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Bilaspur News: गोबिंदसागर में मलबा डंपिंग करने के आरोपों की जांच शुरू
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टाली में गोबिंद सागर झील किनारे की गई डंपिंग। संवाद
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फोरलेन परियोजना के खिलाफ शिकायत पर वन विभाग सक्रिय, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने पर्यावरण को खतरे का जताया अंदेशा
डंपिंग साइट पर सुरक्षा दीवार नहीं होने से बरसात में बड़े हादसे की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंदसागर झील में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की सुन्नण-जबल परियोजना का मलबा फेंके जाने की शिकायत के बाद वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उप वन संरक्षक बिलासपुर ने उप अरण्यपाल बिलासपुर को मौके का निरीक्षण कर तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश जारी किए हैं।
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने मामले की 17 जुलाई को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सुन्नण-जब्बल एनएचएआई परियोजना से निकलने वाला मलबा पहले टाली के एक नाले में डंप किया जा रहा था, लेकिन नाला पूरी तरह भर जाने के बाद अब मलबा सीधे ढलान से गोबिंदसागर झील में जा रहा है। इससे झील के जल और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिस स्थान पर मलबा डंप किया जा रहा है, वहां सुरक्षा के लिए कोई रिटेनिंग वॉल या सुरक्षा दीवार नहीं बनाई गई है, जबकि मौके पर बड़ी मात्रा में मलबा डाला जा रहा है। बरसात के मौसम में मलबा खिसकने की स्थिति में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। समिति ने आरोप लगाया है कि निर्माण एजेंसी की ओर से सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद उप वन संरक्षक बिलासपुर ने उप अरण्यपाल को अधीनस्थ अधिकारियों के साथ मौके पर जाकर पूरे मामले का निरीक्षण करने, शिकायत के प्रत्येक बिंदु की जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही तीन दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट वन वृत्त कार्यालय भेजने को कहा गया है, ताकि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके। वन विभाग ने इस पत्र की प्रति एनएचएआई की परियोजना कार्यान्वयन इकाई के परियोजना निदेशक को भी भेजी है, ताकि शिकायत से उन्हें अवगत कराया जा सके। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि झील में मलबा फेंके जाने के आरोप कितने सही हैं और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
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फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने पर्यावरण को खतरे का जताया अंदेशा
डंपिंग साइट पर सुरक्षा दीवार नहीं होने से बरसात में बड़े हादसे की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंदसागर झील में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की सुन्नण-जबल परियोजना का मलबा फेंके जाने की शिकायत के बाद वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उप वन संरक्षक बिलासपुर ने उप अरण्यपाल बिलासपुर को मौके का निरीक्षण कर तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश जारी किए हैं।
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने मामले की 17 जुलाई को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सुन्नण-जब्बल एनएचएआई परियोजना से निकलने वाला मलबा पहले टाली के एक नाले में डंप किया जा रहा था, लेकिन नाला पूरी तरह भर जाने के बाद अब मलबा सीधे ढलान से गोबिंदसागर झील में जा रहा है। इससे झील के जल और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिस स्थान पर मलबा डंप किया जा रहा है, वहां सुरक्षा के लिए कोई रिटेनिंग वॉल या सुरक्षा दीवार नहीं बनाई गई है, जबकि मौके पर बड़ी मात्रा में मलबा डाला जा रहा है। बरसात के मौसम में मलबा खिसकने की स्थिति में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। समिति ने आरोप लगाया है कि निर्माण एजेंसी की ओर से सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद उप वन संरक्षक बिलासपुर ने उप अरण्यपाल को अधीनस्थ अधिकारियों के साथ मौके पर जाकर पूरे मामले का निरीक्षण करने, शिकायत के प्रत्येक बिंदु की जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही तीन दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट वन वृत्त कार्यालय भेजने को कहा गया है, ताकि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके। वन विभाग ने इस पत्र की प्रति एनएचएआई की परियोजना कार्यान्वयन इकाई के परियोजना निदेशक को भी भेजी है, ताकि शिकायत से उन्हें अवगत कराया जा सके। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि झील में मलबा फेंके जाने के आरोप कितने सही हैं और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
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