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Opposition: अखिलेश-तेजस्वी की नसीहत- बड़ा दिल दिखाए कांग्रेस, तभी बचेगी विपक्षी एकता
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 09 Jun 2026 05:06 AM IST
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सार
सपा प्रमुख अखिलेश यादव और राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि विपक्षी गठबंधन को मजबूत रखने के लिए कांग्रेस पार्टी को बड़ा दिल दिखाना होगा। आइए जानते हैं कि सपा प्रमुख और राजद नेता ने ये बात क्यों कही।
दिल्ली में इकट्ठा हुए विपक्षी नेता
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
गठबंधन की बैठक में कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच भविष्य के शक्ति संतुलन की लड़ाई की झलक भी साफ दिखाई दी। समाजवादी पार्टी (सपा ) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने कांग्रेस, खासकर राहुल गांधी को स्पष्ट संदेश दिया कि विपक्षी एकता तभी मजबूत रह सकती है, जब क्षेत्रीय दलों को उनकी राजनीतिक ताकत के अनुरूप स्थान दिया जाए।
अखिलेश ने द्रमुक और आम आदमी पार्टी की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विपक्षी दलों को साथ बनाए रखने की जिम्मेदारी कांग्रेस को निभानी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते कांग्रेस को अधिक उदार और समन्वयकारी भूमिका अपनानी चाहिए।
यूपी का गणित याद दिलाया
बैठक में अखिलेश ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कांग्रेस को पिछले लोकसभा चुनाव का गणित भी याद दिलाया। उन्होंने कहा कि सपा ने गठबंधन के तहत कांग्रेस को 17 सीटें दी थीं, जिनमें कांग्रेस छह सीटें जीतने में सफल रही। उनका संकेत साफ था कि गठबंधन की सफलता केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि क्षेत्रीय दलों के संगठन, कार्यकर्ताओं और सामाजिक आधार की भी देन थी। दरअसल, अखिलेश का यह बयान 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश भी है। सपा का संदेश साफ है कि उत्तर प्रदेश में विपक्षी राजनीति का केंद्र वही है और भविष्य के किसी भी सीट बंटवारे में उसकी भूमिका निर्णायक रहेगी।
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तेजस्वी ने भी बढ़ाया दबाव
अखिलेश के सुर में सुर मिलाते हुए तेजस्वी यादव ने भी कहा कि कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों को अधिक राजनीतिक स्थान देना होगा। बिहार में भी सीटों के तालमेल और नेतृत्व की भूमिका को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच खींचतान देखने को मिली है। बैठक में तेजस्वी ने संकेत दिया कि भाजपा के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए कांग्रेस को सहयोगी दलों की जमीनी ताकत और राजनीतिक वास्तविकताओं को स्वीकार करना होगा।
एकता भी, ताकत का संदेश भी
दिलचस्प यह है कि भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष की बात करने के साथ क्षेत्रीय दल कांग्रेस पर दबाव की रणनीति भी अपना रहे हैं। बंगाल में तृणमूल, तमिलनाडु में द्रमुक, बिहार में राजद और यूपी में सपा अपने राज्यों में कांग्रेस को महत्वपूर्ण सहयोगी तो मानते हैं, पर नेतृत्व वाली भूमिका देने के पक्ष में नहीं दिखाई देते। बैठक में अखिलेश व तेजस्वी की जुगलबंदी को आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों की जमीनी ताकत का अहसास कराने वाले संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अखिलेश ने द्रमुक और आम आदमी पार्टी की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विपक्षी दलों को साथ बनाए रखने की जिम्मेदारी कांग्रेस को निभानी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते कांग्रेस को अधिक उदार और समन्वयकारी भूमिका अपनानी चाहिए।
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यूपी का गणित याद दिलाया
बैठक में अखिलेश ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कांग्रेस को पिछले लोकसभा चुनाव का गणित भी याद दिलाया। उन्होंने कहा कि सपा ने गठबंधन के तहत कांग्रेस को 17 सीटें दी थीं, जिनमें कांग्रेस छह सीटें जीतने में सफल रही। उनका संकेत साफ था कि गठबंधन की सफलता केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि क्षेत्रीय दलों के संगठन, कार्यकर्ताओं और सामाजिक आधार की भी देन थी। दरअसल, अखिलेश का यह बयान 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश भी है। सपा का संदेश साफ है कि उत्तर प्रदेश में विपक्षी राजनीति का केंद्र वही है और भविष्य के किसी भी सीट बंटवारे में उसकी भूमिका निर्णायक रहेगी।
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तेजस्वी ने भी बढ़ाया दबाव
अखिलेश के सुर में सुर मिलाते हुए तेजस्वी यादव ने भी कहा कि कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों को अधिक राजनीतिक स्थान देना होगा। बिहार में भी सीटों के तालमेल और नेतृत्व की भूमिका को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच खींचतान देखने को मिली है। बैठक में तेजस्वी ने संकेत दिया कि भाजपा के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए कांग्रेस को सहयोगी दलों की जमीनी ताकत और राजनीतिक वास्तविकताओं को स्वीकार करना होगा।
एकता भी, ताकत का संदेश भी
दिलचस्प यह है कि भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष की बात करने के साथ क्षेत्रीय दल कांग्रेस पर दबाव की रणनीति भी अपना रहे हैं। बंगाल में तृणमूल, तमिलनाडु में द्रमुक, बिहार में राजद और यूपी में सपा अपने राज्यों में कांग्रेस को महत्वपूर्ण सहयोगी तो मानते हैं, पर नेतृत्व वाली भूमिका देने के पक्ष में नहीं दिखाई देते। बैठक में अखिलेश व तेजस्वी की जुगलबंदी को आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों की जमीनी ताकत का अहसास कराने वाले संदेश के रूप में देखा जा रहा है।