विचार: पीएम मोदी का विजन-सीएम योगी का मिशन
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प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी 12 साल पूरे कर चुके हैं। उन्होंने चुने हुए प्रधानमंत्रियों में पं. जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल को भी पीछे छोड़ दिया है। इस अवसर पर उनकी दृष्टि को उत्तर प्रदेश के विकास के संदर्भ में देखना प्रासंगिक होगा। इसलिए कि यह प्रदेश नेहरू का भी रहा है और उनके बाद उनकी बेटी, प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी का भी। यही वह प्रदेश है जिसे भारत के पुनर्निमाण की सबसे बड़ी प्रयोगशाला के रूप में सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने देखा और इसीलिए यह राज्य हमेशा उनकी प्राथमिकता में रहा। आज यह प्रदेश देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
2014 में पीएम मोदी ने देश का नेतृत्व संभाला और तब से उत्तर प्रदेश में उनका विजन नीतियों, परियोजनाओं और प्राथमिकताओं में प्रतिबिंबित हो रहा है। 2017 में इस राज्य में योगी सरकार बनी और उसने पीएम मोदी की दृष्टि को विकासात्मक प्रतिबद्धता दी। 2017 में सत्ता में आने के बाद योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी के विजन को नीतिगत दस्तावेज में नहीं, बल्कि जन-जन के जीवन में उतारा। सीएम योगी ने उनके विजन को मिशन बनाया और अनवरत, अथक और अविचल रहे। केंद्र की योजना और राज्य का क्रियान्वयन, यह समन्वय सहजता और निष्ठा का है जिसके परिणाम अपेक्षित ही नहीं, असाधारण हैं। प्रधानमंत्री मोदी का विजन था कि उत्तर प्रदेश को इस स्थिति से उबारा जाए। मुख्यमंत्री योगी ने इसे मिशन बनाया। कानून का राज स्थापित हुआ, अपराधियों पर शिकंजा कसा और प्रदेश ने एक नई सांस ली। विकास के लिए सुरक्षा पहली शर्त है, यह सिद्धांत यहां व्यवहार में सिद्ध हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्षों में उत्तर प्रदेश की दर्जनों यात्राएं कीं और हर बार एक नई परियोजना, एक नई संभावना, एक नया संकल्प इस धरती को समर्पित किया। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का लोकार्पण उनमें एक बड़ा भावनात्मक क्षण था। दिसंबर 2021 में जब प्रधानमंत्री ने इस दिव्य परिसर को राष्ट्र को समर्पित किया, तो यह भारत की सनातन आत्मा की पुनः प्रतिष्ठा थी, सभ्यतागत पुनर्जागरण था। जनवरी 2024 में अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा, जिसकी प्रतीक्षा शताब्दियों ने की थी। अयोध्या आज एक आधुनिक तीर्थ नगरी के रूप में विकसित हो रही है। महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, चौड़ी सड़कें, नवनिर्मित घाट, आधुनिक होटल और पर्यटन अवसंरचना, यह सब उस समग्र दृष्टि का हिस्सा है जिसमें आस्था और अर्थव्यवस्था साथ-साथ चलते हैं। वृंदावन, मथुरा और विंध्यधाम को भी इसी श्रेणी में रखा जाएगा।
इन्फास्ट्रक्चर के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश में जो क्रांति आई है, यह अभूतपूर्व है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संकल्पना के बिना यह संभव नहीं था। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, इन राजमार्गों ने न केवल दूरियां घटाईं, बल्कि उपेक्षित अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने वायुसेना के विमान की लैंडिंग कराकर स्पष्ट संदेश दिया कि यह सड़क केवल यातायात के लिए नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी एक रणनीतिक संपत्ति है। लखनऊ मेट्रो का विस्तार, कानपुर मेट्रो और आगरा मेट्रो का शुभारंभ, इन परियोजनाओं ने प्रदेश में आधुनिक शहरी परिवहन की स्थापना की। गोरखपुर में एम्स और अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों की स्थापना ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उस रिक्तता को भरा जो वर्षों से बनी हुई थी।
पीएम मोदी की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश को कुशीनगर, अयोध्या व नोएडा (जेवर) के रूप में तीन नए अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट मिले। नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा तो एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनने की दिशा में अग्रसर है। यह अकेला प्रकल्प लाखों रोजगार सृजित करेगा और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के आर्थिक भूगोल को नए सिरे से परिभाषित करेगा। रक्षा उत्पादन क्षेत्र में बुंदेलखंड और आगरा-लखनऊ के बीच विकसित होता डिफेंस कॉरिडोर पीएम मोदी की 'आत्मनिर्भर भारत' संकल्पना को उत्तर प्रदेश की धरती पर साकार करता है। डेटा सेंटर, टेक्सटाइल पार्क, फार्मा क्लस्टर और फूड प्रोसेसिंग इकाइयां उत्तर प्रदेश की औद्योगिक रूपरेखा को तेज़ी से बदल रही हैं और इस परिवर्तन के केंद्र में है वह विश्वास जो मोदी-योगी की जोड़ी ने अर्जित किया है।
अंत्योदय को अर्थ देने वाली कई योजनाओं को इस अवसर पर विस्मृत नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वाधिक 65 लाख से अधिक लाभार्थी उत्तर प्रदेश में हैं। उज्ज्वला योजना ने करीब 2 करोड़ माताओं-बहनों को धुएं से मुक्ति दी। हर घर जल योजना ने गांव की देहरी तक नल का जल पहुंचाया। किसान सम्मान निधि अन्नदाता का संबल है। मुफ्त राशन योजना करीब 15 करोड़ परिवारों को खाद्य सुरक्षा देती है। यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि केंद्र की मंशा और राज्य का तंत्र एक ही दिशा में काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के बारह वर्षों की इस यात्रा एक गहरा सत्य प्रत्यक्ष है। उन्होंने वह नक्शा बनाया जिसमें उत्तर प्रदेश प्राथमिकता में था तो सीएम योगी ने उस नक्शे को ज़मीन पर उकेर दिया।
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक प्रो. संजय सिंह बघेल दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर और ICSSR फेलो हैं।)