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Hisar News: सिद्धमुख ब्रांच नहर में 60 फीट चौड़ी दरार से टूटी नहर, 250 एकड़ में फसलें जलमग्न
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कालीरावण में हुआ जलभराव
अग्रोहा, घिराय। गांव कालीरावण से गुजर रही सिद्धमुख ब्रांच नहर शुक्रवार को गांव कोहली और महलसरा के बीच अचानक टूट गई। तटबंध पर पानी का दबाव बढ़ने से हुआ कटाव देखते ही देखते 60 फीट से अधिक चौड़ा हो गया।
नहर से निकले पानी के तेज बहाव ने आसपास के खेतों और निचले रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। इससे करीब 250 एकड़ में धान और सरसों की फसल जलमग्न हो गई जबकि 15 ढाणियों में पानी भर गया। चार ढाणियों के लोग सामान और पशुओं को लेकर घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए।
घटना के बाद ग्रामीणों ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। वे पानी से घिरी ढाणियों में फंसे लोगों और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे रहे। वहीं, मिट्टी से भरी बोरियों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मदद से नहर के कटाव को बंद करने के प्रयास किए गए।
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सुबह 13 फीट था पानी, अब भी 8 फीट का बहाव
ग्रामीणों ने बताया कि सुबह नहर में पानी का स्तर करीब 13 फीट था। फिलहाल घटनास्थल पर करीब आठ फीट पानी का बहाव बना हुआ है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कटाव को पूरी तरह बंद नहीं किया गया तो हजारों एकड़ कृषि भूमि और सैकड़ों मकानों को भारी नुकसान हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, शनिवार तक पानी का बहाव पूरी तरह बंद होने की उम्मीद है। कटाव को जल्द भरने के लिए कालीरावण और आसपास के गांवों से मनरेगा के तहत काम करने वाले लोगों को बुलाया गया है। सिंचाई विभाग के एसडीओ सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे हैं। वे ग्रामीणों के साथ मिलकर राहत और मरम्मत कार्य में जुटे हुए हैं।
पूर्व सरपंच बोले- प्रशासन की ढिलाई से बढ़ा नुकसान
पूर्व सरपंच प्रभु कस्वां की ढाणी के अलावा अमर सिंह, महाबीर, बेगराज, मांगेराम और रामफल की ढाणियों में भी पानी भर गया है। पूर्व सरपंच प्रभु कस्वां ने आरोप लगाया कि इस मामले में प्रशासन का रवैया ढुलमुल रहा। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन समय रहते नहर को पीछे मुख्य ब्रांच टोहाना और काजल हेड से बंद करवा देता तथा तुरंत भारी मशीनरी भिजवा देता तो इतना बड़ा नुकसान होने से बच सकता था।
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शुक्रवार को नहर टूटने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही मौके पर तैनात विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अवगत करवा दिया गया था। नहर की मरम्मत का काम शुरू करवा दिया गया है। आसपास के खेत खाली पड़े थे और फसलों में नुकसान की कोई बड़ी सूचना नहीं मिली है।
- रामप्रसाद गोदारा, एसडीओ, सिंचाई विभाग
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नहर से निकले पानी के तेज बहाव ने आसपास के खेतों और निचले रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। इससे करीब 250 एकड़ में धान और सरसों की फसल जलमग्न हो गई जबकि 15 ढाणियों में पानी भर गया। चार ढाणियों के लोग सामान और पशुओं को लेकर घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए।
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घटना के बाद ग्रामीणों ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। वे पानी से घिरी ढाणियों में फंसे लोगों और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे रहे। वहीं, मिट्टी से भरी बोरियों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मदद से नहर के कटाव को बंद करने के प्रयास किए गए।
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सुबह 13 फीट था पानी, अब भी 8 फीट का बहाव
ग्रामीणों ने बताया कि सुबह नहर में पानी का स्तर करीब 13 फीट था। फिलहाल घटनास्थल पर करीब आठ फीट पानी का बहाव बना हुआ है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कटाव को पूरी तरह बंद नहीं किया गया तो हजारों एकड़ कृषि भूमि और सैकड़ों मकानों को भारी नुकसान हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, शनिवार तक पानी का बहाव पूरी तरह बंद होने की उम्मीद है। कटाव को जल्द भरने के लिए कालीरावण और आसपास के गांवों से मनरेगा के तहत काम करने वाले लोगों को बुलाया गया है। सिंचाई विभाग के एसडीओ सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे हैं। वे ग्रामीणों के साथ मिलकर राहत और मरम्मत कार्य में जुटे हुए हैं।
पूर्व सरपंच बोले- प्रशासन की ढिलाई से बढ़ा नुकसान
पूर्व सरपंच प्रभु कस्वां की ढाणी के अलावा अमर सिंह, महाबीर, बेगराज, मांगेराम और रामफल की ढाणियों में भी पानी भर गया है। पूर्व सरपंच प्रभु कस्वां ने आरोप लगाया कि इस मामले में प्रशासन का रवैया ढुलमुल रहा। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन समय रहते नहर को पीछे मुख्य ब्रांच टोहाना और काजल हेड से बंद करवा देता तथा तुरंत भारी मशीनरी भिजवा देता तो इतना बड़ा नुकसान होने से बच सकता था।
शुक्रवार को नहर टूटने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही मौके पर तैनात विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अवगत करवा दिया गया था। नहर की मरम्मत का काम शुरू करवा दिया गया है। आसपास के खेत खाली पड़े थे और फसलों में नुकसान की कोई बड़ी सूचना नहीं मिली है।
- रामप्रसाद गोदारा, एसडीओ, सिंचाई विभाग