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‘मोदी थक चुके, अब रिटायर हों’: वंदे मातरम विवाद में जयराम रमेश का हमला, भाजपा को बताया ‘फर्जी राष्ट्रवादी’
Thu, 20 Aug 2026 06:30 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 20 Aug 2026 06:30 PM IST
सार
वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने 1937 के प्रस्ताव के अनुसार दो स्तोत्र गाने पर कायम रहने का फैसला किया है, जबकि भाजपा इसे तुष्टीकरण और राष्ट्रगीत के अपमान से जोड़ रही है। अब यह विवाद इतिहास, राष्ट्रवाद और मौजूदा राजनीति के बीच नई बहस बन गया है।
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जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
वंदे मातरम को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने गुरुवार को भाजपा नेताओं को ‘फर्जी और धोखेबाज राष्ट्रवादी’ बताया। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी हमला बोला। कांग्रेस का आरोप है कि दोनों नेता लोगों के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस का यह पलटवार अमित शाह के उस आरोप के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वंदे मातरम के केवल दो स्तोत्र गाने का कांग्रेस का फैसला राष्ट्रविरोधी है और कानून की खुली अवहेलना है।
1937 का प्रस्ताव क्या है?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि बुधवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में वंदे मातरम का मुद्दा उठा था। इस दौरान पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस का रुख साफ कर दिया। रमेश ने कहा कि खरगे ने 28 अक्तूबर 1937 को कांग्रेस कार्य समिति में पारित प्रस्ताव पढ़कर सुनाया। यह प्रस्ताव जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, गोविंद वल्लभ पंत और आचार्य नरेंद्र देव जैसे नेताओं ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर पारित किया था।
उन्होंने 25 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक का भी जिक्र किया। रमेश ने कहा कि उस दिन राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि जन गण मन राष्ट्रगान और वंदे मातरम राष्ट्रगीत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जन गण मन के पांच स्तोत्र हैं, लेकिन राष्ट्रगान के रूप में केवल एक स्तोत्र ही गाया जाता है। कांग्रेस के मुताबिक, गांधी, पटेल, बोस, आजाद और पंत जैसे नेताओं ने टैगोर की सलाह पर 1937 का प्रस्ताव पारित किया था। पार्टी पिछले 90 वर्षों से उसी हिस्से को राष्ट्रगीत के रूप में गाती रही है। खरगे ने बैठक में कहा, 'इसमें कोई दो राय नहीं है कि हम 1937 के प्रस्ताव का पालन करेंगे।'
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यह भी पढ़ें: 'वरना हम खुद कमेटी बनाएंगे’: रिटायर्ड जजों की सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को दिया एक हफ्ते का समय
जयराम रमेश ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पिछले साल वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर हुई चर्चा के दौरान भाजपा ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और रवींद्रनाथ टैगोर को लेकर एक खास राजनीतिक विमर्श बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है। रमेश ने कहा कि वंदे मातरम कांग्रेस के लिए भावनात्मक मुद्दा है, लेकिन गृह मंत्री इसका राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं।
रमेश ने आरोप लगाया कि छात्रों समेत लोगों के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस विवाद को हवा दी जा रही है। रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी को आजमाया जा चुका है, वह अब थक चुके हैं और उन्हें जल्द सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए।
शाह ने कांग्रेस पर लगाया तुष्टीकरण का आरोप?
इससे पहले अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था कि 1937 में तुष्टीकरण के लिए कांग्रेस ने ही वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांट दिया था। शाह ने दावा किया कि इसके बाद द्विराष्ट्र सिद्धांत को मजबूती मिली और आगे चलकर देश का विभाजन हुआ। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के 150वें वर्ष में मोदी सरकार ने इस ऐतिहासिक गलती को सुधारा और पूरे गीत को कानूनी स्वरूप दिया। अमित शाह ने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पर एक बार फिर अपने मतदाता आधार के लिए तुष्टीकरण की राह पर चलने का आरोप लगाया।
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस ने बुधवार को फैसला किया कि वह वंदे मातरम को लेकर अपनी सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था के 1937 के प्रस्ताव का पालन करेगी। पार्टी के सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल दो स्तोत्र गाए जाएंगे। यह फैसला भाजपा के उन आरोपों के बाद आया, जिनमें कहा गया था कि कांग्रेस के नेता पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का पूरा संस्करण नहीं गाकर राष्ट्रगीत का अपमान कर रहे हैं।
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1937 का प्रस्ताव क्या है?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि बुधवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में वंदे मातरम का मुद्दा उठा था। इस दौरान पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस का रुख साफ कर दिया। रमेश ने कहा कि खरगे ने 28 अक्तूबर 1937 को कांग्रेस कार्य समिति में पारित प्रस्ताव पढ़कर सुनाया। यह प्रस्ताव जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, गोविंद वल्लभ पंत और आचार्य नरेंद्र देव जैसे नेताओं ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर पारित किया था।
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उन्होंने 25 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक का भी जिक्र किया। रमेश ने कहा कि उस दिन राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि जन गण मन राष्ट्रगान और वंदे मातरम राष्ट्रगीत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जन गण मन के पांच स्तोत्र हैं, लेकिन राष्ट्रगान के रूप में केवल एक स्तोत्र ही गाया जाता है। कांग्रेस के मुताबिक, गांधी, पटेल, बोस, आजाद और पंत जैसे नेताओं ने टैगोर की सलाह पर 1937 का प्रस्ताव पारित किया था। पार्टी पिछले 90 वर्षों से उसी हिस्से को राष्ट्रगीत के रूप में गाती रही है। खरगे ने बैठक में कहा, 'इसमें कोई दो राय नहीं है कि हम 1937 के प्रस्ताव का पालन करेंगे।'
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जयराम रमेश ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पिछले साल वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर हुई चर्चा के दौरान भाजपा ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और रवींद्रनाथ टैगोर को लेकर एक खास राजनीतिक विमर्श बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है। रमेश ने कहा कि वंदे मातरम कांग्रेस के लिए भावनात्मक मुद्दा है, लेकिन गृह मंत्री इसका राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं।
रमेश ने आरोप लगाया कि छात्रों समेत लोगों के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस विवाद को हवा दी जा रही है। रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी को आजमाया जा चुका है, वह अब थक चुके हैं और उन्हें जल्द सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए।
शाह ने कांग्रेस पर लगाया तुष्टीकरण का आरोप?
इससे पहले अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था कि 1937 में तुष्टीकरण के लिए कांग्रेस ने ही वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांट दिया था। शाह ने दावा किया कि इसके बाद द्विराष्ट्र सिद्धांत को मजबूती मिली और आगे चलकर देश का विभाजन हुआ। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के 150वें वर्ष में मोदी सरकार ने इस ऐतिहासिक गलती को सुधारा और पूरे गीत को कानूनी स्वरूप दिया। अमित शाह ने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पर एक बार फिर अपने मतदाता आधार के लिए तुष्टीकरण की राह पर चलने का आरोप लगाया।
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस ने बुधवार को फैसला किया कि वह वंदे मातरम को लेकर अपनी सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था के 1937 के प्रस्ताव का पालन करेगी। पार्टी के सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल दो स्तोत्र गाए जाएंगे। यह फैसला भाजपा के उन आरोपों के बाद आया, जिनमें कहा गया था कि कांग्रेस के नेता पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का पूरा संस्करण नहीं गाकर राष्ट्रगीत का अपमान कर रहे हैं।