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विचार: यूपी का गौरव है जेवर एयरपोर्ट
Thu, 13 Aug 2026 04:58 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
डॉ. सुनील दत्त त्यागी
डॉ. सुनील दत्त त्यागी
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 13 Aug 2026 04:58 PM IST
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नोएडा एयरपोर्ट
- फोटो : X/@myogiadityanath
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बहुत पहले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर लिखित एक निबंध पढ़ा था- ‘ईर्ष्या तू न गई मेरे मन से’ जिसका भावपक्ष यह था कि यदि आपमें ईर्ष्या का भाव है तो आपकी दृष्टि भी नकारात्मक ही रहेगी और आप सकारात्मक पक्षों को देख ही नहीं सकेंगे। वर्तमान में कुछ राजनीतिक दलों में ऐसा ही भाव है और वे प्रमाणित विकास कार्यों को लेकर भी टिप्पणियां करने लगे हैं। ताजा उदाहरण जेवर एयरपोर्ट की पार्किंग में कुछ देर के लिए पानी भर जाने से जुड़ा है। जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बड़ी उपलब्धि के रूप में राज्य के हर नागरिक को हासिल हुई है।
वस्तुतः विकास एक दृष्टि है, एक सोच है, एक ऐसा विजन है जो वर्तमान की सीमाओं से आगे देखकर भविष्य की नींव रखता है। जो लोग खुद कभी इस दृष्टि से परिचित नहीं हुए, जिन्होंने सत्ता में रहते हुए भी प्रदेश के लिए कोई दूरदर्शी परियोजना नहीं गढ़ी, उनके लिए योगी सरकार के ऐतिहासिक कार्यों को देखकर बेचैनी होना स्वाभाविक ही है। यह बेचैनी कभी आलोचना का रूप लेती है, कभी राजनीतिक बयानबाजी का, लेकिन इसके मूल में एक ही भाव छिपा होता है- ईर्ष्या।
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वस्तुतः विकास एक दृष्टि है, एक सोच है, एक ऐसा विजन है जो वर्तमान की सीमाओं से आगे देखकर भविष्य की नींव रखता है। जो लोग खुद कभी इस दृष्टि से परिचित नहीं हुए, जिन्होंने सत्ता में रहते हुए भी प्रदेश के लिए कोई दूरदर्शी परियोजना नहीं गढ़ी, उनके लिए योगी सरकार के ऐतिहासिक कार्यों को देखकर बेचैनी होना स्वाभाविक ही है। यह बेचैनी कभी आलोचना का रूप लेती है, कभी राजनीतिक बयानबाजी का, लेकिन इसके मूल में एक ही भाव छिपा होता है- ईर्ष्या।
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जेवर अंतरराष्ट्रीय परियोजना कोई साधारण निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक भविष्य की आधारशिला है। यह हवाई अड्डा आगे चलकर हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का स्रोत बनेगा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश को वैश्विक व्यापार मानचित्र पर स्थापित करेगा, और आने वाले दशकों में करोड़ों यात्रियों तथा लाखों टन कार्गो को संभालने की क्षमता रखेगा। यह प्रदेश के उन लाखों युवाओं के लिए अवसर की खिड़की है जो अब तक बड़े महानगरों की ओर पलायन करने को मजबूर थे। यह किसानों, छोटे व्यापारियों, लॉजिस्टिक्स क्षेत्र और पर्यटन उद्योग के लिए नए द्वार खोलने वाला प्रोजेक्ट है। इतने बड़े और दूरगामी लाभ वाली परियोजना का मूल्यांकन उसकी दीर्घकालिक क्षमता से होना चाहिए, न कि किसी एक दिन की प्रकृतिजन्य घटना से।
