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विचार: सुनियोजित साजिश थी 24 नवंबर 2024 को हुई संभल हिंसा
Sat, 08 Aug 2026 07:51 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
बृज लाल
बृज लाल
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 08 Aug 2026 07:51 PM IST
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संभल में हिंसा।
- फोटो : संवाद
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संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा को लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट और उच्चस्तरीय जांच आयोग के निष्कर्ष सामने आ चुके हैं। एक पूर्व पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि के रूप में मेरा यह स्पष्ट मानना है कि 24 नवंबर को संभल में जो कुछ भी हुआ, वह कोई अचानक भड़का आक्रोश नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित तरीके से दंगा कराने की गहरी साजिश थी।
संभल का प्राचीन इतिहास और हरिहर नाथ मंदिर
संभल का इतिहास केवल विवादों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र स्थान रहा है। प्राचीन काल से ही संभल हिंदुओं का एक प्रसिद्ध और आस्था का केंद्र रहा है। संभल का प्रसिद्ध मंदिर भगवान हरिहर नाथ (भगवान विष्णु) को समर्पित रहा है। शास्त्रों व लोक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु यहां अपने दसवें "कल्कि" अवतार के रूप में अवतरित होंगे। वर्ष 1526 में मुगल आक्रांता बाबर ने इस प्राचीन मंदिर को तुड़वा दिया था। मंदिर के अवशेषों व मलबे का इस्तेमाल करके वहां एक ढांचे का निर्माण कराया गया, जिसे आज संभल की जामा मस्जिद कहा जाता है। न्यायालय के आदेश के तहत जब इस ऐतिहासिक स्थल का वैज्ञानिक सर्वे कराने के लिए टीम पहुंची, तो एक सोची-समझी साजिश के तहत विरोध व उपद्रव का माहौल तैयार किया गया।
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संभल का प्राचीन इतिहास और हरिहर नाथ मंदिर
संभल का इतिहास केवल विवादों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र स्थान रहा है। प्राचीन काल से ही संभल हिंदुओं का एक प्रसिद्ध और आस्था का केंद्र रहा है। संभल का प्रसिद्ध मंदिर भगवान हरिहर नाथ (भगवान विष्णु) को समर्पित रहा है। शास्त्रों व लोक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु यहां अपने दसवें "कल्कि" अवतार के रूप में अवतरित होंगे। वर्ष 1526 में मुगल आक्रांता बाबर ने इस प्राचीन मंदिर को तुड़वा दिया था। मंदिर के अवशेषों व मलबे का इस्तेमाल करके वहां एक ढांचे का निर्माण कराया गया, जिसे आज संभल की जामा मस्जिद कहा जाता है। न्यायालय के आदेश के तहत जब इस ऐतिहासिक स्थल का वैज्ञानिक सर्वे कराने के लिए टीम पहुंची, तो एक सोची-समझी साजिश के तहत विरोध व उपद्रव का माहौल तैयार किया गया।
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24 नवंबर 2024 की हिंसा और पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी
सर्वे के दौरान भीड़ को उकसाकर पुलिस और सर्वे टीम पर प्राणघातक हमले किए गए। उपद्रवियों ने पथराव और गोलीबारी की, जिसमें कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए। दंगाइयों का मुख्य मकसद संभल को हिंदू-मुस्लिम दंगे की आग में झोंकना था, लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस और स्थानीय प्रशासन की तत्परता, कठोरता और चुस्त-दुरुस्त रणनीति के कारण स्थिति पर तुरंत नियंत्रण पाया गया और दंगा फैलने से रोक दिया गया। संभल का दंगों का एक लंबा और दर्दनाक इतिहास रहा है, लेकिन यह इतिहास में पहली बार हुआ है कि घटना के तुरंत बाद 123 दंगाइयों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया। पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट पर न्यायालय में ट्रायल शुरू हो चुका है और दोषियों को सख्त सजा होना तय है।
दंगे के मुख्य किरदार
एसआईटी की जांच और साक्ष्यों ने इस पूरी साजिश के चेहरों को बेनकाब कर दिया है। सर्वे के विरोध और दंगे की साजिश रचने में मुख्य भूमिका संभल के समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने निभाई। एक सांसद होकर कानून से खिलवाड़ करना और सांप्रदायिक तनाव भड़काना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। बर्क के खिलाफ हो रही सख्त कार्रवाई से पूरे देश में संदेश जाएगा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
सर्वे के दौरान भीड़ को उकसाकर पुलिस और सर्वे टीम पर प्राणघातक हमले किए गए। उपद्रवियों ने पथराव और गोलीबारी की, जिसमें कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए। दंगाइयों का मुख्य मकसद संभल को हिंदू-मुस्लिम दंगे की आग में झोंकना था, लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस और स्थानीय प्रशासन की तत्परता, कठोरता और चुस्त-दुरुस्त रणनीति के कारण स्थिति पर तुरंत नियंत्रण पाया गया और दंगा फैलने से रोक दिया गया। संभल का दंगों का एक लंबा और दर्दनाक इतिहास रहा है, लेकिन यह इतिहास में पहली बार हुआ है कि घटना के तुरंत बाद 123 दंगाइयों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया। पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट पर न्यायालय में ट्रायल शुरू हो चुका है और दोषियों को सख्त सजा होना तय है।
