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PoJK Elections: भारत की पाकिस्तान को दो टूक, खारिज किए पीओजेके के चुनाव, कहा- यह अवैध कब्जे को छिपाने की कोशिश

Tue, 28 Jul 2026 04:42 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 28 Jul 2026 04:42 PM IST
सार

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में कराए जा रहे चुनावों को स्वीकार करने से इनकार करते हुए उन्हें केवल एक औपचारिक कवायद बताया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि संबंधित क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां की मौजूदा प्रक्रिया वास्तविक स्थिति को बदल नहीं सकती। भारत ने आरोप लगाया कि इस कदम के जरिए अवैध कब्जे और स्थानीय लोगों से जुड़े गंभीर मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास किया जा रहा है।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI

विस्तार

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में कराए जा रहे तथाकथित विधानसभा चुनावों पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इन चुनावों से जुड़ी खबरें देखी हैं और यह पूरी कवायद पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध दिखाने की कोशिश है।
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रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में कराए जा रहे तथाकथित विधानसभा चुनावों से जुड़ी खबरें देखी हैं। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें वे क्षेत्र भी शामिल हैं जो इस समय पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे में हैं, भारत के अभिन्न अंग हैं।"
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विदेश मंत्रालय बोले- पाकिस्तान करवा रहा दिखावटी चुनाव
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "यह मौजूदा दिखावटी चुनावी प्रक्रिया पाकिस्तान के अवैध कब्जे पर पर्दा डालने और क्षेत्र में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों को छिपाने की एक कोशिश मात्र है।" विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शन वहां के लोगों के आर्थिक शोषण, उनके मौलिक अधिकारों से वंचित किए जाने और प्रशासनिक दमन का सीधा परिणाम हैं।
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भारत-चीन सीमा व्यापार पर रणधीर जायसवाल ने कहा, "अगस्त 2025 में, दोनों पक्षों ने तीन निर्दिष्ट व्यापारिक बिंदुओं, यानी लिपुलेख दर्रा, शिपकी ला दर्रा और नाथू ला दर्रे के माध्यम से सीमा व्यापार फिर से शुरू करने पर सहमति व्यक्त की थी।" उन्होंने बताया, "विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 27 से 28 जुलाई तक चीन की आधिकारिक यात्रा की। उन्होंने बीजिंग में अपने आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अंतर्राष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सुन हैयान से मुलाकात के साथ की।"

चीन को लेकर क्या बोला विदेश मंत्रालय?
प्रवक्ता जायसवाल ने बताया, "उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के लिए दोनों नेताओं के मार्गदर्शन के कार्यान्वयन को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। इसके बाद, विदेश सचिव ने चीन की विदेश मामलों की उप मंत्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों पर समग्र रूप से चर्चा की और व्यापार और आर्थिक संबंधों, संस्कृति और जन-जन आदान-प्रदान के माध्यम से पारस्परिक रूप से लाभकारी परिणामों सहित, भारत और चीन को साझेदार और एक-दूसरे के लिए विकास के अवसर मानने वाले दोनों नेताओं के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के साधनों पर विचार-विमर्श किया।"


उन्होंने बताया, "दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को स्वीकार किया। विदेश सचिव ने चीनी जन राजनीतिक परामर्श सम्मेलन की 14वीं राष्ट्रीय समिति के उप महासचिव हांग लियांग से भी मुलाकात की। आज, विदेश सचिव ने राष्ट्रीय अकादमी, केंद्रीय पार्टी स्कूल के उपाध्यक्ष ली वेंटांग से मुलाकात की।" उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने उन क्षेत्रों या संभावित अवसरों पर चर्चा की, जहां दोनों पक्ष सहयोग कर सकते हैं।
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