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Una News: अहोई अष्टमी का व्रत कल, तारों के दर्शन कर खोलेंगी माताएं व्रत
Sat, 31 Oct 2026 12:27 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 31 Oct 2026 12:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी घनारी (ऊना)। संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाने वाला अहोई अष्टमी का पर्व एक नवंबर रविवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।
इस दिन माताएं अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य और खुशहाल जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखेंगी और विधि-विधान से अहोई माता की पूजा-अर्चना करेंगी।
कैलाश नगर नकड़ोह के पंडित संदीप शर्मा ने बताया कि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि एक नवंबर को दोपहर 2:51 बजे शुरू होगी और दो नवंबर को दोपहर 1:10 बजे समाप्त होगी।
अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:36 से 6:54 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि माताएं शुभ मुहूर्त में अहोई माता की पूजा कर व्रत कथा का श्रवण और पाठ करेंगी।
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इसके बाद रात्रि में तारों के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाएगा और संतान की सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत खोला जाएगा। करवा चौथ के विपरीत अहोई अष्टमी पर चंद्रमा के बजाय तारों को अर्घ्य देने की परंपरा है।
पंडित संदीप शर्मा ने बताया कि इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और अहोई माता की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा पूर्वक व्रत और पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
संतान के जीवन की बाधाएं दूर होने और उसकी उन्नति की कामना के साथ माताएं इस पर्व को पूरे श्रद्धाभाव से मनाती हैं।
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इस दिन माताएं अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य और खुशहाल जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखेंगी और विधि-विधान से अहोई माता की पूजा-अर्चना करेंगी।
कैलाश नगर नकड़ोह के पंडित संदीप शर्मा ने बताया कि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि एक नवंबर को दोपहर 2:51 बजे शुरू होगी और दो नवंबर को दोपहर 1:10 बजे समाप्त होगी।
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अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:36 से 6:54 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि माताएं शुभ मुहूर्त में अहोई माता की पूजा कर व्रत कथा का श्रवण और पाठ करेंगी।
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इसके बाद रात्रि में तारों के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाएगा और संतान की सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत खोला जाएगा। करवा चौथ के विपरीत अहोई अष्टमी पर चंद्रमा के बजाय तारों को अर्घ्य देने की परंपरा है।
पंडित संदीप शर्मा ने बताया कि इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और अहोई माता की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा पूर्वक व्रत और पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
संतान के जीवन की बाधाएं दूर होने और उसकी उन्नति की कामना के साथ माताएं इस पर्व को पूरे श्रद्धाभाव से मनाती हैं।