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Rampur Bushahar News: 1.229 किलोग्राम चरस रखने का आरोपी बरी
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अदालत ने अभियोजन के दावे पर उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। विशेष न्यायाधीश-II, किन्नौर की अदालत ने 1.229 किलोग्राम चरस बरामदगी मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों में विरोधाभास और स्वतंत्र गवाहों के बयानों में असंगति के कारण यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 21 अप्रैल, 2024 को पुलिस दल ने जबली नामक स्थान पर एक बस की तलाशी ली। बस में सीट नंबर एक पर बैठे हंस राज के पास एक बैग मिला। पुलिस ने दावा किया कि बैग में 1.229 किलोग्राम चरस थी। जांच अधिकारी ने बस के चालक और परिचालक को स्वतंत्र गवाह के रूप में शामिल किया। अभियोजन पक्ष ने अपने मामले को साबित करने के लिए नौ गवाहों की जांच की।
अदालत ने पाया कि पुलिस अधिकारियों के बयानों और स्वतंत्र गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास थे। स्वतंत्र गवाह ने अभियोजन पक्ष के दावे का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि बस को जबली के बजाय सैंज के पास रोका गया था। गवाहों ने यह भी बताया कि पुलिस ने बैग को हंस राज की गोद से नहीं, बल्कि सामान रखने वाले स्थान से उठाया था। उन्होंने दावा किया कि बैग की तलाशी सैंज में नहीं, बल्कि पुलिस की ओर से उसे 5-6 किलोमीटर दूर जबली ले जाने के बाद ली गई। स्वतंत्र गवाहों के अनुसार, पुलिस दल ने हंस राज और बैग को एक छोटे वाहन में ले जाकर जबली पहुंचाया। वहां बस को फिर से रोका गया और बैग को बस के बोनट पर रखकर तलाशी ली गई। इस प्रक्रिया से बरामदगी के स्थान और तरीके पर गंभीर संदेह पैदा हुआ। अदालत ने माना कि सैंज से जबली तक बैग को ले जाने के दौरान उसमें छेड़छाड़ की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि हालांकि फोरेंसिक रिपोर्ट ने बरामद पदार्थ को चरस के रूप में पुष्टि की, लेकिन अभियोजन पक्ष इसे हंस राज से जोड़ने में विफल रहा। इन परिस्थितियों में, हंस राज को बरी कर दिया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। विशेष न्यायाधीश-II, किन्नौर की अदालत ने 1.229 किलोग्राम चरस बरामदगी मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों में विरोधाभास और स्वतंत्र गवाहों के बयानों में असंगति के कारण यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 21 अप्रैल, 2024 को पुलिस दल ने जबली नामक स्थान पर एक बस की तलाशी ली। बस में सीट नंबर एक पर बैठे हंस राज के पास एक बैग मिला। पुलिस ने दावा किया कि बैग में 1.229 किलोग्राम चरस थी। जांच अधिकारी ने बस के चालक और परिचालक को स्वतंत्र गवाह के रूप में शामिल किया। अभियोजन पक्ष ने अपने मामले को साबित करने के लिए नौ गवाहों की जांच की।
अदालत ने पाया कि पुलिस अधिकारियों के बयानों और स्वतंत्र गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास थे। स्वतंत्र गवाह ने अभियोजन पक्ष के दावे का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि बस को जबली के बजाय सैंज के पास रोका गया था। गवाहों ने यह भी बताया कि पुलिस ने बैग को हंस राज की गोद से नहीं, बल्कि सामान रखने वाले स्थान से उठाया था। उन्होंने दावा किया कि बैग की तलाशी सैंज में नहीं, बल्कि पुलिस की ओर से उसे 5-6 किलोमीटर दूर जबली ले जाने के बाद ली गई। स्वतंत्र गवाहों के अनुसार, पुलिस दल ने हंस राज और बैग को एक छोटे वाहन में ले जाकर जबली पहुंचाया। वहां बस को फिर से रोका गया और बैग को बस के बोनट पर रखकर तलाशी ली गई। इस प्रक्रिया से बरामदगी के स्थान और तरीके पर गंभीर संदेह पैदा हुआ। अदालत ने माना कि सैंज से जबली तक बैग को ले जाने के दौरान उसमें छेड़छाड़ की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि हालांकि फोरेंसिक रिपोर्ट ने बरामद पदार्थ को चरस के रूप में पुष्टि की, लेकिन अभियोजन पक्ष इसे हंस राज से जोड़ने में विफल रहा। इन परिस्थितियों में, हंस राज को बरी कर दिया गया।
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