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Una News: चौकीमन्यार कॉलेज को बंद करने के फैसले पर विद्यार्थियों, अभिभावकों में रोष
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 25 Feb 2026 07:59 AM IST
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जोल (ऊना)। राजकीय महाविद्यालय चौकीमन्यार को बंद करने के सरकार के निर्णय से विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों में रोष है। विशेष रूप से छात्राओं और उनके अभिभावकों ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की। उनका कहना है कि यह कॉलेज आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए उच्च शिक्षा का सुरक्षित और सुलभ माध्यम रहा है। इसे बंद करना क्षेत्र के शैक्षणिक भविष्य के साथ अन्याय होगा।
राजकीय महाविद्यालय चौकीमन्यार की स्थापना वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा की गई थी। उस समय क्षेत्र में उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण छात्र-छात्राओं को ऊना और अंब जैसे दूरस्थ स्थानों पर जाना पड़ता था। उन्हें प्रतिदिन लगभग 35 से 40 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी, जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले परिवारों के लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से चुनौतीपूर्ण था। कॉलेज का अपना भवन न होने के कारण प्रारंभ में इसका संचालन स्थानीय स्कूल भवन में किया गया। वर्षों बाद भी कॉलेज की स्वयं की इमारत नहीं बन पाई है लेकिन इसके बावजूद यहां नियमित रूप से शिक्षण कार्य जारी रहा और क्षेत्र के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को इसका लाभ मिला।
अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने चिंतपूर्णी क्षेत्र के विधायक सुदर्शन सिंह बबलू तथा प्रदेश सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह महाविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि ग्रामीण बेटियों के सपनों और आत्मनिर्भरता का आधार है। यदि इसे बंद किया गया तो आने वाले समय में कई छात्राएं शिक्षा से वंचित रह सकती हैं। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे।
97 विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इस महाविद्यालय में कुल 97 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया जिनमें ज्यादा संख्या में छात्राएं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संख्या भले ही कम प्रतीत होती हो लेकिन ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों को देखते हुए यह कॉलेज क्षेत्र की बेटियों के लिए आशा का केंद्र बना हुआ है। कई छात्र-छात्राएं 15 से 20 किलोमीटर की दूरी तय कर यहां पढ़ने पहुंचते हैं। वर्ष 2025-26 में 20 ऐसे छात्र-छात्राओं को निशुल्क प्रवेश दिया गया है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संबंधित हैं। ऐसे परिवारों के लिए दूर स्थित कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च उठाना कठिन होगा।
यह कॉलेज घर के काफी नजदीक है जिससे समय पर घर पहुंच जाती हूं। दूर कॉलेज होने पर परिवहन की समस्या, समय की बर्बादी और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ जाती हैं। कई अभिभावक अपनी बेटियों को दूर भेजने के लिए तैयार नहीं होते।
- तमन्ना शर्मा, बीए प्रथम वर्ष
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कॉलेज की स्थापना इसलिए की गई थी क्योंकि इस क्षेत्र में लड़कियों की उच्च शिक्षा की दर बेहद कम थी। कॉलेज खुलने के बाद छात्राओं की संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है। यदि कॉलेज बंद किया गया तो यह क्षेत्र के शैक्षणिक विकास के लिए बड़ा झटका होगा।
-अंकित शर्मा, बीकॉम तृतीय वर्ष
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कॉलेज की अपनी इमारत न होने के बावजूद यहां शिक्षा का वातावरण अच्छा है। यदि सरकार स्थायी भवन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराए तो भविष्य में छात्राओं की संख्या और बढ़ सकती है। कॉलेज को बंद करने के बजाय इसे मजबूत किया जाए।
-शालिनी धीमान, बीए प्रथम वर्ष
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राजकीय महाविद्यालय चौकीमन्यार की स्थापना वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा की गई थी। उस समय क्षेत्र में उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण छात्र-छात्राओं को ऊना और अंब जैसे दूरस्थ स्थानों पर जाना पड़ता था। उन्हें प्रतिदिन लगभग 35 से 40 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी, जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले परिवारों के लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से चुनौतीपूर्ण था। कॉलेज का अपना भवन न होने के कारण प्रारंभ में इसका संचालन स्थानीय स्कूल भवन में किया गया। वर्षों बाद भी कॉलेज की स्वयं की इमारत नहीं बन पाई है लेकिन इसके बावजूद यहां नियमित रूप से शिक्षण कार्य जारी रहा और क्षेत्र के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को इसका लाभ मिला।
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अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने चिंतपूर्णी क्षेत्र के विधायक सुदर्शन सिंह बबलू तथा प्रदेश सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह महाविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि ग्रामीण बेटियों के सपनों और आत्मनिर्भरता का आधार है। यदि इसे बंद किया गया तो आने वाले समय में कई छात्राएं शिक्षा से वंचित रह सकती हैं। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे।
97 विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इस महाविद्यालय में कुल 97 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया जिनमें ज्यादा संख्या में छात्राएं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संख्या भले ही कम प्रतीत होती हो लेकिन ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों को देखते हुए यह कॉलेज क्षेत्र की बेटियों के लिए आशा का केंद्र बना हुआ है। कई छात्र-छात्राएं 15 से 20 किलोमीटर की दूरी तय कर यहां पढ़ने पहुंचते हैं। वर्ष 2025-26 में 20 ऐसे छात्र-छात्राओं को निशुल्क प्रवेश दिया गया है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संबंधित हैं। ऐसे परिवारों के लिए दूर स्थित कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च उठाना कठिन होगा।
यह कॉलेज घर के काफी नजदीक है जिससे समय पर घर पहुंच जाती हूं। दूर कॉलेज होने पर परिवहन की समस्या, समय की बर्बादी और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ जाती हैं। कई अभिभावक अपनी बेटियों को दूर भेजने के लिए तैयार नहीं होते।
- तमन्ना शर्मा, बीए प्रथम वर्ष
कॉलेज की स्थापना इसलिए की गई थी क्योंकि इस क्षेत्र में लड़कियों की उच्च शिक्षा की दर बेहद कम थी। कॉलेज खुलने के बाद छात्राओं की संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है। यदि कॉलेज बंद किया गया तो यह क्षेत्र के शैक्षणिक विकास के लिए बड़ा झटका होगा।
-अंकित शर्मा, बीकॉम तृतीय वर्ष
कॉलेज की अपनी इमारत न होने के बावजूद यहां शिक्षा का वातावरण अच्छा है। यदि सरकार स्थायी भवन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराए तो भविष्य में छात्राओं की संख्या और बढ़ सकती है। कॉलेज को बंद करने के बजाय इसे मजबूत किया जाए।
-शालिनी धीमान, बीए प्रथम वर्ष