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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal High Court: Double standards in compassionate appointments will not be tolerated

हाईकोर्ट: अनुकंपा नियुक्ति में दोहरा रवैया बर्दाश्त नहीं, मृत कर्मचारी के आश्रित को क्लर्क पद देने का आदेश

Mon, 31 Aug 2026 08:22 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 31 Aug 2026 08:22 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के मामले में राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है।

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Himachal High Court: Double standards in compassionate appointments will not be tolerated
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के मामले में राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति में दोहरा रवैया बर्दाश्त नही किया जाएगा। अदालत ने राज्य सरकार के कृत्य को गैरकानूनी घोषित करते हुए आदेश जारी किया कि याचिकाकर्ता को क्लर्क  के पद पर नियुक्ति पत्र जारी कर सभी परिणामी सेवा लाभ प्रदान किए जाएं। यह नियुक्ति 25 अप्रैल 2022 (जब अन्य समकक्ष उम्मीदवारों को नियुक्ति दी गई थी) से प्रभावी मानी जाएगी। एकल पीठ ने याचिकाकर्ता नवीन की याचिका को स्वीकार करते हुए विभाग के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत उन्हें चतुर्थ श्रेणी पद पर दैनिक वेतन भोगी के रूप में तैनात किया गया था।

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अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता को 23 मार्च 2022 को चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्त करने के तुरंत बाद, 25 अप्रैल 2022 को विभाग ने उसी श्रेणी के अन्य समान पात्र व्यक्तियों को क्लर्क तृतीय श्रेणी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दे दी। 25 अप्रैल 2022 को दी गई नियुक्तियों से स्पष्ट होता है कि उस समय विभाग के पास क्लर्क के पद रिक्त थे। विभाग ने पहले याचिकाकर्ता को चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्त करके उनके तृतीय श्रेणी के दावे को समाप्त करने की कोशिश की और फिर अन्य समान मामलों में क्लर्क पद की सौगात दी, जो कि स्पष्ट रूप से भेदभाव और शक्ति का दुरुपयोग है। याचिकाकर्ता की ओर से 2019 में आवेदन करने के बावजूद विभाग ने उनकी फाइल को सरकार को भेजने में दो साल से अधिक की देरी की, जिसकी सजा याचिकाकर्ता को नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता के पिता स्वास्थ्य विभाग में नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे, जिनकी सेवाकाल के दौरान 22 जनवरी 2019 को मृत्यु हो गई थी।

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याचिकाकर्ता ने अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर तुरंत क्लर्क तृतीय श्रेणी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। निदेशालय स्तर की स्क्रूटनी कमेटी ने याचिकाकर्ता को क्लर्क के पद के लिए पात्र और योग्य पाया। हालांकि 23 मार्च 2022 को विभाग ने उन्हें उनकी बिना किसी सहमति या विकल्प के चतुर्थ श्रेणी के पद पर दैनिक वेतन भोगी के रूप में नियुक्ति दे दी। राज्य सरकार के 24 जनवरी 2022 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, तृतीय श्रेणी के आवेदकों को चतुर्थ श्रेणी पद के लिए विकल्प देना आवश्यक था और यह स्पष्ट करना था कि श्रेणी-फोर स्वीकार करने पर तृतीय श्रेणी का दावा समाप्त हो जाएगा। अदालत ने पाया कि विभाग ने याचिकाकर्ता से ऐसा कोई विकल्प या सहमति नहीं ली और एकतरफा निर्णय ले लिया। उच्च न्यायालय ने माना कि जिस परिवार ने अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया हो, उसके पास राज्य के समान सौदेबाजी की शक्ति नहीं होती। वित्तीय तंगी के कारण नौकरी स्वीकार करने को यह नहीं माना जा सकता कि याचिकाकर्ता ने अपने उच्च पद के अधिकार का त्याग कर दिया था।

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