हिमाचल: एआई बनेगा सरकारी दफ्तरों का नया साथी, बढ़ेगी गति और घटेगी देरी
प्रदेश में सरकारी दफ्तरों को अब एआई के रूप में नया साथी मिलने जा रहा है। इससे काम की गति बढ़ेगी और फाइलों को निपटाने में होने वाली देरी घटेगी।
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हिमाचल प्रदेश में सरकारी दफ्तरों को अब एआई के रूप में नया साथी मिलने जा रहा है। इससे काम की गति बढ़ेगी और फाइलों को निपटाने में होने वाली देरी घटेगी। प्रदेश सरकार ने विभिन्न विभागों में एआई आधारित तकनीकों के इस्तेमाल का रास्ता खोलते हुए एआई उपकरणों और सदस्यता सेवाओं की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के माध्यम से खरीद की जाएगी। सरकार का मानना है कि आने वाले समय में एआई केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था का अहम हिस्सा बनेगा।
फाइलों की जांच-पड़ताल से लेकर दस्तावेज तैयार करने, आंकड़ों के विश्लेषण, रिपोर्ट बनाने और जन शिकायतों के निपटारे तक कई कार्यों में एआई अधिकारियों और कर्मचारियों की मदद करेगा। सरकारी विभागों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में फाइलें, पत्राचार, नोटशीट और रिपोर्ट तैयार की जाती हैं। एआई टूल्स की सहायता से इन दस्तावेजों का सारांश तैयार करने, महत्वपूर्ण बिंदुओं की पहचान करने और प्रारंभिक ड्राफ्ट बनाने जैसे कार्य बेहद कम समय में पूरे हो सकेंगे। इससे अधिकारियों को निर्णय लेने में आसानी होगी और फाइलों के निपटारे की गति भी बढ़ेगी। एआई बड़े डाटा का विश्लेषण कर ऐसे निष्कर्ष और रुझान सामने ला सकता है, जिन्हें पारंपरिक तरीकों से पहचानने में काफी समय लगता है। इससे योजनाओं की निगरानी और नीति निर्माण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।
जन शिकायतों के समाधान में भी निभाएगा भूमिका
प्रदेश में विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों और शिकायत निवारण प्रणालियों के माध्यम से हजारों शिकायतें प्राप्त होती हैं। एआई आधारित सिस्टम शिकायतों को श्रेणीवार विभाजित करने, प्राथमिकता तय करने और संबंधित विभागों तक तेजी से पहुंचाने में मदद कर सकता है। इससे शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। इसके अलावा नागरिक सेवाओं की निगरानी, सेवा वितरण की गुणवत्ता का आकलन और जनता से प्राप्त फीडबैक के विश्लेषण में भी एआई की महत्वपूर्ण भूमिका रह सकती है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली विभाग को होगा लाभ
एआई तकनीक का लाभ शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, राजस्व, ग्रामीण विकास और पर्यटन जैसे विभागों को भी मिलेगा। शिक्षा विभाग में अध्ययन सामग्री तैयार करने, डेटा विश्लेषण और प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाने में इसका उपयोग होगा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में रिकॉर्ड प्रबंधन और रोग संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण में मदद मिलेगी, जबकि बिजली विभाग उपभोक्ता शिकायतों, मांग के आकलन और सेवा प्रबंधन में एआई का उपयोग कर सकता है।