कम समय में भारी बारिश के कारण कुछ मिनटों के लिए हुए जल-जमाव को लेकर जिस तरह की राजनीति की गई, वह संकीर्ण सोच का उदाहरण है। यह भूलना नहीं चाहिए कि प्रशासन ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए मात्र 30 मिनट में स्थिति को सामान्य किया, जल निकासी सुनिश्चित की, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि एक भी उड़ान इससे प्रभावित नहीं हुई। यात्री सुरक्षित रहे, संचालन सुचारू रहा, और हवाई अड्डे की कार्यक्षमता पर कोई आंच नहीं आई।
कम समय में भारी बारिश के कारण कुछ मिनटों के लिए हुए जल-जमाव को लेकर जिस तरह की राजनीति की गई, वह संकीर्ण सोच का उदाहरण है। यह भूलना नहीं चाहिए कि प्रशासन ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए मात्र 30 मिनट में स्थिति को सामान्य किया, जल निकासी सुनिश्चित की, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि एक भी उड़ान इससे प्रभावित नहीं हुई। यात्री सुरक्षित रहे, संचालन सुचारू रहा, और हवाई अड्डे की कार्यक्षमता पर कोई आंच नहीं आई।
यह हवाई अड्डा आने वाले वर्षों में एशिया के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण विमानन केंद्रों में गिना जाएगा, और इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस दृढ़ इच्छाशक्ति को जाता है जिन्होंने इसे सपने को हकीकत में बदल कर दिखा दिया। बड़ी परियोजनाओं के निर्माण के दौरान छोटी-मोटी तकनीकी या प्रशासनिक चुनौतियां स्वाभाविक होती हैं। असली परीक्षा इस बात की होती है कि प्रशासन इन चुनौतियों से कितनी तेजी और दक्षता से निपटता है। जेवर एयरपोर्ट के मामले में प्रशासन ने तत्परता दिखाई, समस्या का समाधान किया, और यात्री सेवाओं में किसी भी तरह का व्यवधान नहीं आने दिया। यह प्रशासनिक क्षमता की मिसाल है।
स्वस्थ लोकतंत्र में जवाबदेही जरूरी है लेकिन आलोचना और ईर्ष्या में फर्क होना चाहिए। रचनात्मक आलोचना प्रदेश को आगे बढ़ाती है, जबकि द्वेषपूर्ण राजनीति गतिरोध पैदा करती है। जेवर एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं को राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और दीर्घकालिक लाभ की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। जो लोग इस बड़ी तस्वीर को नहीं देख पाते, वे केवल अपनी सीमित सोच का परिचय देते हैं। उत्तर प्रदेश का स्वरूप उभर रहा है, निखर रहा है, तो इसे ईमानदारी से स्वीकार करना होगा। विकास कोई एक दिन का चमत्कार नहीं होता, यह निरंतर प्रयास, दूरदर्शिता और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम होता है। जेवर एयरपोर्ट इसी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक डॉ. सुनील दत्त त्यागी किसान पीजी कॉलेज, सिंभावली के पूर्व प्रोफेसर हैं।)
स्वस्थ लोकतंत्र में जवाबदेही जरूरी है लेकिन आलोचना और ईर्ष्या में फर्क होना चाहिए। रचनात्मक आलोचना प्रदेश को आगे बढ़ाती है, जबकि द्वेषपूर्ण राजनीति गतिरोध पैदा करती है। जेवर एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं को राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और दीर्घकालिक लाभ की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। जो लोग इस बड़ी तस्वीर को नहीं देख पाते, वे केवल अपनी सीमित सोच का परिचय देते हैं। उत्तर प्रदेश का स्वरूप उभर रहा है, निखर रहा है, तो इसे ईमानदारी से स्वीकार करना होगा। विकास कोई एक दिन का चमत्कार नहीं होता, यह निरंतर प्रयास, दूरदर्शिता और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम होता है। जेवर एयरपोर्ट इसी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक डॉ. सुनील दत्त त्यागी किसान पीजी कॉलेज, सिंभावली के पूर्व प्रोफेसर हैं।)