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Kaithal News: पंप मालिक बोले- स्कैनर अंदर रखने को होंगे मजबूर
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पेट्रोल पंप पर तेल डलवाता वाहन चालक। संवाद
कैथल। यूपीआई से भुगतान पर 15 अक्तूबर से चार्ज लगाने के फैसले ने पंप मालिकों की चिंता बढ़ा दी है। पंप मालिक इसके लिए आपस में बैठकें कर रहे हैं। वहीं एक पंप मालिक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि ये फैसला अगर लागू हो गया तो वे अपने स्कैनर अंदर रखने को मजबूर होंगे, क्योंकि हर रोज कुछ 100 से लेकर हजारों रुपये का नुकसान इससे होगा।
पंप मालिकों का कहना है कि अब हर पंप पर 60 से 70 प्रतिशत भुगतान यूपीआई से हो रहा है जो भुगतान का बड़ा हिस्सा है। ऐसे में अगर यूपीआई भुगतान पर चार्ज लगता है तो इससे पंप मालिकों को सीधे सीधे नुकसान होगा। इससे उनकी सेल घटने के साथ ही ग्राहकों के साथ झगड़े जैसे मामले भी बढ़ सकते हैं, क्योंकि यूपीआई भुगतान पर चार्ज जो है सीधे ग्राहक पर नहीं लगाया गया है। ऐसे में ग्राहक भुगतान करने की जिद्द कर सकता है।
शुल्क की चर्चा से व्यापारियों में चिंता, अनावश्यक बोझ न डाले सरकार : हरियाणा चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चेयरमैन शिव नारायण गोयल ने कहा कि यूपीआई ने भुगतान व्यवस्था को सरल व सुविधाजनक बनाया था। इस पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क लगाने से पहले उसके व्यावहारिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के लिए हर अतिरिक्त खर्च महत्वपूर्ण होता है। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे व्यापारियों पर कोई अनावश्यक चार्ज न लगे और डिजिटल भुगतान को भी बढ़ावा मिलता रहे। उन्होंने कहा कि सरकार, बैंकिंग क्षेत्र और व्यापारी संगठनों के बीच संवाद के माध्यम से ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए जिससे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और डिजिटल भुगतान व्यवस्था भी प्रभावित न हो।
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पंप मालिकों का कहना है कि अब हर पंप पर 60 से 70 प्रतिशत भुगतान यूपीआई से हो रहा है जो भुगतान का बड़ा हिस्सा है। ऐसे में अगर यूपीआई भुगतान पर चार्ज लगता है तो इससे पंप मालिकों को सीधे सीधे नुकसान होगा। इससे उनकी सेल घटने के साथ ही ग्राहकों के साथ झगड़े जैसे मामले भी बढ़ सकते हैं, क्योंकि यूपीआई भुगतान पर चार्ज जो है सीधे ग्राहक पर नहीं लगाया गया है। ऐसे में ग्राहक भुगतान करने की जिद्द कर सकता है।
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शुल्क की चर्चा से व्यापारियों में चिंता, अनावश्यक बोझ न डाले सरकार : हरियाणा चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चेयरमैन शिव नारायण गोयल ने कहा कि यूपीआई ने भुगतान व्यवस्था को सरल व सुविधाजनक बनाया था। इस पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क लगाने से पहले उसके व्यावहारिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के लिए हर अतिरिक्त खर्च महत्वपूर्ण होता है। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे व्यापारियों पर कोई अनावश्यक चार्ज न लगे और डिजिटल भुगतान को भी बढ़ावा मिलता रहे। उन्होंने कहा कि सरकार, बैंकिंग क्षेत्र और व्यापारी संगठनों के बीच संवाद के माध्यम से ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए जिससे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और डिजिटल भुगतान व्यवस्था भी प्रभावित न हो।
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