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नवाचार: पृथ्वी से संदेशों के मोहताज नहीं रहेंगे उपग्रह, खुद करेंगे फैसला; एआई आधारित नोवा सैट सॉफ्टवेयर तैयार
Wed, 09 Sep 2026 04:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा
कमलेश रतन भारद्वाज, हमीरपुर
कमलेश रतन भारद्वाज, हमीरपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 09 Sep 2026 04:10 AM IST
सार
एनआईटी हमीरपुर के विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ‘नोवा सेट’ सॉफ्टवेयर तैयार किया है। यह रोवर से मिलने वाले अंतरिक्ष संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर बिना पृथ्वी से तत्काल निर्देश लिए निर्णय लेने में मदद करेगा। चंद्रमा और मंगल पर भविष्य के मानव मिशनों के लिए इसे अहम तकनीक माना जा रहा है।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट को हर निर्णय के लिए पृथ्वी से मिलने वाले निर्देश का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एनआईटी हमीरपुर के विद्यार्थियों ने (एआई) कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नोवा सेट सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो सैटेलाइट में लगे रोवर से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण कर खुद निर्णय लेने में सक्षम होगा। मंगल ग्रह तक संदेश पहुंचने और जवाब आने में करीब 48 मिनट तक लग सकते हैं। ऐसे में भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर मानव मिशनों के दौरान यह तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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एनआईटी के कंप्यूटर विज्ञान और विद्युत अभियांत्रिकी विभाग के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने यह नवाचार संस्थान में आयोजित आंतरिक स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन में प्रस्तुत किया, जहां इसे सर्वश्रेष्ठ चुना गया। अब राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन मूल्यांकन के बाद इसे स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन की राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को कंप्यूटर विज्ञान विभाग के विद्यार्थी पार्थ बंसल और विद्युत अभियांत्रिकी विभाग की विद्यार्थी सृष्टि ठाकुर ने तैयार किया है।
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विद्यार्थियों ने एआई आधारित एजेंट की मदद से सॉफ्टवेयर विकसित किया है। इसमें मंगल के वातावरण और सतह से जुड़े आंकड़ों को समझकर रोवर से प्राप्त इनपुट के आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रदर्शित की गई है। विद्यार्थियों के अनुसार नोवा सेट को भविष्य में सैटेलाइट में स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। परियोजना को और विकसित करने के साथ पेटेंट दाखिल करने की तैयारी भी की जा रही है।
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नासा के मैप से मंगल का थ्रीडी मॉडल बनाया
विद्यार्थियों ने नासा के मानचित्र और उपलब्ध अंतरिक्ष आंकड़ों की मदद से मंगल ग्रह का थ्रीडी मॉडल तैयार किया है। इसमें मंगल के वातावरण और सतह से जुड़े आंकड़ों को प्रदर्शित किया गया है। परियोजना का उद्देश्य ऐसे अंतरिक्ष अभियानों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को स्वचालित बनाना है, जहां पृथ्वी से तत्काल निर्देश भेजना संभव नहीं होता। भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर मानव बस्तियां बसाने से जुड़े अभियानों में भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है। एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. एचएम सूर्यवंशी ने कहा कि नवाचार के लिए विद्यार्थी लगातार मेहनत कर रहे हैं। हर विभाग के विद्यार्थियों को नवाचार के लिए प्रेरित करने के लिए हैकाथॉन और राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन समय-समय पर किया जाता है।
विद्यार्थियों ने नासा के मानचित्र और उपलब्ध अंतरिक्ष आंकड़ों की मदद से मंगल ग्रह का थ्रीडी मॉडल तैयार किया है। इसमें मंगल के वातावरण और सतह से जुड़े आंकड़ों को प्रदर्शित किया गया है। परियोजना का उद्देश्य ऐसे अंतरिक्ष अभियानों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को स्वचालित बनाना है, जहां पृथ्वी से तत्काल निर्देश भेजना संभव नहीं होता। भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर मानव बस्तियां बसाने से जुड़े अभियानों में भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है। एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. एचएम सूर्यवंशी ने कहा कि नवाचार के लिए विद्यार्थी लगातार मेहनत कर रहे हैं। हर विभाग के विद्यार्थियों को नवाचार के लिए प्रेरित करने के लिए हैकाथॉन और राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन समय-समय पर किया जाता है।