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Jhajjar-Bahadurgarh News: बाढ़ से बचाव के लिए ड्रेन-8 की होगी सफाई, पटरियां भी होंगी मजबूत
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08jjrp16- रेवाड़ी रोड से गुजर रही ड्रेन नंबर-8 में फैली गंदगी। संवाद
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झज्जर। पिछले साल मानसून में रोद्र रूप दिखाने वाली आउटफॉल ड्रेन-8 की वजह से कई गांव में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे। इस बार सिंचाई विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। मार्च में ही ड्रेन की सफाई के लिए टेंडर लगा दिया गया है जो इसी महीने खुल जाएगा।
उम्मीद है कि अप्रैल में वर्क ऑर्डर जारी करके इसकी सफाई का काम करवाया जाए। लगभग 45.590 किलोमीटर लंबी इस ड्रेन पर लगभग 91.78 लाख रुपये की राशि खर्च की जाएगी। विभाग की तरफ से ड्रेन में जमी गाद की सफाई करवाई जाएगी।
पटरियों को मजबूत किया जाएगा जिससे बाहर की मिट्टी ड्रेन में न आए और ड्रेन की मिट्टी बाहर नहीं जा सकेगी। सिंचाई विभाग की तरफ से ऐसे कई गांव चिह्नित कर लिए गए हैं। सिंचाई विभाग की तरफ से 13 मार्च तक टेंडर के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इसके बाद वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा।
गांव व शहर की पानी निकासी का मुख्य जरिया ड्रेन
ड्रेन नंबर-8 से झज्जर शहर के अलावा जिले से कई गांवों से गंदे पानी की निकासी की जाती है। यह ड्रेन रोहतक जिले से आती है और झज्जर के कई गांवों से गुजरती है। इसमें खेतों के अलावा अन्य गंदे पानी की निकासी की जाती है। मानसून के दौरान भी सारा पानी इसी ड्रेन में ही छोड़ा जाता है ताकि स्थिति खराब न हो।
पिछले साल मानसून में बने थे बाढ़ के हालात
पिछले साल मानसून के दौरान ज्यादा बारिश के चलते जिले के कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। ड्रेन नंबर-8 में रोहतक जिले के कई गांवों से ज्यादा पानी छोड़ दिया गया था। इसका असर झज्जर जिले के कई गांवों में देखने को मिला था। कलोई सहित कई गांव में ड्रेन नंबर-8 टूट गई थी। कलोई गांव में तो बांध बनाने में ही प्रशासन को एक से डेढ़ माह लग गया था। इसके अलावा बेरी क्षेत्र से कई गांवों में भी पानी घुस गया था और हालात बाढ़ जैसे बन गए थे।
वर्जन
आउटफॉल ड्रेन नंबर-8 से गाद निकाली जाएगी। इसके अलावा कई गांवों की पटरियों को मजबूत किया जाएगा। पिछले साल मानसून में दिक्कत आई थी। इस बार समय से पहले ही सफाई करवा दी जाएगी।
पुनीत साहनी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
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उम्मीद है कि अप्रैल में वर्क ऑर्डर जारी करके इसकी सफाई का काम करवाया जाए। लगभग 45.590 किलोमीटर लंबी इस ड्रेन पर लगभग 91.78 लाख रुपये की राशि खर्च की जाएगी। विभाग की तरफ से ड्रेन में जमी गाद की सफाई करवाई जाएगी।
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पटरियों को मजबूत किया जाएगा जिससे बाहर की मिट्टी ड्रेन में न आए और ड्रेन की मिट्टी बाहर नहीं जा सकेगी। सिंचाई विभाग की तरफ से ऐसे कई गांव चिह्नित कर लिए गए हैं। सिंचाई विभाग की तरफ से 13 मार्च तक टेंडर के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इसके बाद वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा।
गांव व शहर की पानी निकासी का मुख्य जरिया ड्रेन
ड्रेन नंबर-8 से झज्जर शहर के अलावा जिले से कई गांवों से गंदे पानी की निकासी की जाती है। यह ड्रेन रोहतक जिले से आती है और झज्जर के कई गांवों से गुजरती है। इसमें खेतों के अलावा अन्य गंदे पानी की निकासी की जाती है। मानसून के दौरान भी सारा पानी इसी ड्रेन में ही छोड़ा जाता है ताकि स्थिति खराब न हो।
पिछले साल मानसून में बने थे बाढ़ के हालात
पिछले साल मानसून के दौरान ज्यादा बारिश के चलते जिले के कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। ड्रेन नंबर-8 में रोहतक जिले के कई गांवों से ज्यादा पानी छोड़ दिया गया था। इसका असर झज्जर जिले के कई गांवों में देखने को मिला था। कलोई सहित कई गांव में ड्रेन नंबर-8 टूट गई थी। कलोई गांव में तो बांध बनाने में ही प्रशासन को एक से डेढ़ माह लग गया था। इसके अलावा बेरी क्षेत्र से कई गांवों में भी पानी घुस गया था और हालात बाढ़ जैसे बन गए थे।
वर्जन
आउटफॉल ड्रेन नंबर-8 से गाद निकाली जाएगी। इसके अलावा कई गांवों की पटरियों को मजबूत किया जाएगा। पिछले साल मानसून में दिक्कत आई थी। इस बार समय से पहले ही सफाई करवा दी जाएगी।
पुनीत साहनी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग