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Una News: आलू की खेती से हाथ खींच रहे छोटे किसान, घाटे ने बदला रुख

Thu, 20 Aug 2026 07:55 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Thu, 20 Aug 2026 07:55 AM IST
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Small farmers are backing away from potato cultivation; losses have changed their stance.
ऊना। जिले में छोटे किसान इस बार आलू की खेती से हाथ खींचने की तैयारी में हैं। बीते वर्षों में आलू की फसल के बेहद कम दाम मिलने से किसानों को हुए नुकसान का असर अब इसकी बिजाई पर दिखाई देने लगा है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में बीज, खाद, दवाइयों, सिंचाई और मजदूरी समेत काफी खर्च आता है लेकिन मंडी में उचित दाम नहीं मिलने से कई बार लागत तक वापस नहीं आ पाती। ऐसे में इस बार कई छोटे किसान आलू के बजाय दूसरी सब्जियों की खेती या सीधे गेहूं की बिजाई करने का मन बना रहे हैं।
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जिले में आलू की फसल की बिजाई सितंबर से नवंबर के मध्य की जाती है। करीब 2000 हेक्टेयर जमीन पर तैयार होने वाली यह फसल दो से ढाई माह में तैयार हो जाती है। किसानों के मुताबिक आलू की खेती में मेहनत और लागत दोनों अधिक हैं। इसके बावजूद पिछले वर्ष कई बार फसल के दाम गिरकर करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। ऐसे में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। किसानों का कहना है कि अच्छी आय हासिल करने के लिए आलू का भाव कम से कम 1500 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। इससे कम दाम मिलने पर छोटे किसानों के लिए फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।
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किसानों के अनुसार आलू की खेती में मौसम की मार का भी खतरा रहता है। फसल तैयार होने के बाद यदि बाजार में मांग कमजोर हो या एक साथ अधिक मात्रा में आलू पहुंच जाए तो दाम तेजी से गिर जाते हैं।
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किसान तरसेम लाल ने कहा कि आलू की खेती में खर्च लगातार बढ़ रहा है लेकिन फसल का दाम उस हिसाब से नहीं मिलता। पिछले साल कम भाव मिलने से काफी नुकसान हुआ था। कई बार तो फसल बेचने के बाद भी बीज, खाद और मजदूरी का पूरा खर्च वापस नहीं आया। इस बार वह आलू की जगह दूसरी सब्जियों की खेती करने पर विचार कर रहे हैं।


किसान यशविंद्र सिंह ने कहा कि आलू की अच्छी फसल होने के बावजूद यदि बाजार में 500 से 1000 रुपये क्विंटल तक ही भाव मिले तो किसान के हाथ कुछ नहीं आता। छोटे किसान के लिए कम से कम 1500 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव जरूरी है। बीते वर्षों में हुए नुकसान को देखते हुए इस बार वह आलू की बिजाई कम करने और गेहूं की फसल की ओर रुख करने की तैयारी में हैं।



उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि आलू की फसल के मंडियों में दाम तय नहीं रहते। काफी हद तक मंडियों में फसल की आमद ही दाम तय करती है। मंडियों में ऊना का आलू सबसे पहले पहुंचता है। इससे शुरुआत में अच्छे दाम मिलने की अधिक संभावना रहती है।
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