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जेवर बना अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट: उत्तर प्रदेश की सोच, संकल्प और समृद्धि का नया अध्याय
ब्रजेश तिवारी
Published by: Rahul Kumar
Updated Tue, 31 Mar 2026 08:35 PM IST
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जेवर एयरपोर्ट।
- फोटो : पीटीआई
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जब कोई राज्य वैश्विक परिवहन नेटवर्क-विशेषकर आधुनिक हवाई अड्डों और कार्गो सुविधाओं-से जुड़ता है, तो उसकी अर्थव्यवस्था सीमाओं में बंधी नहीं रहती, बल्कि विस्तार की नई उड़ान भरती है। नोएडा एयरपोर्ट जैसे सपने तब हकीकत में साकार होते हैं जब राज्य का नेतृत्व पूरे संकल्प के साथ सभी बाधाओं को दूर करने में सक्षम होता है। इसे सिर्फ एयरपोर्ट के रूप में देखना उचित नहीं होगा। अब प्रश्न यह है कि फिर इसे किस रूप में देखा जाए। इसका उत्तर उस अवधारणा में है जिसे दुनिया 'एयरोट्रोपोलिस' कहती है। अर्थात वह आर्थिक महानगर जो किसी हवाई अड्डे के इर्द-गिर्द अपनी पूरी पारिस्थितिकी के साथ जन्म लेता है। होटल, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, कार्गो हब, औद्योगिक इकाइयां, रिटेल कॉम्प्लेक्स, मेडिकल सुविधाएं, डेटा सेंटर और आवासीय टाउनशिप, ये सब उसके अंग हैं।
जब किसी क्षेत्र में इस स्तर का इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित होता है, तो उसका प्रभाव केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहता। यह रोजगार, उद्यमिता और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक शक्तिशाली उत्प्रेरक बन जाता है। अनुमानित रूप से 1 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलना केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में स्थायित्व और सम्मान का प्रवेश है।
एयरोट्रोपोलिस की असली ताकत यही है कि वह केवल सुविधा के समय नहीं, संकट के समय भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना रहता है। जेवर का यही सबसे बड़ा रणनीतिक महत्व है। यह उत्तर प्रदेश को एक ऐसे आर्थिक चक्र में जोड़ेगा जो स्वयं को निरंतर गति देता रहता है। अधिक उड़ानें, अधिक व्यापार, अधिक निवेश, अधिक रोजगार, अधिक मांग और फिर और अधिक उड़ानें। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि यह रोजगार स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होगा। युवाओं के लिए अवसर बढ़ेंगे। शुरुआती पांच वर्षों में एयरपोर्ट ऑपरेशन, ग्राउंड हैंडलिंग, सुरक्षा, रिटेल और हॉस्पिटिलिटी जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होंगे। कृषि, परिवहन, सप्लाई चेन, एमएसएमई, होटल और पर्यटन जैसे क्षेत्र असीमित रोजगार लेकर आएंगे।
यह मल्टीप्लायर इफेक्ट ही जेवर की असली शक्ति है। अर्थशास्त्र में यह सिद्ध तथ्य है कि एक एयरपोर्ट के इर्द-गिर्द प्रत्यक्ष रोजगार का हर एक पद अप्रत्यक्ष रूप से तीन से पांच और रोजगार उत्पन्न करता है। जब पचास हजार लोग काम पर जाते हैं, तो उनके लिए चाय की दुकान चाहिए, किराने की दुकान चाहिए, बच्चों के लिए स्कूल चाहिए, बीमारी के लिए अस्पताल चाहिए। यही सूक्ष्म अर्थव्यवस्था का प्रवाह है जो किसी क्षेत्र को जीवंत शहर में बदलता है। इसका एक बड़ा प्रभाव राज्य के एमएसएमई सेक्टर पर पड़ेगा, जो उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की वास्तविक रीढ़ है। मेरठ का खेल का सामान, आगरा का चमड़ा उद्योग, मुरादाबाद का पीतल, वाराणसी की रेशम साड़ियां, अलीगढ़ के ताले, ये सब उत्पाद पहले वैश्विक बाजार तक पहुंचने के लिए लंबे और महंगे रास्तों पर निर्भर थे। जेवर का कार्गो हब, जिसकी प्रस्तावित क्षमता वार्षिक दस लाख टन से अधिक होगी, इन उद्यमियों को सीधी उड़ान देगा। जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पाद फल, सब्जियां, फूल जो पहले स्थानीय मंडियों में औने-पौने दाम पर बिकते थे, वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचेंगे।
जेवर की रणनीतिक स्थिति इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती है। दिल्ली-एनसीआर के साथ इसकी निकटता, एक्सप्रेसवे और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी इसे एक ऐसा केंद्र बनाती है, जहां से न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे उत्तर भारत की आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिल सकती है। यह एयरपोर्ट सीधे यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ा हुआ है, जबकि इसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जा रहा है। भविष्य में क्षेत्रीय रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम और रेलवे नेटवर्क के माध्यम से इसे दिल्ली तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से जोड़ने की योजना है। सड़क, रेल और हवाई मार्ग की यह त्रिस्तरीय कनेक्टिविटी इसे व्यावसायिक रूप से रणनीतिक एयरपोर्ट की श्रेणी में स्थापित करेगी।
