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'आप बीजेपी के हो क्या?': पुलिसवालों के परिजनों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के सवाल पर बोले राहुल; क्या है पूरा मामला?
Fri, 31 Jul 2026 02:30 PM IST
निर्मल कांत
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 31 Jul 2026 02:30 PM IST
सार
छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर सियासी घमासान बढ़ गया है। घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना पर न्याय की मांग की। वहीं, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इन परिवारों से पूछा कि क्या वे भाजपा से हैं। पढ़िए रिपोर्ट-
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राहुल गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी से शुक्रवार को दिल्ली पुलिस के घायल जवानों के परिजनों की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर राहुल गांधी ने जवाब दिया- आप बीजेपी के हो क्या?
पुलिसकर्मियों के परिजनों ने क्या कहा?
20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और जवानों के परिजनों ने शुक्रवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), एक उप-निरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मियों के परिवार शामिल हुए। उन्होंने उस दिन की घटना बताई और न्याय की मांग की।
एसीपी की पत्नी ने क्या बताया?
घायल एसीपी की पत्नी ने कहा कि 20 जुलाई की रात जब उनके पति घायल हालत में घर लौटे, तो वह पल उनके और उनकी दो साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक था। उन्होंने कहा कि वह दूसरे पुलिसकर्मियों के परिवारों के साथ अपना दर्द लोगों के सामने रखना चाहती हैं।
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उप-निरीक्षक की बेटी ने क्या आरोप लगाया?
दिल्ली पुलिस के घायल एक घायल उप-निरीक्षक की बेटी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने उनके पिता पर हमला किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता भारतीय नौसेना के पूर्व मरीन कमांडो रहे हैं। जंतर-मंतर के मंच के पास भीड़ ने उन्हें खींच लिया और पीट-पीटकर मार डालने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि बाद में उनके पिता को आरएमएल अस्पताल ले जाया गया, जहां वह करीब चार घंटे तक बेहोश रहे।
दूसरे परिवार ने क्या आरोप लगाया?
एक अन्य घायल पुलिसकर्मी के परिजन ने कहा कि यह छात्रों का प्रदर्शन नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शरारती तत्वों ने छात्रों के प्रदर्शन को बदनाम करने और संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उपद्रव करने वालों को सजा मिलनी चाहिए, जबकि असली छात्रों को उनके रिकॉर्ड की जांच के बाद छोड़ देना चाहिए।
राहुल गांधी ने पहले क्या मांग की थी?
यह घटनाक्रम राहुल गांधी की उस मांग के एक दिन बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विशेषाधिकार नोटिस पर बढ़ा विवाद
इस बीच, छात्र प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने 29 जुलाई को लोकसभा में राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया।
ये भी पढ़ें: संसद परिसर में साधु के भेष में प्रदर्शन पर नया विवाद: संत समाज ने क्यों जताई नाराजगी, स्पीकर से क्या मांग की?
वहीं, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उनकी पार्टी केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जितेंद्र सिंह ने सदन में यह कहकर गुमराह किया कि प्रदर्शन के दौरान कोई गोली नहीं चली। वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी ने पैलेट गन और एके-47 के इस्तेमाल के सबूत दिखाए हैं। इसलिए केंद्रीय मंत्री ने सदन को गुमराह किया है।
खरगे ने क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस पर कहा कि उनकी पार्टी के सांसद सक्षम हैं और लोकसभा में इसका जवाब देंगे।
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पुलिसकर्मियों के परिजनों ने क्या कहा?
20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और जवानों के परिजनों ने शुक्रवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), एक उप-निरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मियों के परिवार शामिल हुए। उन्होंने उस दिन की घटना बताई और न्याय की मांग की।
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एसीपी की पत्नी ने क्या बताया?
घायल एसीपी की पत्नी ने कहा कि 20 जुलाई की रात जब उनके पति घायल हालत में घर लौटे, तो वह पल उनके और उनकी दो साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक था। उन्होंने कहा कि वह दूसरे पुलिसकर्मियों के परिवारों के साथ अपना दर्द लोगों के सामने रखना चाहती हैं।
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उप-निरीक्षक की बेटी ने क्या आरोप लगाया?
दिल्ली पुलिस के घायल एक घायल उप-निरीक्षक की बेटी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने उनके पिता पर हमला किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता भारतीय नौसेना के पूर्व मरीन कमांडो रहे हैं। जंतर-मंतर के मंच के पास भीड़ ने उन्हें खींच लिया और पीट-पीटकर मार डालने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि बाद में उनके पिता को आरएमएल अस्पताल ले जाया गया, जहां वह करीब चार घंटे तक बेहोश रहे।
दूसरे परिवार ने क्या आरोप लगाया?
एक अन्य घायल पुलिसकर्मी के परिजन ने कहा कि यह छात्रों का प्रदर्शन नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शरारती तत्वों ने छात्रों के प्रदर्शन को बदनाम करने और संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उपद्रव करने वालों को सजा मिलनी चाहिए, जबकि असली छात्रों को उनके रिकॉर्ड की जांच के बाद छोड़ देना चाहिए।
राहुल गांधी ने पहले क्या मांग की थी?
यह घटनाक्रम राहुल गांधी की उस मांग के एक दिन बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विशेषाधिकार नोटिस पर बढ़ा विवाद
इस बीच, छात्र प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने 29 जुलाई को लोकसभा में राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया।
ये भी पढ़ें: संसद परिसर में साधु के भेष में प्रदर्शन पर नया विवाद: संत समाज ने क्यों जताई नाराजगी, स्पीकर से क्या मांग की?
वहीं, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उनकी पार्टी केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जितेंद्र सिंह ने सदन में यह कहकर गुमराह किया कि प्रदर्शन के दौरान कोई गोली नहीं चली। वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी ने पैलेट गन और एके-47 के इस्तेमाल के सबूत दिखाए हैं। इसलिए केंद्रीय मंत्री ने सदन को गुमराह किया है।
खरगे ने क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस पर कहा कि उनकी पार्टी के सांसद सक्षम हैं और लोकसभा में इसका जवाब देंगे।