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Rampur Bushahar News: दलाश में वूली एफिड से सेब पर संकट, पौधों में दिख रही सफेद रूई
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दलाश में वूली एफिड बीमारी की चपेट में आए सेब के पौधे: संवाद
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पत्तियों को पहुंच रहा है नुकसान, उत्पादन को करेगी प्रभावित
बागवानों ने समस्या के समाधान की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
दलाश (कुल्लू)। दलाश और आसपास के सेब बगीचों में इन दिनों वूली एफिड रोग तेजी से फैल रहा है। इस रोग के कारण सेब की फसल पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिससे बागवान चिंतित हैं। सेब के पौधों में सफेद रूई दिखाई दे रही है, जिससे पत्तियों को नुकसान पहुंचा रहा है। इससे इस साल सेब के उत्पादन के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। यह रोग सेब के पौधों को रस छोड़ने पर मजबूर करता है और उनके विकास को रोक देता है। इससे सेब पर रेस्टिंग का खतरा बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर फल की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ता है। इस वर्ष क्षेत्र में सेब की फसल पहले से ही कम है। ऐसे में यह रोग बागवानों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। वूली एफिड रात के समय बड़ी संख्या में पौधों पर हमला कर पत्तियों को क्षतिग्रस्त कर देते हैं। बीटल कीट भी पत्तियों को चटकर प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। दलाश क्षेत्र के लिए सेब एक प्रमुख नकदी फसल है, जिस पर यहां के लोगों की आजीविका निर्भर करती है। बागवान विनोद शर्मा, सुभाष, सुनील, कैलाश, देवराज चौहान, बालकृष्ण भारती, योग राज और हरविंद्र शर्मा सहित अन्य ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने विभाग से इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने और उचित दिशा-निर्देश देने का आग्रह किया है।
बागवान को स्प्रे करना चाहिए
बागवानी विभाग आनी के एसएमएस बलवीर चौहान ने रोकथाम के उपाय बताए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सेब का आकार अखरोट के बराबर है, तो स्प्रे करना चाहिए। किसानों को डेढ़ लीटर एचएमओ और आधा लीटर नीम तेल का मिश्रण बनाना चाहिए। इस घोल को एक ड्रम में तैयार कर पौधों पर स्प्रे करने की सलाह दी गई है।
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बागवानों ने समस्या के समाधान की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
दलाश (कुल्लू)। दलाश और आसपास के सेब बगीचों में इन दिनों वूली एफिड रोग तेजी से फैल रहा है। इस रोग के कारण सेब की फसल पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिससे बागवान चिंतित हैं। सेब के पौधों में सफेद रूई दिखाई दे रही है, जिससे पत्तियों को नुकसान पहुंचा रहा है। इससे इस साल सेब के उत्पादन के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। यह रोग सेब के पौधों को रस छोड़ने पर मजबूर करता है और उनके विकास को रोक देता है। इससे सेब पर रेस्टिंग का खतरा बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर फल की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ता है। इस वर्ष क्षेत्र में सेब की फसल पहले से ही कम है। ऐसे में यह रोग बागवानों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। वूली एफिड रात के समय बड़ी संख्या में पौधों पर हमला कर पत्तियों को क्षतिग्रस्त कर देते हैं। बीटल कीट भी पत्तियों को चटकर प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। दलाश क्षेत्र के लिए सेब एक प्रमुख नकदी फसल है, जिस पर यहां के लोगों की आजीविका निर्भर करती है। बागवान विनोद शर्मा, सुभाष, सुनील, कैलाश, देवराज चौहान, बालकृष्ण भारती, योग राज और हरविंद्र शर्मा सहित अन्य ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने विभाग से इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने और उचित दिशा-निर्देश देने का आग्रह किया है।
बागवान को स्प्रे करना चाहिए
बागवानी विभाग आनी के एसएमएस बलवीर चौहान ने रोकथाम के उपाय बताए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सेब का आकार अखरोट के बराबर है, तो स्प्रे करना चाहिए। किसानों को डेढ़ लीटर एचएमओ और आधा लीटर नीम तेल का मिश्रण बनाना चाहिए। इस घोल को एक ड्रम में तैयार कर पौधों पर स्प्रे करने की सलाह दी गई है।
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