(ये लेखक के निजी विचार हैं, प्रो. ब्रजेश तिवारी, जवाहर लाल यूनिवर्सिटी, दिल्ली में स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के प्रोफेसर हैं)
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जब किसी क्षेत्र में इस स्तर का इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित होता है, तो उसका प्रभाव केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहता। यह रोजगार, उद्यमिता और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक शक्तिशाली उत्प्रेरक बन जाता है। अनुमानित रूप से 1 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलना केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में स्थायित्व और सम्मान का प्रवेश है।
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एयरोट्रोपोलिस की असली ताकत यही है कि वह केवल सुविधा के समय नहीं, संकट के समय भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना रहता है। जेवर का यही सबसे बड़ा रणनीतिक महत्व है। यह उत्तर प्रदेश को एक ऐसे आर्थिक चक्र में जोड़ेगा जो स्वयं को निरंतर गति देता रहता है। अधिक उड़ानें, अधिक व्यापार, अधिक निवेश, अधिक रोजगार, अधिक मांग और फिर और अधिक उड़ानें। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि यह रोजगार स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होगा। युवाओं के लिए अवसर बढ़ेंगे। शुरुआती पांच वर्षों में एयरपोर्ट ऑपरेशन, ग्राउंड हैंडलिंग, सुरक्षा, रिटेल और हॉस्पिटिलिटी जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होंगे। कृषि, परिवहन, सप्लाई चेन, एमएसएमई, होटल और पर्यटन जैसे क्षेत्र असीमित रोजगार लेकर आएंगे।
यह मल्टीप्लायर इफेक्ट ही जेवर की असली शक्ति है। अर्थशास्त्र में यह सिद्ध तथ्य है कि एक एयरपोर्ट के इर्द-गिर्द प्रत्यक्ष रोजगार का हर एक पद अप्रत्यक्ष रूप से तीन से पांच और रोजगार उत्पन्न करता है। जब पचास हजार लोग काम पर जाते हैं, तो उनके लिए चाय की दुकान चाहिए, किराने की दुकान चाहिए, बच्चों के लिए स्कूल चाहिए, बीमारी के लिए अस्पताल चाहिए। यही सूक्ष्म अर्थव्यवस्था का प्रवाह है जो किसी क्षेत्र को जीवंत शहर में बदलता है। इसका एक बड़ा प्रभाव राज्य के एमएसएमई सेक्टर पर पड़ेगा, जो उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की वास्तविक रीढ़ है। मेरठ का खेल का सामान, आगरा का चमड़ा उद्योग, मुरादाबाद का पीतल, वाराणसी की रेशम साड़ियां, अलीगढ़ के ताले, ये सब उत्पाद पहले वैश्विक बाजार तक पहुंचने के लिए लंबे और महंगे रास्तों पर निर्भर थे। जेवर का कार्गो हब, जिसकी प्रस्तावित क्षमता वार्षिक दस लाख टन से अधिक होगी, इन उद्यमियों को सीधी उड़ान देगा। जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पाद फल, सब्जियां, फूल जो पहले स्थानीय मंडियों में औने-पौने दाम पर बिकते थे, वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचेंगे।
जेवर की रणनीतिक स्थिति इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती है। दिल्ली-एनसीआर के साथ इसकी निकटता, एक्सप्रेसवे और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी इसे एक ऐसा केंद्र बनाती है, जहां से न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे उत्तर भारत की आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिल सकती है। यह एयरपोर्ट सीधे यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ा हुआ है, जबकि इसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जा रहा है। भविष्य में क्षेत्रीय रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम और रेलवे नेटवर्क के माध्यम से इसे दिल्ली तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से जोड़ने की योजना है। सड़क, रेल और हवाई मार्ग की यह त्रिस्तरीय कनेक्टिविटी इसे व्यावसायिक रूप से रणनीतिक एयरपोर्ट की श्रेणी में स्थापित करेगी।
(ये लेखक के निजी विचार हैं, प्रो. ब्रजेश तिवारी, जवाहर लाल यूनिवर्सिटी, दिल्ली में स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के प्रोफेसर हैं)