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Haryana: पकड़ा गया घूसखोर डिप्टी सुपरिंटेंडेंट; HKRN के दो कर्मी भी गिरफ्तार, विजिलेंस ने दबोचा तो रोने लगे

संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा) Published by: अंकेश ठाकुर Updated Fri, 20 Feb 2026 06:42 PM IST
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सार

विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने कैथल के पब्लिक हेल्थ कार्यालय में रेड की। वहां घूस ले रहे डिप्टी सुपरिंटेंडेंट सहित तो कर्मचारियों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया। पकड़े जाने पर डिप्टी सुपरिंटेंडेंट खुद को बेकसूर बताते हुए रोने लगा। 

Vigilance raid in Kaithal Deputy Superintendent and 2 HKRN employees arrested while taking bribe
विजिलेंस टीम की हिरासत में घूसखोर कर्मचारी। - फोटो : संवाद
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विस्तार

कैथल विजिलेंस टीम ने शुक्रवार को पब्लिक हेल्थ कार्यालय में बड़ी छापेमारी की। टीम ने डिप्टी सुपरिंटेंडेंट कमलकांत सहित हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के 2 कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। विजिलेंस की इस कार्रवाई से पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है। विजिलेंस इंस्पेक्टर सूबे सिंह सैनी के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाते हुए दोपहर के समय कार्यालय पर रेड की। टीम ने डिप्टी सुपरिंटेंडेंट कमलकांत को 20 हजार रुपये, जबकि एचकेआरएन कर्मचारी अशोक कुमार व बलजीत को 5-5 हजार रुपये की रिश्वत लेते दबोचा। बताया जा रहा है कि आरोपी कमलकांत ने रिश्वत की रकम तुरंत अपनी जेब में डाल ली थी, जबकि अन्य कर्मचारियों ने रुपये अलमारी में छिपाए थे, जिन्हें विजिलेंस ने मौके पर ही बरामद कर लिया।

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गिरफ्तारी के बाद का नजारा बेहद नाटकीय रहा। खुद को फंसता देख डिप्टी सुपरिंटेंडेंट कमलकांत दफ्तर में ही दहाड़े मारकर रोने लगा। वह बार-बार खुद को बेकसूर बताते हुए कह रहा था कि उसके पास शिकायतकर्ता का कोई बिल बकाया नहीं है। लेकिन जब विजिलेंस ने उसकी अलमारी की तलाशी ली, तो वहां से वही पेंडिंग बिल बरामद हो गए जिन्हें दबाकर रिश्वत मांगी जा रही थी। टीम ने इन बिलों को साक्ष्य के तौर पर कब्जे में ले लिया है।
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ठेकेदार से बिल पास करने की एवज में ले रहे थे घूस
शिकायतकर्ता ठेकेदार विशाल भारद्वाज ने बताया कि आरोपी डिप्टी सुपरिंटेंडेंट कमलकांत बिल पास करने के नाम पर कुल राशि का 2 प्रतिशत (डिप्टी सुपरिटेंडेंट) और 1-1 प्रतिशत (कर्मचारी) कमीशन मांग रहे थे। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने ठेकेदार के 2026 के कार्यों के बिल और कोटेशन बिना किसी आरटीआई के चोरी-छिपे विरोधियों (बलबीर रोहेड़ा व राधेश्याम प्रजापति) को दे दिए। इसके बाद ठेकेदार से करोड़ों रुपये की डिमांड कर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित और ब्लैकमेल किया जाने लगा।

कॉल रिकॉर्डिंग बनी पुख्ता सबूत
परेशान होकर ठेकेदार ने आरोपियों की बातचीत रिकॉर्ड कर विजिलेंस को सौंप दी थी। इसी रिकॉर्डिंग के आधार पर रणनीति तैयार की गई। कार्रवाई के दौरान डीआरओ चंद्रमोहन ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर तैनात रहे। फिलहाल विजिलेंस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और भ्रष्टाचार की इस चेन में शामिल अन्य चेहरों को बेनकाब करने में जुटी है।

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