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8th Pay Commission: क्या इतनी बढ़ेगी कर्मियों की सेलरी/पेंशन? JCM ने वेतन आयोग की चेयरमैन को सौंपी ये रिपोर्ट

Thu, 30 Apr 2026 09:31 PM IST
Jitendra Bhardwaj Jitendra Bhardwaj
Updated Thu, 30 Apr 2026 09:31 PM IST
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8th Pay Commission: How Much Will Salaries and Pensions Rise? JCM Submits Report to Pay Panel Chairperson
8th pay Commission - फोटो : Amar Ujala
केंद्रीय कर्मचारियों के विभिन्न मुद्दों को उठाने वाली सर्वोच्च संस्था 'नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) की जेसीएम ने आठवें वेतन आयोग के साथ बैठक कर आयोग की चेयरमैन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें वेतन, पेंशन और कर्मचारियों के हितों से जुड़े दूसरे मुद्दे शामिल हैं। बेसिक सैलरी '69000' करने के अलावा जेसीएम द्वारा 8वें वेतन आयोग को वार्षिक वेतन वृद्धि, मूल वेतन का 6 प्रतिशत  रहे और वर्तमान कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों के लिए फिटमेंट फैक्टर 3.833 किया जाए, आदि बातें रिपोर्ट का हिस्सा बनी हैं। जस्टिस देसाई ने जेसीएम के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया है कि स्टाफ साइड को अपनी बात रखने के लिए और समय दिया जाएगा। आयोग को कर्मियों की फेडरेशन/एसोसिएशन भी अपने सुझाव दे सकती हैं। आयोग, कुछ यूनिटों में दौरा कर स्पॉट स्टडी करेगा। जेसीएम की तरफ से जो मांग उठाई गई हैं, उन पर निष्पक्ष तरीके से विचार होगा।  
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जेसीएम की बैठक में ये प्रतिनिधि हुए शामिल 
आठवें वेतन आयोग के साथ मंगलवार को हुई बैठक में 'नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) की जेसीएम की तरफ से सचिव शिव गोपाल मिश्रा, नेता एम. राघवैया, सदस्य जेआर भोसले, गुमान सिंह, सी. श्रीकुमार, रूपक सरकार, तपास बोस, पीयू खड़से और बीसी शर्मा मौजूद रहे। वेतन आयोग की चेयरमैन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई, मेंबर पार्ट टाइम प्रो. पुलक घोष और सदस्य सचिव पंकज जैन ने जेसीएम के प्रतिनिधियों की बातों को गौर से सुना। शिव गोपाल मिश्रा के मुताबिक, समय की कमी के चलते ये रिपोर्ट तैयार की गई है। आने वाले दिनों में जेसीएम अपने कर्मियों के साथ आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर गहराई से चर्चा करेगी। जो नई बातें सामने आएंगी, उन्हें लेकर आयोग में 'सप्लीमेंट्री मेमोरंडम' जमा कराया जाएगा। वेतन आयोग ने मेमोरेंडम पत्र जमा करने की अंतिम तिथि को 30 अप्रैल से बढ़ाकर 31 मई कर दिया है। 
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न्यूनतम वेतन: 
  • जेसीएम ने अपनी रिपोर्ट में न्यूनतम वेतन 69 हजार रुपये करने की मांग की है। आईसीएमआर ने 3490के/केलोरी प्रतिदिन की सिफारिश की है। 
  • पेरेंट्स सहित परिवार को 5 यूनिट फेमिली माना जाए। 
फिटमेंट फैक्टर: 
  • मौजूदा कर्मियों और पेंशनरों को फायदा हो, इसके लिए फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.833 किया जाए। फिटमेंट फैक्टर के आधार पर मूल वेतन तय होती है। 
  • मर्जर ऑफ पे स्केल: 
  • पे स्केल की संख्या को घटाकर मर्जर ऑफ पे स्केल पर जोर दिया गया है। आठवें वेतन आयोग में सभी श्रेणियों के लिए शैक्षणिक योग्यता, स्किल की मांग, अनुभव व एक्सपोजर आदि को तव्वजो दी जाए। 
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रेट ऑफ इंक्रीमेंट: 
  • मूल वेतन पर वार्षिक वेतन वृद्धि 6 प्रतिशत रहे। सभी भत्तों में तीन गुना वृद्धि हो और उन्हें महंगाई भत्ता (डीए) वृद्धि से जोड़ा जाए।
  पदोन्नति/एसीपी: 
  • 30 वर्षों की सेवा में न्यूनतम पांच टाइमस्केल पदोन्नति/वित्तीय उन्नयन/एसीपी मिले। कैडर रिव्यू में देरी के मुद्दे को ध्यान में रखा जाए। वेतन निर्धारण के लिए पदोन्नति के दौरान दो वेतन वृद्धि प्रदान करें। 
अग्रिम: 
  • सभी अग्रिम ब्याज मुक्त हों। मृत्यु की स्थिति में टर्मिनल लाभों से कोई वसूली नहीं की जाए। सभी कर्मचारियों को चार पहिया वाहन अग्रिम दिया जाए। त्योहार और प्राकृतिक आपदा एडवांस दोबारा से प्रारंभ हो 

छुट्टियां: 
संचित अर्ध-वेतन अवकाश का पूर्ण नकदीकरण हो। बिना किसी सीमा के ईएल (अस्थायी अवकाश) का संचय और 600 दिन तक का नकदीकरण। सेवा में रहते हुए ईएल का 50% नकदीकरण। संचित अर्ध-वेतन अवकाश का पूर्ण नकदीकरण। एचपीएल (अस्थायी अवकाश) की गणना चिकित्सा प्रमाण पत्र के बिना पूर्ण वेतन पर की जाए। पूरी सेवा अवधि में 60 दिन का अभिभावक देखभाल अवकाश। डब्लूआरआईएल, ईएल और एचपीएल से कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत मुआवजे की वसूली डब्लूआरआईएल के दौरान जमा नहीं की जानी चाहिए। एक महीने में देर से आने पर संचयी रूप से 120 मिनट की गणना करके आधे दिन की छुट्टी रिक्वर न हो। 

ड्यूटी के दौरान दुर्घटना:  
ड्यूटी के दौरान दुर्घटनाओं में शहीद हुए कर्मचारियों के लिए 2 करोड़ रुपये का मुआवजा। करुणामय नियुक्ति सौ प्रतिशत हो। इस पर लगी पांच फीसदी की सीमा को खत्म किया जाए। बोनस सीलिंग खत्म की जाए। यह बेसिक पे और डीए पर आधारित हो। 


पेंशन: 
एक जनवरी 2004 या उसके बाद भर्ती कर्मचारियों के लिए 'पुरानी पेंशन' योजना की बहाली हो। एनपीएस और यूपीएस को वापस लिया जाए। 11 साल बाद पेंशन का रूपांतरण बहाल किया जाए। हर 5 साल में पेंशन में वृद्धि की जाए। 

 
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