Jazz City Review: म्यूजिक, हिस्ट्री और जासूसी का दिलचस्प मेल, बिखरी स्क्रिप्ट कमजोर कर देती है पूरी सीरीज
Web Series Jazz City Review: इतिहास और संगीत को साथ जोड़कर एक दिलचस्प कहानी ‘जैज सिटी’ सीरीज में कहने की कोशिश की गई। पढ़िए, इस सीरीज का रिव्यू
विस्तार
'जैज सिटी' एक पीरियड वेब सीरीज है, जिसका निर्देशन सौमिक सेन ने किया है। कहानी 1970 के दौर के कोलकाता और बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के समय पर आधारित है। सीरीज में अरिफिन शुभो, सौरसेनी मैत्रा, शताफ फिगार और संतनु घटक जैसे कलाकार नजर आते हैं।
सीरीज की शुरुआत मजबूत है और इसका सेटअप तुरंत ध्यान खींचता है। म्यूजिक, राजनीति और इतिहास को साथ लाने की कोशिश साफ दिखती है। लेकिन कुछ एपिसोड के बाद ही यह साफ हो जाता है कि सीरीज अपने ही बनाए दायरे को संभाल नहीं पाती। जो कहानी शुरू में असर छोड़ती है, वही आगे चलकर बिखरने लगती है।
कहानी
'जैज सिटी' की कहानी जिमी रॉय (अरिफिन शुभो) के आसपास घूमती है, जो एक रेफ्यूजी है और अपनी पहचान बदलकर नई जिंदगी शुरू करता है। वह एक जैज क्लब चलाता है और राजनीति से दूर रहना चाहता है। लेकिन हालात उसे इस दूरी में रहने नहीं देते। उसका अतीत सामने आता है और वह धीरे धीरे जासूसी, साजिश और बांग्लादेश के संघर्ष से जुड़ जाता है। उसका क्लब सिर्फ म्यूजिक की जगह नहीं रहता, बल्कि एक सीक्रेट ठिकाना बन जाता है जहां क्रांतिकारी, जासूस और भाग रहे लोग आते हैं।
यहां तक कहानी मजबूत लगती है। समस्या इसके बाद शुरू होती है। सीरीज एक साथ बहुत कुछ दिखाने की कोशिश करती है, राजनीति, जासूसी, प्यार, युद्ध और अलग अलग किरदार। नतीजा यह होता है कि कहानी का फोकस कमजोर पड़ जाता है। कई ट्रैक शुरू होते हैं, लेकिन सभी को बराबर समय नहीं मिलता। इससे मुख्य कहानी पीछे छूटती हुई लगती है और दर्शक यह तय नहीं कर पाता कि उसे किस पर ध्यान देना चाहिए।
अभिनय
अरिफिन शुभो ने जिमी रॉय के किरदार को कॉंफिडेंट के साथ निभाया है। उनके किरदार में एक साथ आकर्षण और अंदरूनी उलझन दोनों नजर आती हैं। सौरसेनी मैत्रा का काम संतुलित है और वह अपने किरदार में सहज लगती हैं। शताफ फिगार सख्त और प्रभावी दिखते हैं, जबकि संतनु घटक अपने सीमित स्क्रीन टाइम में ध्यान खींचते हैं।
लेकिन समस्या यहां भी वही है, कई किरदार अच्छे होते हुए भी अधूरे रह जाते हैं। उन्हें ठीक से समय और गहराई नहीं मिलती, जिससे उनका असर कम हो जाता है।
निर्देशन
सौमिक सेन ने माहौल बनाने में मेहनत की है और यह साफ दिखता है। जैज क्लब के सीन, म्यूजिक और सेट डिजाइन सीरीज को अलग पहचान देते हैं। उस समय का माहौल काफी हद तक सही तरीके से सामने आता है। लेकिन निर्देशन कहानी को कसकर नहीं रख पाता। जैसे जैसे सीरीज आगे बढ़ती है, सब प्लॉट बढ़ते जाते हैं और कहानी बिखरने लगती है।
कई सीन जरूरत से ज्यादा लंबे हैं और हर सीन जरूरी नहीं लगता। कुछ हल्के पल भी जोड़े गए हैं, लेकिन वे कहानी के साथ फिट नहीं बैठते। इससे सीरीज का टोन भी थोड़ा अस्थिर हो जाता है।
'जैज सिटी' एक अच्छी सोच के साथ बनाई गई सीरीज है। इसमें माहौल, म्यूजिक और एक्टिंग अच्छी है। लेकिन असली समस्या इसकी कहानी है। सीरीज शुरू तो साफ होती है, लेकिन आगे चलकर खुद ही भटकने लगती है। इतने सारे ट्रैक एक साथ चलाए गए हैं कि समझ नहीं आता कि असली कहानी कौन सी है। हर चीज थोड़ी थोड़ी दिखाई जाती है, लेकिन कोई भी चीज पूरी तरह असर नहीं छोड़ती। अगर आपको बस माहौल और अलग सेटिंग देखनी है, तो यह सीरीज ठीक लग सकती है। लेकिन अगर आप एक मजबूत और साफ कहानी चाहते हैं, तो यह आपको निराश करेगी।
कुल मिलाकर, सीरीज में दम है। लेकिन यह उस दम को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाती और आखिर में अधूरी सी लगती है।