सीरीज ‘मां का सम’ को देख सकते हैं। लेकिन आपको एंटरटेनमेंट की फुल डोज चाहिए तो यह सीरीज आपके लिए नहीं बनी है।