{"_id":"6aa6d136c39b5dbe2708c033","slug":"newborns-will-not-be-separated-from-their-mothers-mncus-will-now-be-set-up-within-the-sncu-itself-fatehabad-news-c-127-1-shsr1017-161028-2026-09-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: मां से दूर नहीं होंगे नवजात, अब एसएनसीयू में ही बनेगी एमएनसीयू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: मां से दूर नहीं होंगे नवजात, अब एसएनसीयू में ही बनेगी एमएनसीयू
Sun, 13 Sep 2026 10:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 13 Sep 2026 10:07 PM IST
विज्ञापन
फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में नवजात शिशुओं के लिए बनी नर्सरी संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल की नर्सरी में भर्ती होने वाले नवजात शिशुओं को अब इलाज के दौरान मां से दूर नहीं रहना पड़ेगा। अस्पताल की 17 बेड की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) को अपग्रेड कर इसमें मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) बनाने की तैयारी है। इसके लिए नर्सरी में चार बेड की अलग व्यवस्था की जाएगी।
एमएनसीयू में मां अपने नवजात के साथ रह सकेगी और चिकित्सकीय निगरानी के बीच बच्चे की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभा सकेगी। फिलहाल अस्पताल में स्थिति यह है कि स्टेबल शिशु को स्तनपान करवाने के लिए व्यवस्था नहीं है।
नागरिक अस्पताल की नर्सरी में हर माह करीब 100 से 120 नवजात भर्ती होते हैं। इनमें कई ऐसे शिशु होते हैं जिन्हें जन्म के बाद सामान्य वार्ड में रखने के बजाय विशेष निगरानी और उपचार की जरूरत होती है। कम वजन वाले, समय से पहले जन्मे, सांस लेने में परेशानी वाले, जन्म के बाद संक्रमण की आशंका वाले या दूध पीने में परेशानी झेल रहे नवजातों को नर्सरी या एसएनसीयू में भर्ती किया जाता है।
विज्ञापन
-
मां का दूध और कंगारू केयर होगा आसान
एमएनसीयू का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नवजात को इलाज के साथ मां की मौजूदगी भी मिल सकेगी। चिकित्सकीय निगरानी में मां बच्चे को स्तनपान करा सकेगी। नवजात के लिए मां का दूध बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे उसे पोषण मिलने के साथ संक्रमण से बचाव में भी मदद मिलती है। इसके अलावा कंगारू मदर केयर जैसी देखभाल को भी बढ़ावा दिया जा सकेगा। इसमें मां बच्चे को अपने सीने से लगाकर रखती है। इससे नवजात को गर्माहट बनाए रखने, स्तनपान और मां-बच्चे के भावनात्मक जुड़ाव में मदद मिलती है। विशेष रूप से कम वजन वाले और समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए ऐसी देखभाल उपयोगी मानी जाती है।
-- -- -- -- --
अभी मां और बच्चे को रहना पड़ता है अलग
एसएनसीयू में भर्ती नवजातों को चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार विशेष उपकरणों और निगरानी में रखा जाता है। संक्रमण नियंत्रण और उपचार की प्रक्रिया के कारण कई बार मां को बच्चे से अलग रहना पड़ता है। एमएनसीयू बनने के बाद चयनित मामलों में मां को भी यूनिट में बच्चे के पास रहने की सुविधा मिल सकेगी। इससे बच्चे की देखभाल में मां की भागीदारी बढ़ेगी और नवजात को अस्पताल के उपचार के साथ मातृ देखभाल भी मिल पाएगी।
-
प्रदेश भर के जिला मुख्यालयों पर एसएनसीयू को एमएनसीयू बनाने की तैयारी है। यहां पर मां के लिए अलग से बेड की व्यवस्था की जाएगी। दाखिल शिशु को मां से भी देखभाल मिल पाएगी।
- डॉ. भरत सहारण, उप सिविल सर्जन
विज्ञापन
एमएनसीयू में मां अपने नवजात के साथ रह सकेगी और चिकित्सकीय निगरानी के बीच बच्चे की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभा सकेगी। फिलहाल अस्पताल में स्थिति यह है कि स्टेबल शिशु को स्तनपान करवाने के लिए व्यवस्था नहीं है।
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल की नर्सरी में हर माह करीब 100 से 120 नवजात भर्ती होते हैं। इनमें कई ऐसे शिशु होते हैं जिन्हें जन्म के बाद सामान्य वार्ड में रखने के बजाय विशेष निगरानी और उपचार की जरूरत होती है। कम वजन वाले, समय से पहले जन्मे, सांस लेने में परेशानी वाले, जन्म के बाद संक्रमण की आशंका वाले या दूध पीने में परेशानी झेल रहे नवजातों को नर्सरी या एसएनसीयू में भर्ती किया जाता है।
विज्ञापन
-
मां का दूध और कंगारू केयर होगा आसान
एमएनसीयू का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नवजात को इलाज के साथ मां की मौजूदगी भी मिल सकेगी। चिकित्सकीय निगरानी में मां बच्चे को स्तनपान करा सकेगी। नवजात के लिए मां का दूध बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे उसे पोषण मिलने के साथ संक्रमण से बचाव में भी मदद मिलती है। इसके अलावा कंगारू मदर केयर जैसी देखभाल को भी बढ़ावा दिया जा सकेगा। इसमें मां बच्चे को अपने सीने से लगाकर रखती है। इससे नवजात को गर्माहट बनाए रखने, स्तनपान और मां-बच्चे के भावनात्मक जुड़ाव में मदद मिलती है। विशेष रूप से कम वजन वाले और समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए ऐसी देखभाल उपयोगी मानी जाती है।
अभी मां और बच्चे को रहना पड़ता है अलग
एसएनसीयू में भर्ती नवजातों को चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार विशेष उपकरणों और निगरानी में रखा जाता है। संक्रमण नियंत्रण और उपचार की प्रक्रिया के कारण कई बार मां को बच्चे से अलग रहना पड़ता है। एमएनसीयू बनने के बाद चयनित मामलों में मां को भी यूनिट में बच्चे के पास रहने की सुविधा मिल सकेगी। इससे बच्चे की देखभाल में मां की भागीदारी बढ़ेगी और नवजात को अस्पताल के उपचार के साथ मातृ देखभाल भी मिल पाएगी।
-
प्रदेश भर के जिला मुख्यालयों पर एसएनसीयू को एमएनसीयू बनाने की तैयारी है। यहां पर मां के लिए अलग से बेड की व्यवस्था की जाएगी। दाखिल शिशु को मां से भी देखभाल मिल पाएगी।
- डॉ. भरत सहारण, उप सिविल सर्जन