{"_id":"6ac65343f62d58959b04dcd9","slug":"no-permission-to-complete-construction-status-quo-order-remains-in-place-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-169415-2026-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: निर्माण पूरा करने की अनुमति नहीं, यथास्थिति का आदेश बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: निर्माण पूरा करने की अनुमति नहीं, यथास्थिति का आदेश बरकरार
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सिविल जज कोर्ट नंबर तीन घुमारवीं ने भूमि विवाद से जुड़े मामले में पहले से बने कमरे की छत डालने की अनुमति मांगने वाली अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यथास्थिति के आदेश में बदलाव के लिए आवेदक कोई ऐसी बदली हुई परिस्थिति साबित नहीं कर सका, जिसके आधार पर पूर्व आदेश में संशोधन किया जा सके। इसके साथ ही 9 दिसंबर 2025 को पारित यथास्थिति का आदेश बरकरार रहेगा।
अर्जी में कहा गया था कि मुख्य मुकदमे की भूमि खसरा नंबर 167 में है, जबकि निर्माण खसरा नंबर 456/399 में स्थित है। एक कमरे की दीवारें पहले ही छत के स्तर तक तैयार हो चुकी हैं और केवल छत डालना बाकी है। इसलिए पहले से बनी दीवारों पर छत डालने की अनुमति मांगी गई थी। विरोध करने वाले पक्ष ने कहा कि निर्माण की आड़ में विवादित भूमि में दखल का प्रयास हो सकता है। छत डालने की अनुमति से संपत्ति की मौजूदा स्थिति बदल जाएगी और इससे अपूरणीय नुकसान होने की आशंका है।
अदालत ने कहा कि निर्माण वास्तव में खसरा नंबर 456/399 में ही है और उसका विवादित खसरा नंबर 167 से कोई संबंध नहीं है, यह बात इस स्तर पर केवल दावों के आधार पर तय नहीं की जा सकती। अंतरिम स्तर पर न्यायालय को मुकदमे की विषय-वस्तु सुरक्षित रखनी है। अदालत ने यह भी पाया कि यथास्थिति आदेश पारित होने के बाद परिस्थितियों में किसी महत्वपूर्ण बदलाव का कोई ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया। इन आधारों पर निर्माण पूरा करने की अनुमति वाली अर्जी खारिज कर दी गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश की टिप्पणियों का मुख्य मुकदमे के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुख्य मामले में दस्तावेज दाखिल करने और मुद्दे तय करने के लिए अगली सुनवाई 5 दिसंबर 2026 को होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिलासपुर। सिविल जज कोर्ट नंबर तीन घुमारवीं ने भूमि विवाद से जुड़े मामले में पहले से बने कमरे की छत डालने की अनुमति मांगने वाली अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यथास्थिति के आदेश में बदलाव के लिए आवेदक कोई ऐसी बदली हुई परिस्थिति साबित नहीं कर सका, जिसके आधार पर पूर्व आदेश में संशोधन किया जा सके। इसके साथ ही 9 दिसंबर 2025 को पारित यथास्थिति का आदेश बरकरार रहेगा।
अर्जी में कहा गया था कि मुख्य मुकदमे की भूमि खसरा नंबर 167 में है, जबकि निर्माण खसरा नंबर 456/399 में स्थित है। एक कमरे की दीवारें पहले ही छत के स्तर तक तैयार हो चुकी हैं और केवल छत डालना बाकी है। इसलिए पहले से बनी दीवारों पर छत डालने की अनुमति मांगी गई थी। विरोध करने वाले पक्ष ने कहा कि निर्माण की आड़ में विवादित भूमि में दखल का प्रयास हो सकता है। छत डालने की अनुमति से संपत्ति की मौजूदा स्थिति बदल जाएगी और इससे अपूरणीय नुकसान होने की आशंका है।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि निर्माण वास्तव में खसरा नंबर 456/399 में ही है और उसका विवादित खसरा नंबर 167 से कोई संबंध नहीं है, यह बात इस स्तर पर केवल दावों के आधार पर तय नहीं की जा सकती। अंतरिम स्तर पर न्यायालय को मुकदमे की विषय-वस्तु सुरक्षित रखनी है। अदालत ने यह भी पाया कि यथास्थिति आदेश पारित होने के बाद परिस्थितियों में किसी महत्वपूर्ण बदलाव का कोई ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया। इन आधारों पर निर्माण पूरा करने की अनुमति वाली अर्जी खारिज कर दी गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश की टिप्पणियों का मुख्य मुकदमे के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुख्य मामले में दस्तावेज दाखिल करने और मुद्दे तय करने के लिए अगली सुनवाई 5 दिसंबर 2026 को होगी।
विज्ञापन