{"_id":"6a425f7409b5db6f230b3211","slug":"apple-crop-and-apple-trade-in-kotkhai-shimla-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1033-163627-2026-06-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: कोटखाई में सेब फसल में भारी गिरावट, पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र पर पड़ेगा असर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: कोटखाई में सेब फसल में भारी गिरावट, पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र पर पड़ेगा असर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम रहने की आशंका
बाहरी मजदूरों को कम मिलेगा रोजगार
पैकिंग के लिए कार्टन, ट्रे, अन्य सामग्री की भी मांग घटेगी
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। कोटखाई क्षेत्र में इस वर्ष सेब की फसल में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इससे बागवान ही नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र पर व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ने की आशंका है। प्रदेश में हर वर्ष सेब के कारोबार से लगभग 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक लेन-देन होता है, जिस पर इस गिरावट का सीधा असर पड़ेगा। बागवानों ने बताया कि इस वर्ष मौसम शुरू से ही अनुकूल नहीं रहा। फूल आने और फल बनने के समय प्रतिकूल मौसम ने फल सेटिंग को प्रभावित किया। इसके बाद कई इलाकों में ओलावृष्टि ने बची हुई फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। परिणामस्वरूप, अधिकांश बगीचों में उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम रहने की संभावना है। कोटखाई क्षेत्र के बागवान सुरेश शर्मा, भगतराम, विनोद कुमार और ज्ञान ठाकुर ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की। फसल कम होने का सबसे बड़ा आर्थिक बोझ बागवानों पर पड़ता है। हालांकि, इसका असर यहीं तक सीमित नहीं रहता। सेब उत्पादन में कमी से बागवानी पर आधारित हजारों परिवारों की आय प्रभावित होगी। सेब की तुड़ाई के लिए बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूरों को कम रोजगार मिलेगा। पैकिंग के लिए कार्टन, ट्रे और अन्य सामग्री की मांग घटेगी। ढुलाई का कार्य कम होने से ट्रांसपोर्टरों की आमदनी भी प्रभावित होगी। मंडियों में कम सेब पहुंचने से आढ़तियों और खरीदारों का कारोबार भी प्रभावित होगा। इसके अलावा, कृषि दवाइयों, उर्वरकों, उपकरणों और स्थानीय दुकानदारों की बिक्री पर भी असर पड़ने की आशंका है। बागवानों ने सरकार से प्रभावित बागवानों के लिए राहत पैकेज की मांग की है। उन्होंने कहा, यदि आने वाले वर्षों में मौसम की अनिश्चितता जारी रही, तो इसका असर पूरे ग्रामीण आर्थिक तंत्र पर पड़ेगा। बागवानों ने फसल बीमा के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। उन्होंने बागवानी क्षेत्र को मौसम संबंधी जोखिमों से बचाने के लिए दीर्घकालिक योजनाएं लागू करने की भी मांग की है।
विज्ञापन
बाहरी मजदूरों को कम मिलेगा रोजगार
पैकिंग के लिए कार्टन, ट्रे, अन्य सामग्री की भी मांग घटेगी
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। कोटखाई क्षेत्र में इस वर्ष सेब की फसल में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इससे बागवान ही नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र पर व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ने की आशंका है। प्रदेश में हर वर्ष सेब के कारोबार से लगभग 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक लेन-देन होता है, जिस पर इस गिरावट का सीधा असर पड़ेगा। बागवानों ने बताया कि इस वर्ष मौसम शुरू से ही अनुकूल नहीं रहा। फूल आने और फल बनने के समय प्रतिकूल मौसम ने फल सेटिंग को प्रभावित किया। इसके बाद कई इलाकों में ओलावृष्टि ने बची हुई फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। परिणामस्वरूप, अधिकांश बगीचों में उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम रहने की संभावना है। कोटखाई क्षेत्र के बागवान सुरेश शर्मा, भगतराम, विनोद कुमार और ज्ञान ठाकुर ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की। फसल कम होने का सबसे बड़ा आर्थिक बोझ बागवानों पर पड़ता है। हालांकि, इसका असर यहीं तक सीमित नहीं रहता। सेब उत्पादन में कमी से बागवानी पर आधारित हजारों परिवारों की आय प्रभावित होगी। सेब की तुड़ाई के लिए बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूरों को कम रोजगार मिलेगा। पैकिंग के लिए कार्टन, ट्रे और अन्य सामग्री की मांग घटेगी। ढुलाई का कार्य कम होने से ट्रांसपोर्टरों की आमदनी भी प्रभावित होगी। मंडियों में कम सेब पहुंचने से आढ़तियों और खरीदारों का कारोबार भी प्रभावित होगा। इसके अलावा, कृषि दवाइयों, उर्वरकों, उपकरणों और स्थानीय दुकानदारों की बिक्री पर भी असर पड़ने की आशंका है। बागवानों ने सरकार से प्रभावित बागवानों के लिए राहत पैकेज की मांग की है। उन्होंने कहा, यदि आने वाले वर्षों में मौसम की अनिश्चितता जारी रही, तो इसका असर पूरे ग्रामीण आर्थिक तंत्र पर पड़ेगा। बागवानों ने फसल बीमा के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। उन्होंने बागवानी क्षेत्र को मौसम संबंधी जोखिमों से बचाने के लिए दीर्घकालिक योजनाएं लागू करने की भी मांग की है।