दंगे के मुख्य किरदार
एसआईटी की जांच और साक्ष्यों ने इस पूरी साजिश के चेहरों को बेनकाब कर दिया है। सर्वे के विरोध और दंगे की साजिश रचने में मुख्य भूमिका संभल के समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने निभाई। एक सांसद होकर कानून से खिलवाड़ करना और सांप्रदायिक तनाव भड़काना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। बर्क के खिलाफ हो रही सख्त कार्रवाई से पूरे देश में संदेश जाएगा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
सपा विधायक इकबाल महमूद का बेटा सुहैल इकबाल, जामा मस्जिद इंतज़ामिया कमेटी का सदर ज़फ़र अली, सचिव व वकील महसूद अली फ़ारूक़ी, एडवोकेट क़ासिम ज़माल और नततन (लड्ढन) ख़ान भी इस साजिश में प्रमुखता से शामिल रहे। इस हिंसा के तार अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट से भी जुड़े हैं। फरार अपराधी तारिक साटा दुबई में बैठकर इस गिरोह का संचालन कर रहा था। तारिक दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र से हर साल 300 से 350 लग्जरी गाड़ियों की चोरी करवाता था। इन गाड़ियों को नेपाल और उत्तर-पूर्व के रास्तों से विदेशों में बेचा जाता था। इस अवैध कमाई (फंडिंग) का इस्तेमाल विदेशी हथियारों की तस्करी और संभल जैसे स्थानों पर दंगाइयों को हथियार उपलब्ध कराने में किया जाता था।
निष्पक्ष जांच आयोग
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 नवंबर 2024 को एक उच्चस्तरीय जांच आयोग का गठन किया। इस समिति में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी ए.के. जैन शामिल थे। आयोग की गहन जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक के बेटे सुहैल इकबाल की मुख्य भूमिका उजागर हुई है।
निष्पक्ष जांच आयोग
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 नवंबर 2024 को एक उच्चस्तरीय जांच आयोग का गठन किया। इस समिति में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी ए.के. जैन शामिल थे। आयोग की गहन जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक के बेटे सुहैल इकबाल की मुख्य भूमिका उजागर हुई है।
संभल में जनसांख्यिकी परिवर्तन
संभल में 1920 के दशक से लेकर अब तक 16 बड़े दंगे हो चुके हैं। पिछली सरकारों की तुष्टिकरण नीतियों के कारण दंगाइयों पर कभी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसका परिणाम यहां जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) परिवर्तन के रूप में सामने आया। आजादी के समय संभल कस्बे में 45% हिंदू और 55% मुस्लिम आबादी थी। लगातार होने वाले दंगों, प्रताड़ना और असुरक्षा के कारण हिंदुओं को यहां से पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। आज संभल कस्बे में हिंदुओं की आबादी घटकर मात्र 15-20 प्रतिशत रह गई है।
बदलता उत्तर प्रदेश और कानून का राज
संभल में अपराधियों और दंगाइयों को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा। है, लेकिन आज उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित है। 24 नवंबर 2024 की घटना में सरकार ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि चाहे कोई कितना भी बड़ा नेता या सांसद क्यों न हो, यदि वह राज्य की शांति और सुरक्षा से खिलवाड़ करेगा, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। पहली बार दंगाई जेल की सलाखों के पीछे हैं और उन्हें अदालत से सख्त से सख्त सजा मिलना तय है। कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले हर तत्व के खिलाफ यह कठोर कानूनी लड़ाई बिना किसी समझौते के जारी रहेगी।
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक बृज लाल उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और राज्यसभा सांसद हैं।)
संभल में 1920 के दशक से लेकर अब तक 16 बड़े दंगे हो चुके हैं। पिछली सरकारों की तुष्टिकरण नीतियों के कारण दंगाइयों पर कभी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसका परिणाम यहां जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) परिवर्तन के रूप में सामने आया। आजादी के समय संभल कस्बे में 45% हिंदू और 55% मुस्लिम आबादी थी। लगातार होने वाले दंगों, प्रताड़ना और असुरक्षा के कारण हिंदुओं को यहां से पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। आज संभल कस्बे में हिंदुओं की आबादी घटकर मात्र 15-20 प्रतिशत रह गई है।
बदलता उत्तर प्रदेश और कानून का राज
संभल में अपराधियों और दंगाइयों को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा। है, लेकिन आज उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित है। 24 नवंबर 2024 की घटना में सरकार ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि चाहे कोई कितना भी बड़ा नेता या सांसद क्यों न हो, यदि वह राज्य की शांति और सुरक्षा से खिलवाड़ करेगा, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। पहली बार दंगाई जेल की सलाखों के पीछे हैं और उन्हें अदालत से सख्त से सख्त सजा मिलना तय है। कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले हर तत्व के खिलाफ यह कठोर कानूनी लड़ाई बिना किसी समझौते के जारी रहेगी।
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक बृज लाल उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और राज्यसभा सांसद हैं।)