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दिल्ली: ब्रेक की जगह दबाया एक्सीलेटर, गई इंजीनियर की जान; परिवार को मिलेगा 1.43 करोड़ मुआवजा, क्या है मामला?

Sun, 18 Oct 2026 01:54 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 18 Oct 2026 01:54 PM IST
सार

दिल्ली में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले डीडीए के 59 वर्षीय एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के परिवार को मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 1.43 करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा देने का आदेश दिया है। सितंबर 2022 में आरके पुरम में उनकी कार सड़क किनारे खड़ी बस से टकरा गई थी। हादसे के तीन दिन बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

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Accelerator pressed instead of brake DDA engineer loses life family receive 1.43 crore in compensation
ट्रिब्यूनल का फैसला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दिल्ली में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले दिल्ली विकास प्राधिकरण के 59 वर्षीय एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के परिवार को मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 1.43 करोड़ रुपये से ज्यादा मुआवजा देने का आदेश दिया है। सितंबर 2022 में उनकी कार सड़क किनारे खड़ी बस से टकरा गई थी। ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी अभिलाष मल्होत्रा ने 13 अक्टूबर को बीमा कंपनी को मुआवजे की रकम जमा करने का निर्देश दिया।

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2022 में हुआ था हादसा
मृतक की पत्नी की याचिका के मुताबिक, 17 सितंबर 2022 को इंजीनियर कार की अगली यात्री सीट पर बैठे थे। आरके पुरम में आउटर रिंग रोड पर सीएनजी पंप के पास कार बस स्टॉप पर खड़ी बस के पिछले हिस्से से टकरा गई। उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया और फिर वसंत कुंज स्थित इंडियन स्पाइनल इंजरी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां 20 सितंबर को उनकी मौत हो गई।
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ब्रेक की जगह दबा दिया एक्सीलेटर
याचिका के अनुसार, कार चला रहा गुलफाम केवल लर्नर लाइसेंस रखता था। इसी दौरान उसने ब्रेक की जगह गलती से एक्सीलेटर दबा दिया, जिससे कार बस से टकरा गई। ट्रिब्यूनल ने कहा कि चालक की इस दलील को मानने पर भी उसकी लापरवाही खत्म नहीं होती।
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इंजीनियर देते थे हर महीने 20 हजार रुपये
कार की मालिक और गुलफाम की मां रहमीना खातून ने अपने बयान में स्वीकार किया कि इंजीनियर ने गुलफाम को दफ्तर लाने-ले जाने के लिए रखा था और उसे हर महीने 20 हजार रुपये देते थे। ट्रिब्यूनल ने माना कि इंजीनियर किराया देकर सफर कर रहे थे। 

बीमा कंपनी को पहले देना होगा मुआवजा
बीमा कंपनी ने दलील दी कि चालक के पास केवल लर्नर लाइसेंस था, कार पर 'L' का निशान नहीं था और उसके साथ कोई स्थायी लाइसेंसधारी व्यक्ति भी नहीं था। निजी कार का इस्तेमाल किराये पर सवारी ले जाने के लिए किया जा रहा था। ट्रिब्यूनल ने पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन माना, लेकिन 'पे एंड रिकवर' सिद्धांत लागू किया। इसके तहत बीमा कंपनी पहले मुआवजा देगी और बाद में जिम्मेदार पक्षों से रकम वसूल सकेगी।

वेतन के आधार पर तय हुई मुआवजे की रकम
ट्रिब्यूनल ने इंजीनियर की जुलाई 2022 की वेतन पर्ची के आधार पर कर कटने के बाद की आय का आकलन किया। भविष्य की संभावित आय में 15 प्रतिशत जोड़ने और निजी खर्च के लिए एक-तिहाई रकम घटाने के बाद आश्रितों की आर्थिक निर्भरता के नुकसान की भरपाई करीब 1.4 करोड़ रुपये तय की गई। इसमें अन्य मदों और ब्याज की रकम भी जोड़ी गई।


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16 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
ट्रिब्यूनल ने चालक, कार मालिक और बीमा कंपनी को मुआवजे के भुगतान के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया। बीमा कंपनी को रकम वसूलने का अधिकार भी दिया गया। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां केवल मुआवजे की कार्यवाही तक सीमित हैं और चालक के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को प्रभावित नहीं करेंगी। मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।

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