Anti Paper Leak Bill: छह महीने में सजा, 10 साल जेल और 10 करोड़ तक जुर्माना; लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पेश
नीट पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इसमें पेपर लीक पर 5 से 10 साल तक जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। संगठित अपराध पर 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना, दो महीने में जांच और तीन महीने में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का प्रस्ताव है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
#MonsoonSession2026
Union Minister @DrJitendraSingh introduces the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) (Amendment) Bill, 2026 in the Lok Sabha.विज्ञापन
The Bill seeks to amend the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024, with the objective of further… pic.twitter.com/kPhFoVHvbMविज्ञापन विज्ञापन— SansadTV (@sansad_tv) July 27, 2026
यह भी पढ़ें- राहुल को नेता प्रतिपक्ष पद से हटाने की तैयारी?: निशिकांत दुबे का बड़ा दावा, विदेश यात्राओं की हो एसआईटी जांच
10 साल तक जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक या सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा जाता है तो उसे कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। अगर मामला संगठित अपराध से जुड़ा हुआ पाया जाता है तो दोषियों को कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना होगा।
मौजूदा कानून से कैसे अलग है नया प्रस्ताव?
वर्तमान कानून के तहत पेपर लीक और नकल जैसे मामलों में 3 से 5 साल तक की जेल का प्रावधान है। वहीं संगठित तरीके से परीक्षा में धांधली करने वालों के लिए 5 से 10 साल की सजा और कम से कम 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है। अब सरकार ने सामान्य पेपर लीक के मामलों में भी सजा और जुर्माने को और अधिक कड़ा करने का प्रस्ताव रखा है।
दो महीने में जांच, तीन महीने में मुकदमे का फैसला
विधेयक में कहा गया है कि-
- पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
- सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का अधिकार होगा।
- चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है।
- फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामलों की रोजाना सुनवाई होगी।
केंद्र बनाएगा स्पेशल टास्क फोर्स
विधेयक में केंद्र सरकार को जरूरत पड़ने पर विशेष जांच दल गठित करने का अधिकार भी दिया गया है। यह टीम बड़े या संवेदनशील पेपर लीक मामलों की जांच करेगी।
परीक्षा प्रक्रिया के लिए नए मानक
विधेयक में परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए कई नए प्रावधान भी जोड़े गए हैं। इनमें शामिल हैं-
- परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट
- उम्मीदवारों की बायोमेट्रिक जांच
- सुरक्षा और स्क्रीनिंग
- सीट आवंटन की व्यवस्था
- प्रश्नपत्र तैयार करने और सुरक्षित अपलोड करने की प्रक्रिया
- परीक्षा के दौरान निगरानी
- परीक्षा के बाद की प्रक्रिया
- दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए स्क्राइब संबंधी दिशा-निर्देश
15 तरह की गतिविधियों को बनाया जाएगा अपराध
विधेयक में 15 प्रकार के अपराधों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख हैं-
- प्रश्नपत्र लीक करना
- OMR शीट से छेड़छाड़
- फर्जी वेबसाइट बनाना
- नकली एडमिट कार्ड जारी करना
- परीक्षा से जुड़ी अन्य धोखाधड़ी
विपक्ष का विरोध, स्पीकर ने चर्चा की अपील की
विधेयक पेश होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं को इस पर बोलने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन कोई सदस्य नहीं बोला। इसके बाद उन्होंने कहा कि सभी दल लंबे समय से नीट पेपर लीक पर चर्चा की मांग कर रहे हैं और यह विधेयक परीक्षा व्यवस्था सुधारने की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने विपक्ष से नारेबाजी के बजाय चर्चा में भाग लेने और सुझाव देने की अपील की। हालांकि हंगामा जारी रहने पर सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
नीट विवाद के बाद आया विधेयक
सरकार यह संशोधन ऐसे समय लाई है जब नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों का बड़ा आंदोलन हुआ। इस विवाद के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सरकार की प्रमुख मांगें मानने और मंत्री के इस्तीफे के बाद अपना 36 दिन लंबा आंदोलन समाप्त कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाने का भरोसा दिया है। उन्होंने हाल ही में इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की है, जो परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह 'लीक-प्रूफ' बनाने के लिए सुझाव देगी।
#MonsoonSession2026
— SansadTV (@sansad_tv) July 27, 2026
"The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) (Amendment) Bill, 2026 पर चर्चा के लिए विपक्ष नारेबाज़ी क्यों कर रहा है, यह मेरी समझ से परे है। पूरे देश के युवाओं की नज़र इस विधेयक पर है।" — संसदीय कार्य मंत्री @KirenRijiju
भारी शोर-शराबे के बीच… pic.twitter.com/nCZNW4yLKU
यह भी पढ़ें- Paper Leak: 6 माह में सजा, 10 साल जेल और एक करोड़ तक जुर्माना, पेपर लीक पर मोदी कैबिनेट की 'सर्जिकल स्ट्राइक'?
पहले क्यों लाया गया था कानून?
सरकार ने वर्ष 2024 में पहली बार पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट लागू किया था। इसका उद्देश्य यूपीएससी, एसएससी, रेलवे भर्ती, बैंकिंग भर्ती, एनटीए समेत केंद्र सरकार की कई परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को रोकना था। अब उसी कानून को और अधिक सख्त बनाने के लिए यह संशोधन विधेयक लाया गया है।