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Sirmour News: समुद्री नौकरी का हवाला भी नहीं आया काम
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कोर्ट ने आदेश को वापस लेने की मांग ठुकराई
-कोर्ट ने पति को संपत्ति और देनदारियों का हलफनामा दाखिल करने के दिए थे आदेश, खारिज की अर्जी
- कई मौके मिलने के बाद भी नहीं दिया संपत्ति का हलफनामा, 25 मार्च को अंतिम आदेश पर सुनवाई
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। फैमिली कोर्ट ने वैवाहिक विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें व्यक्ति ने अदालत से पहले के आदेश को वापस लेने की मांग की थी। अदालत ने साफ कहा कि पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद यदि पक्षकार जरूरी दस्तावेज दाखिल नहीं करता, तो अदालत कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र है।
यह मामला महाराष्ट्र के जिला के रायगढ़ निवासी सन जोत सिंह सोहल और उसकी पत्नी जसविंद्र कौर सैनी का है। पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक और भरण-पोषण की मांग की थी। अदालत में कार्यवाही के दौरान पति को अपनी आय, संपत्ति और देनदारियों का हलफनामा दाखिल करने के लिए कई मौके दिए गए थे। इसके बावजूद 17 नवंबर 2025 तक वह हलफनामा पेश नहीं कर पाया। इसके बाद अदालत ने उसका अधिकार बंद कर दिया था।
अब पति ने आवेदन देकर कहा कि वह समुद्री जहाज पर नाविक के रूप में कार्यरत है और 2 अगस्त 2025 से जहाज पर होने के कारण भारत नहीं आ सका। उसने अदालत से आदेश वापस लेने और भारत लौटने पर हलफनामा दाखिल करने की अनुमति देने की मांग की, लेकिन पत्नी ने इस आवेदन का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि पति जानबूझकर मामले को लंबा खींच रहा है और भरण-पोषण से बचने की कोशिश कर रहा है।
-- अदालत ने दलील को माना असंतोषजनक
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कपिल शर्मा ने कहा कि प्रतिवादी को पहले ही पर्याप्त अवसर दिए जा चुके थे। केवल यह कहना कि वह समुद्री नौकरी में है, हलफनामा दाखिल न करने का पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि मामले को अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता, क्योंकि इससे याचिकाकर्ता को परेशानी होगी। इसी आधार पर पति की अर्जी को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया गया। अब भरण-पोषण से जुड़ी याचिका पर अंतिम आदेश के लिए मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
संवाद
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-कोर्ट ने पति को संपत्ति और देनदारियों का हलफनामा दाखिल करने के दिए थे आदेश, खारिज की अर्जी
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दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। फैमिली कोर्ट ने वैवाहिक विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें व्यक्ति ने अदालत से पहले के आदेश को वापस लेने की मांग की थी। अदालत ने साफ कहा कि पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद यदि पक्षकार जरूरी दस्तावेज दाखिल नहीं करता, तो अदालत कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र है।
यह मामला महाराष्ट्र के जिला के रायगढ़ निवासी सन जोत सिंह सोहल और उसकी पत्नी जसविंद्र कौर सैनी का है। पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक और भरण-पोषण की मांग की थी। अदालत में कार्यवाही के दौरान पति को अपनी आय, संपत्ति और देनदारियों का हलफनामा दाखिल करने के लिए कई मौके दिए गए थे। इसके बावजूद 17 नवंबर 2025 तक वह हलफनामा पेश नहीं कर पाया। इसके बाद अदालत ने उसका अधिकार बंद कर दिया था।
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अब पति ने आवेदन देकर कहा कि वह समुद्री जहाज पर नाविक के रूप में कार्यरत है और 2 अगस्त 2025 से जहाज पर होने के कारण भारत नहीं आ सका। उसने अदालत से आदेश वापस लेने और भारत लौटने पर हलफनामा दाखिल करने की अनुमति देने की मांग की, लेकिन पत्नी ने इस आवेदन का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि पति जानबूझकर मामले को लंबा खींच रहा है और भरण-पोषण से बचने की कोशिश कर रहा है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कपिल शर्मा ने कहा कि प्रतिवादी को पहले ही पर्याप्त अवसर दिए जा चुके थे। केवल यह कहना कि वह समुद्री नौकरी में है, हलफनामा दाखिल न करने का पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि मामले को अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता, क्योंकि इससे याचिकाकर्ता को परेशानी होगी। इसी आधार पर पति की अर्जी को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया गया। अब भरण-पोषण से जुड़ी याचिका पर अंतिम आदेश के लिए मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
संवाद