Style Check: त्योहार वही पर Gen Z का Festival Vibe नया! परंपरा के साथ अब स्टाइल और पसंद भी जरूरी
Gen Z और Gen Alpha के लिए त्योहार अब सिर्फ परंपरा निभाने का मौका नहीं, बल्कि अपनी पसंद, स्टाइल और पहचान को दिखाने का भी जरिया बन रहे हैं। खरीदारी अब त्योहारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ट्रेंड, जरूरत और बजट के हिसाब से पूरे साल जारी रहती है।
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पहले त्योहार आते ही नए कपड़े, घर की सजावट, मिठाइयां और रिश्तेदारों से मिलने की तैयारी शुरू हो जाती थी। लेकिन Gen Z और Gen Alpha के लिए त्योहारों का मतलब थोड़ा बदल रहा है। इनके लिए त्योहार सिर्फ परंपरा निभाने का मौका नहीं, बल्कि अपनी पसंद, स्टाइल और पहचान दिखाने का भी मौका बन रहे हैं।
पुरानी पीढ़ी के लिए गणेश चतुर्थी, ओणम, दशहरा, दिवाली और क्रिसमस जैसे त्योहारों पर खरीदारी एक परंपरा रही है। वहीं, नई पीढ़ी किसी खास त्योहार का इंतजार करके खरीदारी नहीं करती। कुछ पसंद आया, ट्रेंड में है या अपनी पसंद से मेल खाता है, तो उसे तुरंत खरीद लेना इनके लिए ज्यादा मायने रखता है।
एक अध्ययन के मुताबिक, 60 फीसदी Gen Z ऐसे सामान खरीदना पसंद करते हैं जो उनकी पहचान और मूल्यों से मेल खाते हों, बजाय इसके कि वे किसी खास मौके का इंतजार करें।
खरीदारी त्योहार के हिसाब से नहीं, पसंद के हिसाब से
Gen Z और Gen Alpha की खरीदारी में बड़ा बदलाव यह है कि अब खरीदारी किसी खास मौके तक सीमित नहीं है। युवा अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से पूरे साल खरीदारी करते हैं। कपड़ों की बात करें तो ऐसे विकल्प ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं, जिन्हें त्योहार के साथ-साथ पार्टी, दोस्तों की मुलाकात या दूसरे मौकों पर भी पहना जा सके। यानी एक कपड़ा सिर्फ त्योहार के लिए नहीं, कई मौकों के लिए काम आए। फैशन के साथ बजट भी अहम है। युवा ऐसा फैशन चाहते हैं जो अच्छा दिखे, ट्रेंड में हो और जेब पर ज्यादा भारी न पड़े।
सोशल मीडिया बन रहा है फैशन का नया आईना
नई पीढ़ी की पसंद पर सोशल मीडिया का असर साफ दिखाई देता है। Instagram और Pinterest जैसे प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले लुक और ट्रेंड कपड़ों की पसंद को तेजी से प्रभावित करते हैं। किसी Influencer का पहनावा वायरल हो या कोई नया लुक ट्रेंड में आए, युवा उसे अपने अंदाज में अपनाने में देर नहीं करते। यही वजह है कि त्योहार अब खरीदारी का अकेला कारण नहीं रह गए हैं। पूरे साल चलने वाले ऑनलाइन ट्रेंड और सेल भी युवाओं के खरीदारी के फैसले को प्रभावित करते हैं।
Tradition से दूरी नहीं, तरीका बदला
Gen Z को सिर्फ ट्रेंड के पीछे चलने वाली पीढ़ी मानना सही नहीं होगा। कई युवा परंपराओं और रीति-रिवाजों को दोबारा अपना रहे हैं, लेकिन अपने तरीके से। पूजा और पारिवारिक मिलना-जुलना अपनी जगह है, लेकिन इनके साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा करना भी उत्सव का हिस्सा बन गया है। यानी परंपरा बनी हुई है, लेकिन उसे मनाने का अंदाज बदल गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई मामलों में Gen Z अपनी पिछली पीढ़ियों की तुलना में परंपराओं को लेकर ज्यादा उत्साहित भी नजर आती है। वहीं, Gen Alpha अभी परंपराओं को समझने और अपनी पसंद बनाने के दौर में है।
त्योहारों के विज्ञापनों में भी आया बदलाव
नई पीढ़ी की बदलती पसंद का असर त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों पर भी पड़ा है। सिर्फ परिवार, रिश्ते और भावनाओं पर आधारित विज्ञापन अब युवाओं को जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। युवा ऐसा कंटेंट पसंद करते हैं जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी, हास्य और पसंद से जुड़ा हो। इसलिए त्योहारों के दौरान छोटे वीडियो, मजेदार कंटेंट और सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रेंड को विज्ञापनों में जगह मिल रही है। नई पीढ़ी के लिए त्योहारों का मतलब सिर्फ गंभीरता और रस्मों तक सीमित नहीं है। मस्ती, दोस्त, फैशन और अपनी पहचान भी इसके अहम हिस्से बन चुके हैं।