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Hamirpur (Himachal) News: हिमकेयर कार्ड किया अस्वीकार, अब मरीज को लौटाने होंगे इलाज के पैसे
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 15 Mar 2026 12:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश सरकार की हिमकेयर योजना के तहत कार्ड स्वीकार करने से मना करने वाले एक निजी अस्पताल को अब मरीज से वसूली गई रकम लौटानी पड़ेगी।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, हमीरपुर ने अस्पताल को मरीज से लिए गए 1.65 लाख रुपये ब्याज सहित वापस करने और अतिरिक्त हर्जाना देने के आदेश दिए हैं।
आयोग ने अपने फैसले में साफ कहा है कि सरकार से भुगतान लंबित होने का बहाना बनाकर कोई भी सूचीबद्ध निजी अस्पताल मरीज को कैशलेस इलाज देने से इंकार नहीं कर सकता। ऐसा करना सेवा में कमी माना जाएगा। आयोग ने हिमकेयर और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से सूचीबद्ध सभी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने एडमिशन फॉर्म में अनिवार्य बदलाव करें।
फॉर्म में एक अलग सेक्शन रखना होगा, जिसमें मरीज से यह पूछा जाएगा कि उसके पास हिमकेयर या आयुष्मान भारत कार्ड है या नहीं। यदि मरीज कार्ड होने के बावजूद अपनी इच्छा से नकद भुगतान कर इलाज करवाना चाहता है, तो अस्पताल को स्थानीय भाषा (हिंदी/पहाड़ी) में उससे लिखित सहमति लेनी होगी।
मामले के अनुसार भोरंज तहसील के सुरेश चंद गुलेरिया को फरवरी 2024 में अचानक दिल का दौरा पड़ा। परिजन उन्हें पहले सिविल अस्पताल भोरंज लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। मरीज के पास प्रदेश सरकार की हिमकेयर योजना का वैध कार्ड था, जिसके तहत पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज का प्रावधान है।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने यह कहते हुए कार्ड स्वीकार करने से मना कर दिया कि सरकार से उन्हें भुगतान नहीं मिल रहा है। मजबूरी में परिवार को इलाज के लिए 1.65 लाख रुपये नकद जमा करवाने पड़े, जबकि मरीज पहले भी इसी कार्ड पर अन्य निजी अस्पताल में इलाज करवा चुका था।
मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा तथा सदस्य स्नेह लता और जोगिंदर महाजन ने इसे स्पष्ट रूप से सेवा में कमी माना। आयोग ने आदेश दिया कि अस्पताल मरीज से लिए गए 1.65 लाख रुपये लौटाएगा, साथ ही इस राशि पर 15 फरवरी 2024 से भुगतान की तारीख तक छह प्रतिशत ब्याज भी देगा। इसके अतिरिक्त मरीज को मानसिक पीड़ा और अदालती खर्च के रूप में 20 हजार रुपये अलग से देने होंगे।
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश सरकार की हिमकेयर योजना के तहत कार्ड स्वीकार करने से मना करने वाले एक निजी अस्पताल को अब मरीज से वसूली गई रकम लौटानी पड़ेगी।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, हमीरपुर ने अस्पताल को मरीज से लिए गए 1.65 लाख रुपये ब्याज सहित वापस करने और अतिरिक्त हर्जाना देने के आदेश दिए हैं।
आयोग ने अपने फैसले में साफ कहा है कि सरकार से भुगतान लंबित होने का बहाना बनाकर कोई भी सूचीबद्ध निजी अस्पताल मरीज को कैशलेस इलाज देने से इंकार नहीं कर सकता। ऐसा करना सेवा में कमी माना जाएगा। आयोग ने हिमकेयर और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से सूचीबद्ध सभी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने एडमिशन फॉर्म में अनिवार्य बदलाव करें।
फॉर्म में एक अलग सेक्शन रखना होगा, जिसमें मरीज से यह पूछा जाएगा कि उसके पास हिमकेयर या आयुष्मान भारत कार्ड है या नहीं। यदि मरीज कार्ड होने के बावजूद अपनी इच्छा से नकद भुगतान कर इलाज करवाना चाहता है, तो अस्पताल को स्थानीय भाषा (हिंदी/पहाड़ी) में उससे लिखित सहमति लेनी होगी।
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मामले के अनुसार भोरंज तहसील के सुरेश चंद गुलेरिया को फरवरी 2024 में अचानक दिल का दौरा पड़ा। परिजन उन्हें पहले सिविल अस्पताल भोरंज लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। मरीज के पास प्रदेश सरकार की हिमकेयर योजना का वैध कार्ड था, जिसके तहत पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज का प्रावधान है।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने यह कहते हुए कार्ड स्वीकार करने से मना कर दिया कि सरकार से उन्हें भुगतान नहीं मिल रहा है। मजबूरी में परिवार को इलाज के लिए 1.65 लाख रुपये नकद जमा करवाने पड़े, जबकि मरीज पहले भी इसी कार्ड पर अन्य निजी अस्पताल में इलाज करवा चुका था।
मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा तथा सदस्य स्नेह लता और जोगिंदर महाजन ने इसे स्पष्ट रूप से सेवा में कमी माना। आयोग ने आदेश दिया कि अस्पताल मरीज से लिए गए 1.65 लाख रुपये लौटाएगा, साथ ही इस राशि पर 15 फरवरी 2024 से भुगतान की तारीख तक छह प्रतिशत ब्याज भी देगा। इसके अतिरिक्त मरीज को मानसिक पीड़ा और अदालती खर्च के रूप में 20 हजार रुपये अलग से देने होंगे।