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विचार: आपदा में पीड़ितों का संबल बनती उत्तर प्रदेश सरकार
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 08 Jun 2026 08:20 PM IST
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आपदा में अवसर नहीं, आपदा में सेवा, यूपी सरकार की भावना।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रकृति है तो प्राकृतिक आपदाएं भी आएंगी, लेकिन ऐसा ही समय शासन की परीक्षा का भी होता है। चाहे आंधी-तूफान हो या मूसलाधार बारिश या फिर आकाशीय बिजली, ये अपने साथ भारी तबाही लाते हैं। किसान के खेत में खड़ी फसल पल भर में तहस-नहस हो जाती है। घर की छत उड़ जाती है। बच्चों के सिर से आसरा छिन जाता है और कभी-कभी ऐसी मानवीय हानि भी होती है, जिसका दर्द वर्षों साल सालता है। उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली ने एक बार फिर यह दिखाया कि प्रकृति के समक्ष मनुष्य कितना असहाय है। ऐसे में लोगों के मन में सहज ही सवाल उठता है कि क्या कोई उनका दर्द सुन रहा है? कोई उनके दर्द को महसूस कर रहा है? इस सवाल का जवाब योगी सरकार ने एक बार फिर शब्दों से नहीं कर्म से दिया। 24 घंटे के भीतर राहत, जिलों में त्वरित सहायता और मंत्रियों का पीड़ितों के बीच पहुंचना, यह एक ऐसी व्यवस्था का चेहरा था जो संकट के समय अपनी जिम्मेदारियां समझती है।
‘आपदा में अवसर नहीं, आपदा में सेवा’ यही वह भावना है जो किसी शासन को जन-शासन बनाती है। उत्तर प्रदेश एक विशाल राज्य है। करोड़ों किसान, लाखों गांव, हजारों मजरे। इस विस्तार में प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय और संवेदनशील बनाए रखना कोई साधारण काम नहीं है। लेकिन जब राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, जब नेतृत्व का संकल्प स्पष्ट हो, तो तंत्र भी उसी दिशा में चल पड़ता है। यही कारण है कि राहत केवल घोषित नहीं, वितरित भी हुई। अधिकारी दफ्तरों में बैठे नहीं रहे, मैदान में उतरे। यह प्रशासनिक संस्कृति में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
जब आंधी किसान की खड़ी फसल को रौंद डालती है, जब आकाशीय बिजली किसी मेहनतकश के घर में अंधेरा कर देती है, तब उसे तत्काल सहायता चाहिए, महीनों बाद मिलने वाला सरकारी लाभ नहीं। योगी सरकार की इस पहल ने किसानों को यह संदेश दिया है कि उनकी पीड़ा सत्ता के गलियारों तक पहुंचती है और वहां उस पर संज्ञान भी लिया जाता है। यह छोटी बात नहीं है। वर्षों की उपेक्षा के बाद जब किसान यह महसूस करता है कि उसकी सुध ली जा रही है, तो उसके भीतर फिर से उठ खड़े होने की शक्ति जागती है। आपदा में राहत देना केवल करुणा का विषय नहीं है, यह शासन की संवैधानिक जिम्मेदारी भी है। राज्य का यह दायित्व है कि वह अपने नागरिकों को प्राकृतिक आपदाओं से यथासंभव सुरक्षित रखे और यदि क्षति हो जाए तो उसकी भरपाई में सहायक बने।
जब आंधी किसान की खड़ी फसल को रौंद डालती है, जब आकाशीय बिजली किसी मेहनतकश के घर में अंधेरा कर देती है, तब उसे तत्काल सहायता चाहिए, महीनों बाद मिलने वाला सरकारी लाभ नहीं। योगी सरकार की इस पहल ने किसानों को यह संदेश दिया है कि उनकी पीड़ा सत्ता के गलियारों तक पहुंचती है और वहां उस पर संज्ञान भी लिया जाता है। यह छोटी बात नहीं है। वर्षों की उपेक्षा के बाद जब किसान यह महसूस करता है कि उसकी सुध ली जा रही है, तो उसके भीतर फिर से उठ खड़े होने की शक्ति जागती है। आपदा में राहत देना केवल करुणा का विषय नहीं है, यह शासन की संवैधानिक जिम्मेदारी भी है। राज्य का यह दायित्व है कि वह अपने नागरिकों को प्राकृतिक आपदाओं से यथासंभव सुरक्षित रखे और यदि क्षति हो जाए तो उसकी भरपाई में सहायक बने।
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आज के आधुनिक दौर में तकनीक के जरिये प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के प्रयास जरूर किए गए हैं, लेकिन इन्हें पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। इतना अवश्य है कि लोगों को सचेत करने में बड़ी सफलता मिली है। मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी खराब मौसम की चेतावनी लोगों को समय से मिल रही है। उत्तर प्रदेश में सचेत पोर्टल के माध्यम से आम जनमानस को 34 करोड़ 64 लाख रेड एवं ऑरेंज चेतावनी संदेश भेजे गए हैं। 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति होने पर किसानों को मुआवजा भी दिया जा रहा है। अतिवृष्टि के कारण खेतों में जमा गाद और मलबा हटाने के लिए भी 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता देने का प्रावधान है। इससे प्रभावित किसानों को दोबारा खेती शुरू करने में मदद मिलेगी। दुधारू पशुओं जैसे गाय-भैंस की मृत्यु पर 37,500 रुपये तक सहायता की व्यवस्था है। यह सब फैसले लोगों के दुख-दर्द को कम करके उन्हें नए सिरे से जिंदगी शुरू करने में मददगार साबित होते हैं।
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक दिग्विजय सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर तथा ‘हाउस ऑफ पॉलीटिकल एंपावरमेंट रिसर्च एंड इनोवेशन फाउंडेशन’ के संस्थापक/निर्देशक हैं।)
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक दिग्विजय सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर तथा ‘हाउस ऑफ पॉलीटिकल एंपावरमेंट रिसर्च एंड इनोवेशन फाउंडेशन’ के संस्थापक/निर्देशक हैं।)