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Una News: तेज सफेद लाइट से सड़कों पर बढ़ा जोखिम
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रात के समय हादसों का रहता है खतरा, सफेद लाइट से आंखों के आगे कुछ नहीं दिखता
संवाद न्यूज एजेंसी
नंदपुर (ऊना)। जिले की सड़कों पर रात के समय वाहन चलाना लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है। तेज रफ्तार वाहनों में हाई बीम लाइट का अंधाधुंध इस्तेमाल और अवैध रूप से कराई गई मॉडिफाइड व्हाइट लाइट सड़क हादसों की बड़ी वजह बनती जा रही है। कुछ सेकंड के लिए सामने वाले चालक की आंखों की रोशनी प्रभावित हो जाने से वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
अंब से ऊना के बीच नियमित रूप से सफर करने वाले दीपक राणा, जो पेशे से क्लीनिक संचालक हैं, बताते हैं कि तेज रोशनी के कारण कई बार सड़क पर आगे कुछ भी दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में वाहन चलाना बेहद खतरनाक हो जाता है और कई बार गाड़ी रोकना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
वहीं, गगरेट से बड़ूही प्रतिदिन यात्रा करने वाले बैंक मैनेजर अतुल कुमार का कहना है कि तेज सफेद लाइट और खतरनाक ओवरटेकिंग के चलते मानसिक दबाव के साथ सफर करना पड़ता है। सुरक्षा को प्राथमिकता देने के कारण कई बार देर रात तक घर पहुंचना पड़ता है।
चिंतपूर्णी निवासी गौरव कुमार ने चिंता जताते हुए कहा कि मॉडिफाइड व्हाइट लाइट से लैस वाहन आम लोगों की जान के लिए खतरा बन चुके हैं। सामने से तेज रोशनी पड़ते ही कुछ पलों के लिए सड़क पूरी तरह से गायब हो जाती है, जिससे हादसा होना लगभग तय सा लगता है।
वहीं, पंजोआ निवासी पुनीत कुमार ने कहा कि हर सफर डर के साए में सफर करना पड़ता है। ग्रामीण सड़कों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों तक हालात एक जैसे बने हुए हैं। यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस संदर्भ में जिला पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) सचिन हीरेमठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वाहनों में किसी भी प्रकार का अवैध संशोधन (मॉडिफिकेशन) कराना मोटर वाहन अधिनियम के तहत गैरकानूनी है। जैसे ही ऐसे मामलों से संबंधित आंकड़े उपलब्ध होंगे, नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि इस कारण हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नंदपुर (ऊना)। जिले की सड़कों पर रात के समय वाहन चलाना लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है। तेज रफ्तार वाहनों में हाई बीम लाइट का अंधाधुंध इस्तेमाल और अवैध रूप से कराई गई मॉडिफाइड व्हाइट लाइट सड़क हादसों की बड़ी वजह बनती जा रही है। कुछ सेकंड के लिए सामने वाले चालक की आंखों की रोशनी प्रभावित हो जाने से वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
अंब से ऊना के बीच नियमित रूप से सफर करने वाले दीपक राणा, जो पेशे से क्लीनिक संचालक हैं, बताते हैं कि तेज रोशनी के कारण कई बार सड़क पर आगे कुछ भी दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में वाहन चलाना बेहद खतरनाक हो जाता है और कई बार गाड़ी रोकना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
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वहीं, गगरेट से बड़ूही प्रतिदिन यात्रा करने वाले बैंक मैनेजर अतुल कुमार का कहना है कि तेज सफेद लाइट और खतरनाक ओवरटेकिंग के चलते मानसिक दबाव के साथ सफर करना पड़ता है। सुरक्षा को प्राथमिकता देने के कारण कई बार देर रात तक घर पहुंचना पड़ता है।
चिंतपूर्णी निवासी गौरव कुमार ने चिंता जताते हुए कहा कि मॉडिफाइड व्हाइट लाइट से लैस वाहन आम लोगों की जान के लिए खतरा बन चुके हैं। सामने से तेज रोशनी पड़ते ही कुछ पलों के लिए सड़क पूरी तरह से गायब हो जाती है, जिससे हादसा होना लगभग तय सा लगता है।
वहीं, पंजोआ निवासी पुनीत कुमार ने कहा कि हर सफर डर के साए में सफर करना पड़ता है। ग्रामीण सड़कों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों तक हालात एक जैसे बने हुए हैं। यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस संदर्भ में जिला पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) सचिन हीरेमठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वाहनों में किसी भी प्रकार का अवैध संशोधन (मॉडिफिकेशन) कराना मोटर वाहन अधिनियम के तहत गैरकानूनी है। जैसे ही ऐसे मामलों से संबंधित आंकड़े उपलब्ध होंगे, नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि इस कारण हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।