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Aditya Thackeray: आदित्य ठाकरे संभालेंगे शिवसेना यूबीटी की कमान? कार्यकारी अध्यक्ष बनने पर दिया ये अपडेट
आईएएनएस, भुवनेश्वर
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Wed, 15 Apr 2026 06:21 PM IST
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सार
Shiv Sena UBT Leadership Update: आदित्य ठाकरे को शिवसेना (UBT) का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलें लगातार चल रही है। माना जा रहा था पार्टी में नए नेतृत्व पर शिवसेना बड़ा फैसला कर सकती है। ऐसे में अब खुद आदित्य ठाकरे मीडिया के सामने आए हैं। आइए, इस खबर में जानते हैं कि इस मामले आदित्य ने क्या कुछ कहा। साथ ही संजय राउत के बयान को भी जानेंगे।
आदित्य ठाकरे
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों कयासों का दौर जारी है। शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलें लगातार चल रही हैं। हालांकि इन खबरों पर अब खुद आदित्य ठाकरे ने विराम लगा दिया।
इस मामले पर आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि कुछ टीवी चैनलों पर चल रही खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में उन्हें किसी नए पद पर नियुक्त करने को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है।
क्या सच में कार्यकारी अध्यक्ष बनने की चर्चा थी?
दरअसल, खबरें थीं कि आदित्य ठाकरे को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। यह वही पद है जिसे पहले उनके पिता उद्धव ठाकरे संभाल चुके हैं। बाल ठाकरे के निधन के बाद उद्धव ठाकरे ने इसी पद के जरिए पार्टी की कमान संभाली थी।
मामले पर क्या बोले संजय राउत?
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भी इस तरह की खबरों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले पार्टी प्रमुख ही लेते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर युवा नेतृत्व को आगे लाया जाता है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।
विपक्ष ने भी साधा निशाना
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने इस मुद्दे को लेकर शिवसेना (यूबी) पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ‘प्राइवेट लिमिटेड’ बन गई है और इसमें वरिष्ठ नेताओं की कोई भूमिका नहीं रह गई है। उन्होंने यह भी कहा कि आदित्य ठाकरे अभी पार्टी संभालने के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं हैं।
परिसीमन पर भी राउत का बड़ा बयान
संजय राउत ने लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया बिना जनगणना के की जा रही है। इससे देश में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। राउत ने चेतावनी दी कि खासकर दक्षिणी राज्यों में इस कदम का तीखा विरोध देखने को मिल सकता है।
राउत ने साफ किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण कानून यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध नहीं करती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के पक्ष में शिवसेना (यूबीटी) हमेशा खड़ी रही है। हालांकि उन्होंने परिसीमन को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि यह मुद्दा देश में गंभीर राजनीतिक स्थिति पैदा कर सकता है।
राउत ने बताया कि प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 850 तक की जा सकती है। महाराष्ट्र में सीटें 48 से बढ़ाकर 72 और विधानसभा सीटें 288 से बढ़ाकर 400 करने का प्रस्ताव है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मौजूदा विधानसभा भवन में इतने विधायकों के बैठने की जगह नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि क्या यह महाराष्ट्र को बांटने की कोई साजिश तो नहीं है। राउत ने कहा कि इस तरह के फैसले बिना व्यापक सहमति और जनगणना के आधार पर नहीं किए जाने चाहिए।
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इस मामले पर आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि कुछ टीवी चैनलों पर चल रही खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में उन्हें किसी नए पद पर नियुक्त करने को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है।
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क्या सच में कार्यकारी अध्यक्ष बनने की चर्चा थी?
दरअसल, खबरें थीं कि आदित्य ठाकरे को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। यह वही पद है जिसे पहले उनके पिता उद्धव ठाकरे संभाल चुके हैं। बाल ठाकरे के निधन के बाद उद्धव ठाकरे ने इसी पद के जरिए पार्टी की कमान संभाली थी।
मामले पर क्या बोले संजय राउत?
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भी इस तरह की खबरों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले पार्टी प्रमुख ही लेते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर युवा नेतृत्व को आगे लाया जाता है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।
विपक्ष ने भी साधा निशाना
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने इस मुद्दे को लेकर शिवसेना (यूबी) पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ‘प्राइवेट लिमिटेड’ बन गई है और इसमें वरिष्ठ नेताओं की कोई भूमिका नहीं रह गई है। उन्होंने यह भी कहा कि आदित्य ठाकरे अभी पार्टी संभालने के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं हैं।
परिसीमन पर भी राउत का बड़ा बयान
संजय राउत ने लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया बिना जनगणना के की जा रही है। इससे देश में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। राउत ने चेतावनी दी कि खासकर दक्षिणी राज्यों में इस कदम का तीखा विरोध देखने को मिल सकता है।
राउत ने साफ किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण कानून यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध नहीं करती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के पक्ष में शिवसेना (यूबीटी) हमेशा खड़ी रही है। हालांकि उन्होंने परिसीमन को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि यह मुद्दा देश में गंभीर राजनीतिक स्थिति पैदा कर सकता है।
राउत ने बताया कि प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 850 तक की जा सकती है। महाराष्ट्र में सीटें 48 से बढ़ाकर 72 और विधानसभा सीटें 288 से बढ़ाकर 400 करने का प्रस्ताव है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मौजूदा विधानसभा भवन में इतने विधायकों के बैठने की जगह नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि क्या यह महाराष्ट्र को बांटने की कोई साजिश तो नहीं है। राउत ने कहा कि इस तरह के फैसले बिना व्यापक सहमति और जनगणना के आधार पर नहीं किए जाने चाहिए।
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