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विचार: शून्य जनहानि, बाढ़ में भरोसा बनी सरकार
Tue, 08 Sep 2026 02:57 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
हरि मंगल
हरि मंगल
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 08 Sep 2026 02:57 PM IST
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बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री देते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। संवाद
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बाढ़ की तबाही लोगों के भीतर का भरोसा हिला देती है। बाढ़ का पानी जब खेतों की मेढ़ों को तोड़ता हुआ गांव की गलियों और घरों में प्रवेश करता है तो उसके साथ भय भी प्रवेश करता है। आंखों के सामने जीवन भर की कमाई डूबती दिखाई देती है। पशुधन बह जाने का डर, बच्चों-बुजुर्गों की चिंता और अगले दिन की अनिश्चितता। पिछले कुछ दिनों से ऐसे ही संकट से जूझ रहे उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह का राजधर्म निभाया है, वह लोगों के लिए बड़ा संबल है। उन्होंने लखनऊ में बैठकर अधिकारियों से रिपोर्ट लेने के बजाय स्वयं मोर्चे पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों की निगरानी की। लोगों ने अहसास किया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार उनके साथ है।
एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमों के साथ-साथ जिला प्रशासन के वरिष्ठ अफसर खुद लाइफ-जैकेट पहनकर पानी में उतरे और बचाव अभियानों का नेतृत्व किया। उत्तर प्रदेश में बाढ़ की विभीषिका के बावजूद संतोषजनक तथ्य यह है कि अब तक एक भी जन या पशुहानि नहीं हुई। यह बाढ़ से निपटने व राहत कार्यों की सुनियोजित तैयारी का नतीजा है। राहत आयुक्त कार्यालय की ओर से जुलाई-अगस्त के दौरान 591 करोड़ से अधिक अलर्ट मैसेज भेजे गए, जिन्होंने लाखों लोगों को समय रहते मौसम और बाढ़ के संभावित खतरे से सचेत किया।
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एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमों के साथ-साथ जिला प्रशासन के वरिष्ठ अफसर खुद लाइफ-जैकेट पहनकर पानी में उतरे और बचाव अभियानों का नेतृत्व किया। उत्तर प्रदेश में बाढ़ की विभीषिका के बावजूद संतोषजनक तथ्य यह है कि अब तक एक भी जन या पशुहानि नहीं हुई। यह बाढ़ से निपटने व राहत कार्यों की सुनियोजित तैयारी का नतीजा है। राहत आयुक्त कार्यालय की ओर से जुलाई-अगस्त के दौरान 591 करोड़ से अधिक अलर्ट मैसेज भेजे गए, जिन्होंने लाखों लोगों को समय रहते मौसम और बाढ़ के संभावित खतरे से सचेत किया।
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यह अलर्ट सिस्टम सचमुच जीवनरक्षक साबित हुआ। लोगों को नदियों के जलस्तर और मौसम की चेतावनी समय पर मिलने से वे स्वयं भी सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़ सके। यही वह दूरदर्शिता है, जो किसी भी आपदा प्रबंधन को सफल बनाती है। इसी कड़ी में 1070 हेल्पलाइन भी बड़ा सहारा बनकर उभरी। फंसे हुए लोगों की कॉल आते ही उनकी सटीक लोकेशन प्राप्त कर जिला प्रशासन और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमों को तत्काल मौके पर भेजा गया। मौसम की हर चेतावनी पर सरकार की नजर बनी रही, जिससे प्रतिक्रिया का समय न्यूनतम रहा। इसी सतर्कता ने उत्तर प्रदेश को बाढ़ प्रबंधन के मामले में देश के लिए उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है।
राहत अभियान के तहत सरकार ने अब तक करीब 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। यह आंकड़ा बताता है कि रेस्क्यू अभियान औपचारिकता भर नहीं रहा। इसे युद्धस्तर पर चलाया गया। प्रभावित परिवारों के भोजन की चिंता करते हुए सरकार ने अब तक छह लाख से अधिक लंच पैकेट और एक लाख से अधिक बाढ़ राहत किट वितरित की हैं। किसी बाढ़ग्रस्त परिवार के लिए भोजन और जरूरी सामग्री मिलना कितना बड़ा संबल होता है, यह वही समझ सकता है जो उस स्थिति से गुजरा हो। राहत केवल भोजन और आश्रय तक सीमित नहीं रही। बाढ़ के बाद सबसे बड़ा खतरा जलजनित बीमारियों का होता है, और सरकार ने इस पहलू पर भी गंभीरता दिखाई। लाखों क्लोरीन टैबलेट और ओआरएस पैकेट वितरित किए गए, ताकि दूषित पानी और डायरिया जैसी बीमारियों से लोगों को बचाया जा सके। प्रभावित जिलों में प्रभारी मंत्रियों की तैनाती कर उन्हें राहत सामग्री वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे मंत्री स्तर पर भी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित हुई।
राहत अभियान के तहत सरकार ने अब तक करीब 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। यह आंकड़ा बताता है कि रेस्क्यू अभियान औपचारिकता भर नहीं रहा। इसे युद्धस्तर पर चलाया गया। प्रभावित परिवारों के भोजन की चिंता करते हुए सरकार ने अब तक छह लाख से अधिक लंच पैकेट और एक लाख से अधिक बाढ़ राहत किट वितरित की हैं। किसी बाढ़ग्रस्त परिवार के लिए भोजन और जरूरी सामग्री मिलना कितना बड़ा संबल होता है, यह वही समझ सकता है जो उस स्थिति से गुजरा हो। राहत केवल भोजन और आश्रय तक सीमित नहीं रही। बाढ़ के बाद सबसे बड़ा खतरा जलजनित बीमारियों का होता है, और सरकार ने इस पहलू पर भी गंभीरता दिखाई। लाखों क्लोरीन टैबलेट और ओआरएस पैकेट वितरित किए गए, ताकि दूषित पानी और डायरिया जैसी बीमारियों से लोगों को बचाया जा सके। प्रभावित जिलों में प्रभारी मंत्रियों की तैनाती कर उन्हें राहत सामग्री वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे मंत्री स्तर पर भी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित हुई।
लोकतंत्र में हर संकट की घड़ी में जवाबदेही का पुनर्परीक्षण होता है। उत्तर प्रदेश की इस बाढ़ में सरकार ने जिस तरह अलर्ट सिस्टम, हेल्पलाइन, रेस्क्यू अभियान और राहत वितरण को एक साथ जोड़कर काम किया, वह प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशील कार्य संस्कृति पनपने की भी प्रमाण है। इस बार की बाढ़ ने यह संदेश दिया है कि सरकार, प्रशासन और तकनीक मिलकर काम करें, तो सबसे विकट प्राकृतिक आपदा में भी जनहानि को शून्य तक ले जाया जा सकता है।
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेख में दी गई जानकारी और तथ्यों के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। लेखक हरि मंगल, वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेख में दी गई जानकारी और तथ्यों के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। लेखक हरि मंगल, वरिष्ठ पत्रकार हैं।)