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Sirmour News: अदालत 3
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पत्नी और नाबालिग बेटे को हर माह
2,500-2,500 रुपये गुजारा भत्ता मिलेगा
- फैमिली कोर्ट का आदेश, पति को देना होगा भरण-पोषण का खर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। फैमिली कोर्ट ने पति को पत्नी और नाबालिग बेटे को अंतरिम गुजारा भत्ता देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति की है और वह इससे बच नहीं सकता। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कपिल शर्मा ने आदेश दिया कि पति मुस्तफा अपनी पत्नी दिलसैना और बेटे को 2,500-2,500 प्रति माह अंतरिम गुजारा भत्ता देगा। यह राशि याचिका दायर होने की तारीख से मुख्य मामले के अंतिम निर्णय तक देनी होगी।
पीड़ित महिला ने अदालत में बताया कि शादी के कुछ समय बाद पति का व्यवहार बदल गया और वह मारपीट व मानसिक प्रताड़ना करने लगा। आरोप है कि कई बार दहेज की मांग को लेकर झगड़े हुए और एक बार उसे जलाने की कोशिश भी की गई। 14 मार्च 2022 की घटना के बाद पुलिस थाना माजरा में मामला दर्ज हुआ और पति के खिलाफ आईपीसी की धारा 498-ए, 323 व 34 के तहत एफआईआर भी दर्ज की गई।
यह भी आरोप लगाया कि पति ने साल 2025 को दूसरी शादी कर ली और बाद में उसे ट्रिपल तलाक देने की बात कही। इस मामले में भी पुलिस में शिकायत दर्ज हुई और मुस्लिम महिला (विवाह के अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया गया। पति ने दलील दी कि वह हमेशा से पत्नी को अपने पास रखना और उसका भरण-पोषण करना चाहते थे, लेकिन याचिकाकर्ता का परिवार चाहता था कि वह घरजवांई बनकर रहें। प्रतिवादी ने तलाक की धमकियों और क्रूरता एवं मानसिक यातना के आरोपों से इन्कार किया है।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता फिलहाल अपने मायके में रह रही है और उसकी आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। वहीं उसका पति मजदूरी करता है। इसलिए वह भरण-पोषण के लिए कुछ राशि देने में सक्षम है।
संवाद
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2,500-2,500 रुपये गुजारा भत्ता मिलेगा
- फैमिली कोर्ट का आदेश, पति को देना होगा भरण-पोषण का खर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। फैमिली कोर्ट ने पति को पत्नी और नाबालिग बेटे को अंतरिम गुजारा भत्ता देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति की है और वह इससे बच नहीं सकता। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कपिल शर्मा ने आदेश दिया कि पति मुस्तफा अपनी पत्नी दिलसैना और बेटे को 2,500-2,500 प्रति माह अंतरिम गुजारा भत्ता देगा। यह राशि याचिका दायर होने की तारीख से मुख्य मामले के अंतिम निर्णय तक देनी होगी।
पीड़ित महिला ने अदालत में बताया कि शादी के कुछ समय बाद पति का व्यवहार बदल गया और वह मारपीट व मानसिक प्रताड़ना करने लगा। आरोप है कि कई बार दहेज की मांग को लेकर झगड़े हुए और एक बार उसे जलाने की कोशिश भी की गई। 14 मार्च 2022 की घटना के बाद पुलिस थाना माजरा में मामला दर्ज हुआ और पति के खिलाफ आईपीसी की धारा 498-ए, 323 व 34 के तहत एफआईआर भी दर्ज की गई।
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यह भी आरोप लगाया कि पति ने साल 2025 को दूसरी शादी कर ली और बाद में उसे ट्रिपल तलाक देने की बात कही। इस मामले में भी पुलिस में शिकायत दर्ज हुई और मुस्लिम महिला (विवाह के अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया गया। पति ने दलील दी कि वह हमेशा से पत्नी को अपने पास रखना और उसका भरण-पोषण करना चाहते थे, लेकिन याचिकाकर्ता का परिवार चाहता था कि वह घरजवांई बनकर रहें। प्रतिवादी ने तलाक की धमकियों और क्रूरता एवं मानसिक यातना के आरोपों से इन्कार किया है।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता फिलहाल अपने मायके में रह रही है और उसकी आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। वहीं उसका पति मजदूरी करता है। इसलिए वह भरण-पोषण के लिए कुछ राशि देने में सक्षम है।
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