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Chamba News: चीड़ की पत्तियों से सपने बुन रहीं महिलाएं
Mon, 27 Jul 2026 10:57 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 27 Jul 2026 10:57 PM IST
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सुंडला की नीलम ने 50 महिलाओं को सिखाया हुनर, स्वरोजगार से भी जोड़ा
आकर्षक टोकरियां, ट्रे, सजावटी सामान, पेन स्टैंड, फूलदान कर रही हैं तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिन चीड़ की सूखी पत्तियों को कभी जंगलों की आग और बेकार कचरे की वजह माना जाता था, वही अब सुंडला की महिलाओं के सपनों को आकार दे रही हैं।
एक महिला की सोच ने प्रकृति के इस अनदेखे संसाधन को आत्मनिर्भरता की ऐसी डोर में पिरोया कि आज दर्जनों महिलाएं अपने हाथों की कला से न सिर्फ घर की आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की मिसाल भी पेश कर रही हैं।
चीड़ की पत्तियों से हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण लेने के बाद सुंडला की नीलम कुमारी ने इस हुनर को अन्य महिलाओं तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया। उनके प्रयास से 50 महिलाएं हस्तशिल्प निर्माण का प्रशिक्षण ले चुकी हैं। इनमें 20 महिलाएं उत्पाद तैयार कर रही हैं।
सुनीता देवी, पुष्पा देवी, जानकी देवी, कविता देवी और माया देवी ने बताया कि चीड़ की पत्तियों से आकर्षक टोकरियां, ट्रे, सजावटी सामान, पेन स्टैंड, फूलदान और अन्य उपयोगी वस्तुएं तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की मांग मेलों, प्रदर्शनियों और विभिन्न बाजारों में बढ़ रही है।
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नीलम ने गांव में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन को महिलाओं की आर्थिक मजबूती से जोड़ दिया। उनका उद्देश्य हस्तशिल्प सिखाना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा करना और उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाना है। नीलम ने बताया कि शुरुआत में लोगों को समझाना मुश्किल था कि चीड़ की पत्तियां भी कमाई का साधन बन सकती हैं। धीरे-धीरे महिलाओं ने इस काम को अपनाया और अपने हुनर से तैयार उत्पादों को पहचान दिलाई। आज कई महिलाएं इस कार्य के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। गर्मियों में चीड़ की सूखी पत्तियां जंगलों में आग फैलने का बड़ा कारण बनती हैं। इन पत्तियों का उपयोग हस्तशिल्प निर्माण में होने से जहां महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, वहीं जंगलों में आग के खतरे को कम करने में भी मदद मिल रही है।
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आकर्षक टोकरियां, ट्रे, सजावटी सामान, पेन स्टैंड, फूलदान कर रही हैं तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिन चीड़ की सूखी पत्तियों को कभी जंगलों की आग और बेकार कचरे की वजह माना जाता था, वही अब सुंडला की महिलाओं के सपनों को आकार दे रही हैं।
एक महिला की सोच ने प्रकृति के इस अनदेखे संसाधन को आत्मनिर्भरता की ऐसी डोर में पिरोया कि आज दर्जनों महिलाएं अपने हाथों की कला से न सिर्फ घर की आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की मिसाल भी पेश कर रही हैं।
चीड़ की पत्तियों से हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण लेने के बाद सुंडला की नीलम कुमारी ने इस हुनर को अन्य महिलाओं तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया। उनके प्रयास से 50 महिलाएं हस्तशिल्प निर्माण का प्रशिक्षण ले चुकी हैं। इनमें 20 महिलाएं उत्पाद तैयार कर रही हैं।
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सुनीता देवी, पुष्पा देवी, जानकी देवी, कविता देवी और माया देवी ने बताया कि चीड़ की पत्तियों से आकर्षक टोकरियां, ट्रे, सजावटी सामान, पेन स्टैंड, फूलदान और अन्य उपयोगी वस्तुएं तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की मांग मेलों, प्रदर्शनियों और विभिन्न बाजारों में बढ़ रही है।
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नीलम ने गांव में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन को महिलाओं की आर्थिक मजबूती से जोड़ दिया। उनका उद्देश्य हस्तशिल्प सिखाना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा करना और उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाना है। नीलम ने बताया कि शुरुआत में लोगों को समझाना मुश्किल था कि चीड़ की पत्तियां भी कमाई का साधन बन सकती हैं। धीरे-धीरे महिलाओं ने इस काम को अपनाया और अपने हुनर से तैयार उत्पादों को पहचान दिलाई। आज कई महिलाएं इस कार्य के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। गर्मियों में चीड़ की सूखी पत्तियां जंगलों में आग फैलने का बड़ा कारण बनती हैं। इन पत्तियों का उपयोग हस्तशिल्प निर्माण में होने से जहां महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, वहीं जंगलों में आग के खतरे को कम करने में भी मदद मिल रही है।