{"_id":"6a5cab8c4c68dbac6204f27c","slug":"debate-erupts-registration-fee-at-regional-hospital-mandi-news-c-90-1-ssml1025-205544-2026-07-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: क्षेत्रीय अस्पताल में दस रुपये की पर्ची फीस पर छिड़ी बहस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: क्षेत्रीय अस्पताल में दस रुपये की पर्ची फीस पर छिड़ी बहस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अस्पताल की पहल को कोई सराह रहा तो कोई इसे जनहित में बता रहा बोझ
खुले दस रुपये न होने पर भी मरीजों और कर्मचारियों में हो रही तकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में ओपीडी पर्ची बनवाने के लिए दस रुपये शुल्क लागू किए जाने के बाद इस मुद्दे पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कोई इसे अस्पताल के विकास और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी कदम बता रहा है तो कुछ लोग इसे आमजन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ मान रहे हैं। इस बीच पर्ची शुल्क का विरोध करते हुए एक युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने इस बहस को और तेज कर दिया है।
वायरल वीडियो में युवक अस्पताल प्रशासन के निर्णय पर नाराजगी जताते हुए दिखाई दे रहा है। उसका कहना है कि पहले सरकारी अस्पताल में पर्ची निशुल्क बनाई जाती थी, ऐसे में अचानक दस रुपये शुल्क लागू करना जनहित में उचित नहीं है। समझाने का प्रयास किए जाने पर भी वह अन्य लोगों को बीच में न पड़ने की बात कहते हुए बहस करता नजर आता है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की बैठक में ओपीडी पर्ची के लिए दस रुपये शुल्क लेने का निर्णय लिया गया था, जिसे हाल ही में लागू किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस शुल्क से प्राप्त राशि अस्पताल के विकास कार्यों पर ही खर्च की जाएगी।
वहीं, अधिकांश लोगों ने इस निर्णय का समर्थन किया है। जय कुमार, संजय, हरीश, गिरधारी, सुनीता और कमला देवी सहित अन्य लोगों का कहना है कि जब लोग निजी अस्पतालों में केवल पर्ची बनवाने के लिए ही चार-पांच सौ रुपये तक खर्च कर देते हैं तो सरकारी अस्पताल में बेहतर सुविधाओं के लिए दस रुपये का शुल्क देना कोई बड़ी बात नहीं है।
विज्ञापन
हालांकि, शुल्क लागू होने के बाद खुले पैसे की समस्या भी सामने आने लगी है। कई बार कर्मचारियों के पास छुट्टे पैसे न होने पर मरीजों को वापस जाना पड़ रहा है, जिससे उपचार प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश ठाकुर ने बताया कि पर्ची शुल्क आरकेएस की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप ही लिया जा रहा है। इस राशि का उपयोग अस्पताल के विकास और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में किया जाएगा।
विज्ञापन
खुले दस रुपये न होने पर भी मरीजों और कर्मचारियों में हो रही तकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में ओपीडी पर्ची बनवाने के लिए दस रुपये शुल्क लागू किए जाने के बाद इस मुद्दे पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कोई इसे अस्पताल के विकास और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी कदम बता रहा है तो कुछ लोग इसे आमजन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ मान रहे हैं। इस बीच पर्ची शुल्क का विरोध करते हुए एक युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने इस बहस को और तेज कर दिया है।
वायरल वीडियो में युवक अस्पताल प्रशासन के निर्णय पर नाराजगी जताते हुए दिखाई दे रहा है। उसका कहना है कि पहले सरकारी अस्पताल में पर्ची निशुल्क बनाई जाती थी, ऐसे में अचानक दस रुपये शुल्क लागू करना जनहित में उचित नहीं है। समझाने का प्रयास किए जाने पर भी वह अन्य लोगों को बीच में न पड़ने की बात कहते हुए बहस करता नजर आता है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की बैठक में ओपीडी पर्ची के लिए दस रुपये शुल्क लेने का निर्णय लिया गया था, जिसे हाल ही में लागू किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस शुल्क से प्राप्त राशि अस्पताल के विकास कार्यों पर ही खर्च की जाएगी।
विज्ञापन
वहीं, अधिकांश लोगों ने इस निर्णय का समर्थन किया है। जय कुमार, संजय, हरीश, गिरधारी, सुनीता और कमला देवी सहित अन्य लोगों का कहना है कि जब लोग निजी अस्पतालों में केवल पर्ची बनवाने के लिए ही चार-पांच सौ रुपये तक खर्च कर देते हैं तो सरकारी अस्पताल में बेहतर सुविधाओं के लिए दस रुपये का शुल्क देना कोई बड़ी बात नहीं है।
विज्ञापन
हालांकि, शुल्क लागू होने के बाद खुले पैसे की समस्या भी सामने आने लगी है। कई बार कर्मचारियों के पास छुट्टे पैसे न होने पर मरीजों को वापस जाना पड़ रहा है, जिससे उपचार प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश ठाकुर ने बताया कि पर्ची शुल्क आरकेएस की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप ही लिया जा रहा है। इस राशि का उपयोग अस्पताल के विकास और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में किया जाएगा।