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Assam: असम में भाजपा जीत की लगाएगी हैट्रिक या बदलेगा सत्ता समीकरण? आज तय होगी 722 उम्मीदवारों की किस्मत

N Arjun एन अर्जुन
Updated Thu, 09 Apr 2026 05:26 AM IST
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assam assembly election 2026 bjp on winning hat trick or change in government
assam assembly election 2026 - फोटो : अमर उजाला
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असम में 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए आज मतदान होना है, जहां सत्ता की लड़ाई अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। एक ओर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में भाजपा लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में है, तो दूसरी ओर गौरव गोगोई की अगुवाई में कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है। राज्य की ज्यादातर सीटों पर सीधा मुकाबला एनडीए और विपक्षी गठबंधन के बीच है, ऐसे में आज का मतदान यह तय करेगा कि असम में भाजपा का दबदबा बरकरार रहेगा या फिर सियासी समीकरण बदलेंगे। मतदान को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
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महिलाओं को टिकट देने में कांग्रेस आगे
विधानसभा चुनाव में सिर्फ 59 महिला उम्मीदवार हैं। इनमें कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 14 महिला उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि भाजपा ने 7 महिलाओं को टिकट दिया है। यह आंकड़ा राज्य की राजनीति में महिला भागीदारी की सीमित उपस्थिति को भी दर्शाता है।
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ये दिग्गज चुनाव मैदान में ठोक रहे ताल
कुल 722 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई, नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया, एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल, राइजर दल के नेता अखिल गोगोई और एजेपी अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं। राज्य के 35 जिलों में कुल 31,490 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे। इस चुनाव में 2.50 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें करीब 1.25 करोड़ महिलाएं और 318 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।

किस पार्टी ने कितने उम्मीदवार उतारे
  • उम्मीदवारों के लिहाज से कांग्रेस सबसे आगे है, जिसने 99 प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। भाजपा ने 90 उम्मीदवारों को टिकट दिया है।
  • एआईयूडीएफ 30 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि एनडीए के सहयोगी दल एजीपी 26 और बीपीएफ 11 सीटों पर किस्मत आजमा रहे हैं। इसके अलावा विपक्षी दलों में राइजर दल 13, असम जातीय परिषद 10, सीपीएम 3, एपीएचएलसी 2, आम आदमी पार्टी 18, यूपीपीएल 18, तृणमूल
  • कांग्रेस 22 और झारखंड मुक्ति मोर्चा 16 सीटों पर मैदान में है। वहीं 258 निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं।

दो सीटों पर सबसे ज्यादा 15 और 9 सीटों पर सबसे कम दो-दो उम्मीदवार
अलगापुर-कटलीचेरा और करीमगंज साउथ सीटों पर सबसे ज्यादा 15-15 उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं रंगिया, जागीरोड (एससी), होजाई, नौदुआर, जोनाई (एसटी), डूमडूमा, महमारा, टियोक और लखीपुर जैसी नौ सीटों पर सिर्फ दो-दो उम्मीदवार ही चुनाव लड़ रहे हैं।

इन सीटों पर टिकीं सबकी नजरें
इस बार कई हाई-प्रोफाइल मुकाबले चुनाव को और रोचक बना रहे हैं। जलुकबारी सीट से हिमंत बिस्व सरमा लगातार छठी जीत की तलाश में हैं, जहां उनका मुकाबला कांग्रेस की बिदिशा नियोग से है। जोरहाट सीट से गौरव गोगोई विधानसभा में पहली बार प्रवेश की कोशिश करेंगे। उन्हें भाजपा के हितेंद्रनाथ गोस्वामी चुनौती दे रहे हैं। नाजिरा में देबब्रत सैकिया अपनी पारिवारिक सीट बचाने की जंग लड़ रहे हैं। बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन की तामुलपुर सीट पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा, जहां यूपीपीएल प्रमुख प्रमोद बोरों की सीधी टक्कर बीपीएफ के दाइमारी से है। इसके अलावा, बिन्नाकांडी से बदरुद्दीन अजमल, सिबसागर से अखिल गोगोई, खोवांग से लुरिनज्याोति गोगोई, बोकारहाट से एजीपी अध्यक्ष अतुल बोरा और कालियाबोर से मंत्री केशव महंत भी प्रमुख मुकाबलों में शामिल हैं। इसके अलावा दिसपुर सीट पर भी सबकी नजर रहेगी।

असम में इस बार 6.42 लाख मतदाता पहली बार वोट डालेंगे, जो चुनाव परिणामों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। वहीं 80 वर्ष से अधिक आयु के 2.50 लाख मतदाता, जिनमें 2,466 शतायु शामिल हैं, लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा, 2.05 लाख दिव्यांग मतदाता भी मतदान प्रक्रिया में शामिल होंगे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि असम का यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन या बरकरार रखने का नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों, गठबंधनों और जनमत की दिशा तय करने वाला चुनाव है। भाजपा जहां हैट्रिक के जरिए अपनी पकंड़ मजबूत करना चाहती है, वहीं कांग्रेस के लिए यह अस्तित्व और वापसी की निर्णायक लड़ाई है। आज होने वाला मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजे राज्य की राजनीति का नया अध्याय लिखेंगे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल के अनुसार सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे रियल टाइम निगरानी संभव होगी। चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, विशेषकर सीआरपीएफ की तैनाती की गई है।


 
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